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Thursday, January 22, 2026

आलोक जोशी: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का नया चेहरा, पेगासस जांच में भी थे शामिल

इंडियाआलोक जोशी: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का नया चेहरा, पेगासस जांच में भी थे शामिल

केंद्र सरकार ने पुनर्गठन के तहत आलोक जोशी को सौंपी एनएसएबी की कमान

केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबी) का नया गठन किया है। इस बडे़ फेरबदल में, पूर्व आईपीएस अधिकारी और रॉ के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। आलोक जोशी ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिसके चलते उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का भार सौंपा गया है। इस नए गठन का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को समग्र रूप से देखना और उनमें सुधार लाना है।

कौन हैं आलोक जोशी और उनका कार्यकाल

आलोक जोशी का जन्म हरियाणा में हुआ था और वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1976 बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हरियाणा के विभिन्न जिलों में एसपी के रूप में की थी। 2012 में, उन्हें रॉ का प्रमुख बनाया गया, जहां उन्होंने पाकिस्तान और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों पर काम किया।

आलोक जोशी को 2014 में ‘नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ (एनटीआरओ) का चेयरमैन बनाया गया था, जिसमें उन्होंने 2018 तक अपनी सेवाएँ दीं। ऐसे में, उनकी अनुभव और विशेषज्ञता को देखते हुए, केंद्र सरकार ने उन्हें एनएसएबी का अध्यक्ष बनाया है।

नए बोर्ड का गठन और इसके सदस्य

केंद्र सरकार द्वारा घोषित नये एनएसएबी में आलोक जोशी के अलावा अन्य वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इनमें पूर्व एयर मार्शल पीएम सिन्हा, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह, और पूर्व रियर एडमिरल मोंटी खन्ना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्व आईपीएस राजीव रंजन वर्मा और पूर्व आईएफएस बी वेंकटेश वर्मा को भी इस बोर्ड में जगह दी गई है।

बोर्ड का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ देश के सामरिक मुद्दों पर विचार करना है। सरकार इस बोर्ड की सहायता से सुरक्षा नीतियों और कार्यक्रमों को बेहतर बनाने की योजना बना रही है।

आलोक जोशी का पेगासस जांच में योगदान

आलोक जोशी की विशेषज्ञता को देखते हुए, उन्हें 2021 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पेगासस जांच कमेटी में भी शामिल किया गया था। इस जांच कमेटी की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस आरवी रवींद्रन कर रहे थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि यह आवश्यक है कि देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक स्पाइवेयर का उपयोग किया जाए, लेकिन इसके व्यक्तिगत दुरुपयोग की जांच की जाएगी। यह दर्शाता है कि आलोक जोशी की भूमिका न केवल सुरक्षा मामलों में बल्कि तकनीकी मुद्दों में भी महत्वपूर्ण रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में इस बोर्ड का महत्व

केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए इस राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का उद्देश्य सुरक्षा नीतियों और पहलुओं पर व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करना है। वर्तमान में, जब देश को कई आंतरिक और बाहरी खतरे हैं, ऐसे में इस बोर्ड का गठन एक समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से, पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता के संदर्भ में, यह बोर्ड अपनी सलाह और सुझावों से सरकार को उचित निर्णय लेने में मदद कर सकता है।

आगामी चुनौतियाँ और संभावनाएँ

हालांकि आलोक जोशी और उनके साथियों के पास व्यापक अनुभव है, लेकिन उन्हें कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ेगा। सुरक्षा के बढ़ते मामलों के साथ-साथ तकनीकी खतरों को ध्यान में रखते हुए, इस बोर्ड को प्रभावी और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।

आलोक जोशी का चयन इस बात का प्रमाण है कि सरकार सुरक्षा मामलों में गंभीर है, और वह ऐसे व्यक्तियों को प्रमुख पदों पर नियुक्त कर रही है जो अपने क्षेत्र में दक्षता रखते हैं।

अंतिम विचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। केंद्रीय सरकार का यह निर्णय न केवल आलोक जोशी पर विश्वास को दर्शाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिक संजीदगी से कार्य करना चाहती है।

आलोक जोशी के नेतृत्व में, उम्मीद की जा रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होगा। इसके अलावा, अलोक जोशी जैसे अनुभवी अधिकारियों को चुनने से संकेत मिलता है कि भविष्य में भारत की सुरक्षा को लेकर एक नया दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

आप इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ और ‘इंडिया टुडे’ की वेबसाइटों पर भी जा सकते हैं:[हिंदुस्तान टाइम्स](https://www.hindustantimes.com) और[इंडिया टुडे](https://www.indiatoday.in)।

आशा है कि इस नए संगठन के गठन से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में सुधार होगा और यह एक सुरक्षित और स्थिर राष्ट्र की दिशा में एक कदम होगा।

 

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