अमित शाह की समीक्षा बैठक में मणिपुर की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1 मार्च 2025 को मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए गृह मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मणिपुर सरकार, और सेना तथा अर्धसैनिक बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मणिपुर में 13 फरवरी को मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, और यह बैठक राज्य की संवेदनशील स्थिति को लेकर चिंताओं की पृष्ठभूमि में हुई है।
मणिपुर में पिछले साल मई से शुरू हुई जातीय हिंसा ने स्थिति को गंभीर बना दिया है, जिसमें अब तक 250 लोगों की जान जा चुकी है। गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में निर्देश दिए कि 8 मार्च 2025 से मणिपुर में सभी मार्गों पर आम जनता की सुलभ आवाजाही को सुनिश्चित किया जाए और किसी भी तरह की बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं
बैठक में अधिक चर्चा की गई कि कैसे मणिपुर की स्थिति को सामान्य किया जा सके। सुरक्षा बलों और सरकार के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत सी चुनौतियां बची हैं। गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, “हम एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना चाहते हैं, ताकि लोग बिना किसी डर के अपनी आवाजाही कर सकें।”
सुरक्षा बलों द्वारा किए गए प्रयासों को भी सराहा गया, जिसमें अवैध और लूटे गए हथियारों को जमा कराने के लिए अवैध हथियारों को सौंपने की समय सीमा को बढ़ाया गया है। राज्यपाल भल्ला ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध हथियारों को तुरंत सौंप दें।
कांग्रेस ने उठाई सरकार की अक्षमता की बात
कांग्रेस पार्टी ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम राज्य की भाजपा सरकार की अक्षमता के कारण उठाया गया है। मणिपुर कांग्रेस के उपाध्यक्ष हरेश्वर गोस्वामी ने संवाददाताओं से कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब भाजपा को विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त है, तब भी राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।”
ऐसे समय में जब राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है, कांग्रेस ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार की मिली-जुली विफलता के कारण मणिपुर की जनता को इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
हाल ही में मणिपुर के कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में सुरक्षा बलों ने एक उग्रवादी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, कांगपोकपी के बिंपाराव से चार लोग प्रतिबंधित ‘कुकी नेशनल फ्रंट (पी)’ के अधीन काम कर रहे थे। इसके अलावा, कामजोंग के कुल्तुह गांव में एक सक्रिय काडर को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से एक पिस्तौल और ग्रेनेड बरामद किया गया है।
यह सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करना है।
अधिकारियों ने बताया कि जनता को सुरक्षा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और सरकार किसी भी कीमत पर स्थिति को सामान्य करना चाहती है।
मणिपुर में आम लोगों की आवाजाही को लेकर सरकार की रणनीति
अमित शाह की बैठक के परिणामस्वरूप, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि 8 मार्च 2025 से सभी मार्गों पर आम लोगों की आवाजाही को सुनिश्चित किया जाएगा। इस दिशा में सरकार ने सुनिश्चित किया है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी हर स्थान पर रहेगी, ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को रोका जा सके।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि मणिपुर में स्थिति बेहतर हो सके और वहां के लोग बिना किसी डर के अपनी जिंदगी जी सकें।
अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह से सक्षम है और हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
जाने मणिपुर की घटना के पीछे की वास्तविकता:[मणिपुर में जातीय हिंसा के भयानक परिणाम](https://www.bbc.com/hindi/india-65000000)
हालांकि, यह स्थिति अब भी बहुत संवेदनशील बनी हुई है और सरकार की प्राथमिकता है कि यहां से सभी प्रकार की हिंसा को समाप्त किया जाए। ऐसे में मणिपुर की आवाजाही को सुरक्षित बनाना और लोगों को एक सामान्य जीवन जीने में सहायता करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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