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Wednesday, January 21, 2026

बिहार की राजनीति में खलबली: कन्हैया से प्रशांत किशोर के बीच का महासंग्राम

इंडियाबिहार की राजनीति में खलबली: कन्हैया से प्रशांत किशोर के बीच का महासंग्राम

बिहार में चुनावी सरगर्मियों का दौर: जानिए कौन क्या कर रहा है?

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार की चर्चा में सबसे आगे हैं कन्हैया कुमार और प्रशांत किशोर, जिन्होंने अपनी रणनीतियों से जनता का ध्यान आकर्षित किया है। कन्हैया कुमार, जो कांग्रेस के नेता हैं, एक यात्रा पर निकले हैं, वहीं प्रशांत किशोर अपनी नई राजनीतिक दिशा में सक्रिय हैं। इस राजनीतिक हलचल के बीच, नीतीश कुमार के बारे में भी नई-नई चर्चाएं उठ रही हैं। कभी उनके बयान सुर्खियों में रहते हैं तो कभी डिप्टी पीएम बनने की संभावनाएं।

इस राजनीतिक महासंग्राम में कौन हैं प्रमुख चेहरे?

बिहार की राजनीति में इस समय कई प्रमुख चेहरे हैं। तेजस्वी यादव, जिन्होंने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनका गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव के लिए है, अब विधानसभा चुनाव के लिए राजद, कांग्रेस और वाम दलों के एकजुट होने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। दूसरी ओर, नीतीश कुमार और भाजपा के गठबंधन पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर तब जब यह चर्चा सामने आ रही है कि भाजपा नीतीश कुमार की जगह अपने ही मुख्यमंत्री को लाने की योजना बना रही है।

बिहार में राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह का कहना है कि “राजनीति में रास्ता खुद चुनता है”। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी का उद्देश्य प्रधानमंत्री बनना है, जिसके लिए उन्हें बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल और महाराष्ट्र में मजबूती से जीत प्राप्त करनी होगी।

कांग्रेस का रुख: क्या कांग्रेस फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटेगी?

कांग्रेस के कुछ नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि “गठबंधन जहां होते हैं वो होते रहेंगे।” कांग्रेस की योजना बिहार और उत्तर प्रदेश में ओबीसी और दलित समुदायों का समर्थन हासिल करने की है। इस क्रम में, वे रविदासी समाज को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर का रणनीतिक महत्व

प्रशांत किशोर ने राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा त्रिपाठी के अनुसार, “प्रशांत किशोर राजनीति के एक अच्छे रणनीतिकार हैं, लेकिन राजनेता के रूप में उनकी पहचान अभी बननी बाकी है।” उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं।

बिहार की राजनीतिक स्थिति का आकलन

इस समय बिहार की राजनीति में कई समीकरण चल रहे हैं। तेजस्वी यादव, जो राजद के प्रमुख चेहरे हैं, को लेकर कहा जा रहा है कि उन्हें अपनी रणनीतियों को और मजबूत बनाना होगा। अन्य राज्यों में उनके समकक्ष नेता जैसे अखिलेश यादव की आलोचना किए बिना, कांग्रेस को बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने में कठिनाई हो सकती है।

कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में इस समय कई प्रमुख चुनौतियां और अवसर हैं। बिहार में अगले कुछ महीनों में राजनीतिक समीकरण बदलते रहेंगे, और यह देखने में रोचक होगा कि कौन सा दल या नेता जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है।

समाचार अपडेट

बिहार में क्या हो रहा है, इसके लिए[अमर उजाला](https://www.amarujala.com) पर जुड़े रहें। साथ ही जानें[कॉंग्रेस के भविष्य](https://www.india.com) के बारे में।

यह सभी घटनाक्रम दर्शाते हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीति का खेल नया मोड़ ले सकता है। हालात को समझना और सही रणनीति अपनाना सभी पार्टियों के लिए अनिवार्य होगा।

 

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