अचानक लगी आग ने पूरे अस्पताल परिसर को किया प्रभावित
झांसी के जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में शनिवार शाम को अचानक आग लग गई। यह घटना उस समय हुई जब वार्ड में 16 मासूम बच्चे भर्ती थे। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह घटना शाम करीब साढ़े चार बजे हुई, जब खुले तारों के संपर्क में आने से चिंगारियां निकलीं। देखते ही देखते आग ने बड़ी तेजी से फैलना शुरू कर दिया, जिसके कारण वहां मौजूद लोग घबरा गए और चीख-पुकार मच गई। इस समय के दौरान, अस्पताल प्रशासन ने तुरंत बिजली की आपूर्ति बंद कर दी और दमकल की गाड़ियां भी मौके पर बुला लीं।
आग के फैलने की सूचना मिलने पर झांसी पुलिस के एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह व अन्य पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग की तीन गाड़ियों ने आग पर काबू पाने के लिए तुरंत कार्रवाई की। आधे घंटे की मेहनत के बाद, आग पर नियंत्रण पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति को कोई चोट नहीं आई। स्थानीय पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद यह भी पुष्टि की कि आग वार्ड की छत पर लगी थी और नीचे के वार्ड पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
पिछली घटनाओं की याद दिलाई
हालांकि, यह घटना झांसी में अस्पतालों में होने वाली आग की घटनाओं की केवल एक और कड़ी है। कुछ महीने पहले ही, झांसी के मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में आग लगने से करीब 18 बच्चों की जान चली गई थी। यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन के लिए बल्कि पूरे शहर के लिए एक बड़ा सदमा थी। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी घटनाएं हृदयविदारक होती हैं और इसके लिए अस्पतालों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। इसके बाद रेलवे अस्पताल के ओटी में भी आग लगने की घटना सामने आई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अस्पतालों में सुरक्षा की कमी है।
ज्ञात हो कि हालांकि बच्चा वार्ड में इस समय भर्ती सभी 16 बच्चे सुरक्षित हैं, लेकिन आस-पास के अस्पतालों में एक बार फिर से सुरक्षा का मुद्दा उठने लगा है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई
झांसी के एसपी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत अपने अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेजा। दमकल की गाड़ियां भी तत्परता से मौके पर पहुंच गईं। उनकी टीम ने फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर आग पर काबू पाया। उन्होंने कहा, “हमने तुरंत सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और वार्ड की जांच की।” इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने एक बार फिर से सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
समुदाय की सुरक्षा का ध्यान
इसके साथ ही, स्थानीय समुदाय ने भी इस पर चिंता जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल बच्चों के जीवन के लिए खतरा बनती हैं, बल्कि परिवारों के लिए भी आतंक का कारण बनती हैं। इसलिए आवश्यक है कि अस्पतालों में सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए और नियमित रूप से फायर सेफ्टी ड्रिल्स का आयोजन किया जाए।
इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा। इसके अलावा, जनता को भी जागरूक रहना चाहिए और किसी भी अनहोनी से पहले उचित संसाधनों की मांग करनी चाहिए। झांसी के जिला अस्पताल की इस घटना ने हर किसी को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम सच में सुरक्षित हैं?
अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जनता का मानना है कि अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां हैं। शार्ट सर्किट से लगी हुई आग ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अस्पतालों में बचाव कार्य के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अग्निशामक उपकरणों और सिस्टम का नियमित परीक्षण और रखरखाव आवश्यक है।
यदि आप इस घटना के विषय में और जानना चाहते हैं, तो[अमर उजाला](https://www.amarujala.com/) और[हिंदुस्तान टाइम्स](https://www.hindustantimes.com/) की वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।
अमर उजाला और हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, इस घटना ने फिर से अस्पताल प्रशासन के लिए सुरक्षा की चुनौती प्रस्तुत की है। इस प्रकार की घटनाएं केवल एक घटना नहीं हैं, बल्कि हमें यह बताती हैं कि हमें और अधिक सतर्क रहना होगा।
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