सीएम नीतीश का मोबाइल बैन पर बयान: सदन की गरिमा बनाए रखें
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को बिहार विधान सभा में एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने सदन के अंदर मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचता है। यह घटना उस समय हुई जब राजद विधायक सुदय यादव मोबाइल पर सवाल पढ़ते हुए देखे गए। सीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर यही हालात जारी रहे, तो सदन की कार्यवाही प्रभावित होगी।
कौन, क्या, कहां, कब, क्यों और कैसे?
इस घटना में बिहार विधान सभा के सदन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन की कार्यवाही के दौरान मोबाइल फोन के उपयोग पर सवाल उठाया। यह घटना 20 मार्च 2025 को हुई, जब राजद के विधायक सुदय यादव ने मोबाइल पर देख कर सवाल पूछे। इससे नाराज होकर सीएम नीतीश ने सदन में वक्ता से कहा कि ऐसे हालात में अगर मोबाइल का प्रयोग जारी रहा, तो सदन की गरिमा को खतरा होगा। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर मोबाइल बैन किया जाना चाहिए ताकि कोई भी विधायक सदन की कार्यवाही में डिस्टर्ब न हो। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले भी हो चुका है और अगर इसे नहीं रोका गया, तो अपेक्षित परिणाम सामने आ सकते हैं।
नीतीश कुमार ने सदन के स्पीकर से यह भी कहा कि अगर कोई विधायक मोबाइल लेकर आता है, तो उसे तुरंत बाहर निकलवाना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि इससे पहले उन्होंने भी देखा था कि कैसे मोबाइल के चलते सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचा है।
राजद विधायक का प्रदर्शन और सरकार का जवाब
विधान सभा में इस घटना से पहले, राजद के विधायकों ने पीडीएस दुकानदारों के मानदेय को बढ़ाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने अपने अधिकारों के लिए नारेबाजी की और सरकार से मांग की कि पीडीएस दुकानदारों का मानदेय 25,000 रुपये किया जाए। यह प्रदर्शन विधानसभा के बाहर पोर्टिको में हुआ और सभी विधायकों ने एकजुट होकर यह मांग उठाई।
इस संदर्भ में, मद्य निषेध मंत्री रत्नेश सदा ने पूर्व मंत्री कुमार सर्वजीत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें शराब के कारोबार में लिप्त होने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा और इस मामले में पूरी जांच की जाएगी।
बजट सत्र में महत्वपूर्ण दिन
बिहार विधानसभा का बजट सत्र अब अपने 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां स्वास्थ्य, कृषि, समाज कल्याण, आपदा प्रबंधन समेत पांच विभागों के बजट को पारित किया जाना है। इन विभागों के प्रभारी मंत्रियों से उम्मीद की जा रही है कि वे सदन में अपने विभागों का बजट पेश करें। यह बजट पारित होने से पहले सदन में विस्तृत चर्चा की जाएगी।
सीएम नीतीश कुमार ने इस संदर्भ में कहा कि सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह गंगा किनारे के जिलों में बढ़ते आर्सेनिक स्तर को नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाए। सरकार की प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि किसानों और आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
अंतिम विचार
बिहार विधानसभा में मोबाइल बैन की मांग और विधायकों के प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक गतिविधियों में पारदर्शिता और सदन की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। सीएम नीतीश कुमार का यह बयान और राजद विधायकों का प्रदर्शन दोनों ही बिहार की राजनीति में उठते सवालों और चुनौतियों को दर्शाते हैं। जैसे-जैसे बजट सत्र आगे बढ़ रहा है, सभी निगाहें इस पर होंगी कि सरकार कैसे इन मुद्दों का सामना करती है और क्या वे अपने वादों पर खरे उतर पाएंगे।
आप इस विषय पर और अधिक जानकारी के लिए[अमर उजाला](https://www.amarujala.com/bihar) और[दैनिक भास्कर](https://www.bhaskar.com/) पर जा सकते हैं।
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