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Thursday, January 22, 2026

पहलगाम आतंकवादी हमले पर दानिश कनेरिया का अहम सवाल: ‘शहबाज शरीफ ने निंदा क्यों नहीं की?’

इंडियापहलगाम आतंकवादी हमले पर दानिश कनेरिया का अहम सवाल: 'शहबाज शरीफ ने निंदा क्यों नहीं की?'

जब आतंकवाद ने फिर से सिर उठाया: एक गंभीर मुद्दा

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे। यह हमला एक बार फिर से उस गंभीर मुद्दे को उजागर करता है, जो आतंकवाद और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़ा हुआ है। इस हमले की निंदा की गई है, लेकिन पाकिस्तान से कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने अपनी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर सीधे सवाल उठाए हैं।

कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?

1. कौन: पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने इस हमले पर सवाल उठाया है।
2. क्या: उन्होंने शहबाज शरीफ से सवाल किया कि पहलगाम हमले की निंदा क्यों नहीं की गई।
3. कहाँ: यह हमला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ।
4. कब: यह हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ।
5. क्यों: दानिश कनेरिया का कहना है कि अगर इस हमले में पाकिस्तान का हाथ नहीं है, तो उन्हें इसकी निंदा करनी चाहिए।
6. कैसे: उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ और न्यायपालिका इस बात पर जोर देते हैं कि हमलावर ‘उत्पीड़ित अल्पसंख्यक’ हैं, जबकि पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए।

 

कब तक रहेगी चुप्पी?

दानिश कनेरिया ने अपने ट्वीट में कहा, “पहलगाम में एक और क्रूर हमला। बांग्लादेश से लेकर बंगाल और कश्मीर तक, एक ही मानसिकता हिंदुओं को निशाना बनाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान इस आतंकवादी हमले में शामिल नहीं है, तो शहबाज शरीफ की निंदा क्यों मौन है। यह सवाल केवल कनेरिया का नहीं, बल्कि पूरे विश्व का है।

कनेरिया ने अपने करियर में हिंदू होने के कारण भेदभाव का सामना किया है। उन्होंने इस पर खुलकर बात की है और अपने ट्वीट के माध्यम से यह दिखाया है कि वह इस मुद्दे पर कितने गंभीर हैं। उनकी बातें इस बात को दर्शाती हैं कि पाकिस्तान की सरकार इस मुद्दे पर क्यों चुप है और क्यों वह अपने नागरिकों को सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रही है।

 

आतंकवाद का इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में से आतंकवाद का संबंध सामने आया है। यह एक पुराना मुद्दा है, जो वर्षों से जारी है। अनेक बार इस प्रकार के हमलों ने निर्दोष लोगों की जान ली है और भारत के साथ-साथ अन्य देशों के नागरिकों को भी इसका सामना करना पड़ा है। आतंकवाद का यह लंबा सफर अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है और यह उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब ऐसे हमले होते हैं।

पाकिस्तानी सरकार की जिम्मेदारी

पाकिस्तान सरकार की जिम्मेदारी केवल आतंकवादियों को रोकने तक नहीं है, बल्कि उन्हें यह भी सुनिश्चित करना है कि उन पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर है। ऐसे में, शहबाज शरीफ का मौन इस बात की ओर इशारा करता है कि उनके पास इस समस्या का समाधान नहीं है या वे इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

आत्म-निरीक्षण और पारदर्शिता की जरूरत है, ताकि पाकिस्तान के नागरिकों को सुरक्षा मिल सके और आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाए जा सकें। कनेरिया का सवाल यह बताता है कि उन लोगों के लिए भी जो पाकिस्तान में रह रहे हैं, आतंकवाद और उसके समर्थन के खिलाफ खड़े होना कितना जरूरी है।

 

आगे का रास्ता

श्री कनेरिया के ट्वीट ने न केवल पाकिस्तान की राजनीति को बल्कि समस्त विश्व को यह सोचने पर मजबूर किया है कि आतंकवाद का समापन केवल यही नहीं है कि हम इससे इनकार करें। हमें इसे समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और विश्व समुदाय का एकजुट होना बहुत जरूरी है।

उदाहरण के लिए, भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए यह आवश्यक है कि वे आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करें, और इसके लिए एक ठोस रणनीति तैयार करें। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आतंकवादियों को हर स्तर पर सख्त सजा मिले और उन्हें सर्मथन देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

समाज में जागरूकता फैलाना

आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। समाज को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आतंकवाद केवल एक राजनीतिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मानवता के खिलाफ एक अपराध है। समाज में जागरूकता फैलाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक आयोजनों का उपयोग किया जा सकता है। इस तरह की गतिविधियों से बच्चों और युवा पीढ़ी में जागरूकता पैदा हो सकती है और वे इस मुद्दे पर सोचने पर मजबूर हो सकते हैं।

अगर आप इस मुद्दे पर और जानकारी चाहते हैं तो आप हमारे अन्य लेख पढ़ सकते हैं: आतंकवाद पर जागरूकता और राजनीतिक जिम्मेदारी। इसके साथ ही, आप अधिक जानकारी के लिए BBC और Reuters की वेबसाइट भी देख सकते हैं।

इस प्रकार, यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ें और शांति और सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक वातावरण बनाएं।

 

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