जहरीली शराब के कहर में अलवर का हाल: क्या रखेगी प्रशासन की ओर से कार्रवाई?
अलवर जिले के दो गांवों पैंतपुर और किशनपुर में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। केवल तीन दिनों में आठ लोगों की जान जाने के बाद, स्थानीय लोगों में गहरा शोक है। यह त्रासदी 26 अप्रैल से शुरू हुई जब सुरेश वाल्मीकि, 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई। इसके बाद, 27 अप्रैल को रामकिशोर और रामुकुमार की भी मौत हो गई। सबसे भयंकर स्थिति 28 अप्रैल को देखी गई, जब पांच लोगों, जिनमें लालाराम, भारत और ओमी शामिल थे, की जान चली गई।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध शराब कारोबार की जानकारी प्रशासन और पुलिस के पास थी, लेकिन उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रशासन की यह लापरवाही और अवैध कारोबार के प्रति नरम रुख ने लोगों को गुस्से में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा या सहायता नहीं मिल रही है।
क्या है जहरीली शराब का मामला?
जहरीली शराब के कारोबार का यह मामला अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र में हुआ है। 26 अप्रैल से शुरू होकर तीन दिनों में यह घटना पूरे गांव को प्रभावित कर चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई गंभीर कार्रवाई न किए जाने के कारण गांव में अव्यवस्था और आतंक का माहौल बना हुआ है। हालात की गंभीरता को देखते हुए, लोगों ने महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया है।
महापंचायत में ग्रामीणों ने तय किया है कि वे दोषी अधिकारियों और शराब माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। इसके साथ ही, वे चाहते हैं कि प्रशासन अवैध शराब कारोबार को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए।
अवैध शराब का कारोबार और प्रशासन की लापरवाही
ग्रामीणों की शिकायतें बताती हैं कि इलाके में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा था। एक ठेकेदार को आधिकारिक तौर पर एक शराब दुकान खोलने की अनुमति मिली थी, लेकिन उसने कई अवैध दुकानें भी खोल रखी थीं, जहाँ जहरीली शराब बेची जा रही थी। लोगों का आरोप है कि इसके लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत है।
अधिकारी जब गांव में पहुंचे, तब कई लोगों की मौत हो चुकी थी। उनकी गंभीरता में कोई देखने वाला नहीं था। ग्रामीणों ने इस बात पर गहरा रोष प्रकट किया है कि प्रशासन ने शुरू से ही लापरवाह रुख अपनाया है।
आगे का रास्ता: महापंचायत की पहल
जब प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो स्थानीय लोगों ने महापंचायत बुलाई। इस महापंचायत में यह तय किया गया कि वे अब इस मुद्दे को प्रशासन के सामने मजबूती से रखेंगें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगें।
महापंचायत में ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें न्याय चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परिवारों को इस त्रासदी का सामना नहीं करना पड़े। इस मुद्दे पर आंदोलन चलाने की भी चर्चा की गई, ताकि प्रशासन को उनकी मांगों का गंभीरता से विचार करना पड़े।
गांवों में शोक और डर का माहौल
गांव में अभी भी कई लोग जीवन और मौत के बीच लड़ाई कर रहे हैं। हर गली-कोने में मातम का माहौल है और ग्रामीणों में भय का सम्राज्य है। लोग लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि प्रशासन कब तक इस जलजले को नजरअंदाज करेगा और कब तक इस जहरीले कारोबार पर रोक लगेगी।
अलवर की इस घटना ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है और अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार अपनी जिम्मेदारियों को समझेगा? यह समय है कि लोग एकजुट होकर इस मुद्दे पर आवाज उठाएं और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस मामले में ठोस कदम उठाएगा और अवैध शराब के कारोबार को समाप्त करेगा ताकि भविष्य में और कोई जीवन ना जाए।
अस्वीकृति
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