वॉशिंगटन में भारतवंशी सांसदों का रुख: ट्रंप के टैरिफ को बताया आत्मघाती और गैर-जिम्मेदाराना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 60 देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने के फैसले की व्यापक आलोचना हो रही है। ट्रंप ने खासकर भारत पर 26 प्रतिशत का टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस फैसले के पीछे यह तर्क दिया गया है कि भारत अमेरिका पर 52 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, इसलिए अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर यह कदम उठाया है। भारतवंशी सांसदों ने इस निर्णय को न केवल आत्मघाती, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी ख़तरा बताया है।
कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे: ट्रंप का टैरिफ निर्णय
कौन?— यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उठाया गया है, जिनके प्रशासन में भारतीय समुदाय के सांसदों ने बढ़ती चिंता जाहिर की है।
क्या?— ट्रंप ने भारत पर 26 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
कहाँ?— यह निर्णय वॉशिंगटन में लिया गया है और इससे भारत एवं अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध प्रभावित होंगे।
कब?— यह घोषणा बुधवार को की गई थी, जब ट्रंप ने अपने निर्णय का खुलासा किया।
क्यों?— ट्रंप का तर्क है कि भारत अमेरिका पर अधिक टैरिफ लगाता है, इसलिए जवाबी कार्रवाई जरूरी थी।
कैसे?— इस टैरिफ के लागू होने से अमेरिका की कई वस्तुओं की लागत बढ़ जाएगी, जिससे अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा।
भारतवंशी सांसदों की आपत्ति
भारतवंशी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह टैरिफ न केवल आर्थिक दबाव बढ़ाएगा बल्कि अमेरिका को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग भी कर देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे अमेरिका के सहयोगी देशों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और इसके विरोधियों को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा, “अमेरिकी कामकाजी परिवारों पर इस टैरिफ का बोझ पड़ेगा, क्योंकि यह ट्रंप की अमीरों पर कर कटौती की नीति का एक हिस्सा है।”
एक अन्य सांसद रो खन्ना ने कहा कि ट्रंप की यह निर्णय बिना किसी स्पष्ट रणनीति के लिया गया है और इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा होगा।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
डॉ. एमी बेरा, एक और भारतीय-अमेरिकी सांसद, ने टैरिफ के संभावित प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि यह अमेरिकी उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत लाएगा। उन्होंने कहा, “ये टैरिफ अमेरिका को फिर से अमीर नहीं बनाएंगे, बल्कि यह कर वृद्धि के समान हैं।”
इसके अलावा, अजय भुतोरिया, जो पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के सलाहकार रह चुके हैं, ने बताया कि टैरिफ का असर भारतीय वस्तुओं, जैसे कपड़े और फार्मास्यूटिकल्स पर पड़ेगा। इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को सालाना 2,500 से लेकर 15,000 डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
क्या हो सकता है आगे?
ट्रंप के इन टैरिफ निर्णयों के संभावित परिणामों के बारे में चिंता जताते हुए भारतवंशी सांसदों ने दोनों देशों के नेताओं से अपील की है कि वे बातचीत के माध्यम से इस स्थिति का समाधान निकालें।
एक नई दिशा की खोज
अंततः, यह स्पष्ट है कि ट्रंप का यह टैरिफ फैसला न केवल अमेरिका-भारत रिश्तों पर प्रभाव डालेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में भी नया मोड़ लाएगा। भारतवंशी सांसदों का कहना है कि अब समय है कि दोनों देशों के नेता आपसी संवाद की दिशा में कदम बढ़ाएं, ताकि अमेरिका-भारत संबंधों को बेहतर बनाया जा सके और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित किया जा सके।
इस प्रकार, भले ही ट्रंप का यह कदम अमेरिका के व्यापारिक हितों का पालन करने के लिए उठाया गया हो, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम गंभीर हो सकते हैं। सभी को यह समझना होगा कि अर्थव्यवस्था में एक लहर का प्रभाव कई स्तरों पर पड़ता है, और इसका लाभ उठाने के लिए एक सतर्क और संगठित दृष्टिकोण आवश्यक है।
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