अभिनेत्री साहिबा बाली का एनसीईआरटी की किताबों में बदलावों पर नाराजगी जताना
हाल ही में, भारतीय अभिनेत्री साहिबा बाली ने एनसीईआरटी द्वारा कक्षा सात की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में किए गए बदलावों पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुगलों और अन्य मध्यकालीन भारतीय शासकों को हटाना न केवल गलत है, बल्कि यह भारतीय इतिहास के प्रति एक गलत दृष्टिकोण को जन्म दे सकता है। साहिबा ने इस विषय पर अपनी भड़ास सोशल मीडिया पर व्यक्त की और कहा कि यह बात पूरी तरह से अजीब है क्योंकि भारतीय उपमहाद्वीप पर मुगलों का प्रभाव महत्वपूर्ण था।
क्या हुआ, कहाँ हुआ, कब हुआ, क्यों हुआ और कैसे हुआ?
साहिबा बाली ने अपनी बात को पुष्ट करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में मुगलों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा, “आप इतिहास कैसे हटा सकते हैं? शासकों का संपूर्ण प्रभाव और भारतीय उपमहाद्वीप पर इसका प्रभाव?” उन्होंने यह भी कहा कि यह बात खासकर उत्तरी सीमांत क्षेत्र की समझ के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
इस बदलाव का कारण यह बताया गया है कि एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम को अपडेट करने का निर्णय लिया है ताकि छात्रों को प्राचीन भारतीय राजवंशों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक परंपराओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके। हालांकि, साहिबा बाली का मानना है कि इस बदलाव से छात्रों को एक संकुचित दृष्टिकोण प्राप्त होगा, जो कि भारतीय संस्कृति और इतिहास को संपूर्णता में समझने में बाधा डालेगा।
साहित्य में बदलाव की आवश्यकता
साहिबा ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय इतिहास को शामिल करना, धार्मिक पहलुओं को पढ़ाना और भारतीय शासकों पर ध्यान केंद्रित करना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह जरूरी है कि मुगलों और अन्य महान शासकों के योगदान को न केवल नजरअंदाज किया जाए, बल्कि इसे सिखाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “इसका प्रभाव भारतीय पहचान के लिए महत्वपूर्ण है। मुझे इस पर यकीन नहीं हो रहा है।”
एनसीईआरटी के बदलाव पर क्या कहा गया?
एनसीईआरटी ने 2025-26 सत्र के लिए किए गए इस पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलावों के पीछे का मकसद यह बताया है कि बच्चों को भारतीय संस्कृति और इतिहास से संबंधित नए दृष्टिकोण से परिचित कराना है। लेकिन यह बदलाव कुछ विद्वानों और लोगों के बीच विवाद का कारण बन गया है।
साहिबा बाली पहली अभिनेत्री नहीं हैं, जिन्होंने इस पर प्रतिक्रिया दी है। कई शिक्षाविदों और इतिहासकारों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंताओं का इजहार किया है। वे मानते हैं कि इस प्रकार के बदलावों से छात्र भारतीय इतिहास को लेकर एक एकतरफा दृष्टिकोण विकसित कर सकते हैं।
साहिबा बाली की अभिनय यात्रा
साहिबा बाली ने हाल ही में इम्तियाज अली की फिल्म ‘चमकीला’ में काम किया, जो 2024 में रिलीज होने वाली है। उन्होंने इस फिल्म में अपने काम के लिए काफी प्रशंसा प्राप्त की है। साहिबा ने इस फिल्म में अपनी अभिनय प्रतिभा को साबित किया है, जो उन्हें एक उभरती हुई अभिनेत्री के रूप में स्थापित करने में मदद कर रही है।
अभिनेत्री का वीडियो साझा करना
साहिबा ने अपने इंस्टाग्राम पर इस विषय पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने विचारों को स्पष्ट किया। वीडियो में उनका समर्थन करने वाले अनेक प्रशंसक भी दिखाई दिए। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं भारतीय हूं और हमें अपने इतिहास की पूरी जानकारी होनी चाहिए।”
समाज में बढ़ती जागरूकता
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि इतिहास में बदलावों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। इसे लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में संवाद प्रारंभ हो चुका है। कई लोग इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं, जिसे बहस के माध्यम से और स्पष्ट किया जा सकता है। ऐसे में, साहिबा बाली का बयान एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इस तरह के बदलावों से इतिहास के प्रति छात्रों की समझ में कमी आएगी, या फिर समाज को अपने इतिहास को पुनः समझने का एक नया दृष्टिकोण प्राप्त होगा? यह सवाल स्थिति के विकास के साथ-साथ महत्वपूर्ण रहेंगे।
साहिबा बाली की भविष्यवाणी
साहिबा ने भविष्यवाणी की कि यदि इसी तरह के बदलाव चलते रहे तो भारतीय संस्कृति और इतिहास की असली पहचान खो जाएगी। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाएं और एक जागरूक समाज का निर्माण करें।
साहिबा का यह बयान निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है, और यह दर्शाता है कि कैसे हमारे इतिहास को समझना और उसकी उचित शिक्षा आवश्यक है।
इस तरह के मुद्दे हमें यह याद दिलाते हैं कि इतिहास केवल अतीत नहीं है, बल्कि यह हमारे वर्तमान और भविष्य को भी प्रभावित करता है।
साहिबा बाली का यह बयान शिक्षा प्रणाली में हो रहे परिवर्तनों पर बहस को बढ़ावा देने में योगदान दे सकता है। यह समय है कि हम सभी मिलकर अपनी आवाज उठाएं और अपने इतिहास को न केवल समझें, बल्कि उसे संजोकर रख सकें।
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