नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर से कांग्रेस पर दलित विरोधी राजनीति करने के आरोप लगाए हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की कुर्सी अन्य नेताओं के मुकाबले अलग रखी गई, जिससे भाजपा ने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।
कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?
मुख्य आरोप भाजपा के नेता अमित मालवीय द्वारा लगाया गया, जिन्होंने इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर साझा करते हुए लिखा, ‘पहले खरगे जी का सम्मान करना सीखो। वह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनकी कुर्सी किनारे पर लगाने का क्या मतलब था? यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस दलित विरोधी है।’ इस वीडियो में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को एक सोफे पर बैठे दिखाया गया जबकि खरगे को अलग कुर्सी पर बैठाया गया। यह घटना अमहदाबाद में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की है, जो कि हाल ही में आयोजित की गई थी।
इस घटना ने भाजपा को एक बार फिर से कांग्रेस पर तंज कसने का एक मौका प्रदान किया है। राहुल गांधी, जो अक्सर भाजपा पर दलितों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाते हैं, ने इस मामले में अमित मालवीय का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा की “दलित विरोधी और मनुवादी सोच” का यह साफ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार दलितों को अपमानित कर रही है और संविधान पर हमले कर रही है।
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भाजपा का पलटवार:
भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस के इस आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि पहले कांग्रेस को अपने अंदर की समस्याओं को सुलझाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इस घटना से यह साफ है कि कांग्रेस अपने ही दलित नेताओं का सम्मान नहीं करती है।
इस विवाद की जड़ें और भी गहरी हैं क्योंकि यह सिर्फ एक कुर्सी का मामला नहीं है। कांग्रेस और भाजपा के बीच का यह तनाव उस राजनीतिक वातावरण का एक हिस्सा है जिसमें दलित समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए दोनों दलों के बीच संघर्ष जारी है।
राजस्थान और चुनावी राजनीति:
इस मामले में राजस्थान का भी उल्लेख किया गया है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक वीडियो साझा किया जिसमें दलित नेता टीका राम जूली का उल्लेख किया गया। उन्होंने रामनवमी के दिन राम मंदिर में दर्शन दिया, जिसके बाद भाजपा के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने विवादित बयान दिया था कि “अपवित्र दलितों को मंदिर में नहीं आने दिया जाना चाहिए।”
कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का खुलासा करता है। उन्होंने यह भी कहा, “यह पहला मामला नहीं है, भाजपा और संघ के लोग लगातार दलितों का अपमान करते रहे हैं।”
क्या है कांग्रेस का बयान?
कांग्रेस ने अपने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा है कि ज्ञानदेव आहूजा का बयान और जो हुआ वह भाजपा की असली मानसिकता का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के करीबी होने के नाते आहूजा इस तरह के बयान देने में कोई हिचकिचाहट नहीं महसूस करते हैं।
राहुल गांधी का यह भी कहना है कि “भारत का संविधान ही हमारा मार्गदर्शक होना चाहिए, न कि मनुस्मृति।” उन्होंने भाजपा को चेताते हुए कहा कि यदि वे संविधान का अनादर करेंगे तो देश को संविधान और उसके आदर्शों के साथ चलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य:
यह विवाद केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच की खाई को और गहरा करेगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आगामी चुनावों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है। दलित समुदाय एक महत्वपूर्ण मतदाता आधार हैं और इस प्रकार दोनों दलों को इस समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
इस प्रकार, यह मामला न केवल राजनीतिक तनाव का पर्याय है, बल्कि यह सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को भी उजागर करता है।
आगे क्या होगा?
भाजपा और कांग्रेस के बीच यह टकराव संभावित रूप से आगामी चुनावों में दोनों दलों की रणनीति को प्रभावित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक कुर्सी का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के एक बड़े वर्ग की आवाज को दबाने का प्रयास है।
अगले कुछ हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस कैसे इस विवाद का प्रबंधन करती है और भाजपा इस पर किस तरह का राजनीतिक माहौल बनाती है। दोनों दलों के चलते आगामी चुनावों में यह मुद्दा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।
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