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Wednesday, January 21, 2026

ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थकों का बढ़ता प्रभाव: भारत के विदेश मंत्री पर हुई हमले की कोशिश

राजनीतिब्रिटेन में खालिस्तान समर्थकों का बढ़ता प्रभाव: भारत के विदेश मंत्री पर हुई हमले की कोशिश

लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने किया हमला: भारत का चिंताजनक हालात

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के काफिले पर खालिस्तान समर्थकों द्वारा हमले की कोशिश ने एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे अलगाववादी आंदोलन की गहराई को उजागर किया है। यह घटना 7 मार्च 2025 को तब हुई जब जयशंकर एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चैथम हाउस पहुंचे थे। खालिस्तान समर्थक एकत्र होकर उनके काफिले का सामना करने लगे और उपद्रवियों के एक समूह ने न केवल जयशंकर की कार को रोकने की कोशिश की, बल्कि सुरक्षा घेरे को भी तोड़ दिया।

क्या है इस आंदोलन की पृष्ठभूमि?

खालिस्तान आंदोलन का इतिहास भारत के पंजाब प्रांत से शुरू हुआ था, जहां सिख अलगाववादियों ने अपने लिए एक अलग राज्य की मांग की थी। यह आंदोलन 1980 के दशक में अपने चरम पर था, जब कई आतंकवादी गतिविधियाँ और संघर्ष देखने को मिले। समय के साथ, यह आंदोलन न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी फैल गया, विशेष रूप से ब्रिटेन, जहां बड़ी संख्या में सिख प्रवासी रहते हैं।

यह आंदोलन किस तरह से ब्रिटेन तक पहुंचा, इस पर कई शोध और विश्लेषण होने चाहिए। इसका मुख्य कारण यह है कि ब्रिटेन में सिख समुदाय की एक बड़ी आबादी है, जो अपने धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए प्रयासरत है। लेकिन इस पहचान के नाम पर खालिस्तान आंदोलन ने किस प्रकार से एक अलगाववादी एजेंडे को जन्म दिया, यह विचारणीय है।

क्यों बढ़ी है चिंता?

इस घटना के बाद, भारतीय सरकार ने ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारतीय संसद के सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया है और इसे खालिस्तानी गुंडों का हमला करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी ब्रिटेन सरकार से इस विषय में ठोस कदम उठाने की अपील की है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खालिस्तान समर्थकों के बढ़ते प्रभाव ने भारत के लिए नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। इस समय, भारत को यह समझने की आवश्यकता है कि यह अलगाववादी विचारधारा भारत की अखंडता और सुरक्षा को कमजोर करने का प्रयास करती है।

कैसे मिली शह?

खालिस्तान समर्थकों को मिले समर्थन के पीछे कई कारण मौजूद हैं। एक तो यह कि ब्रिटेन में कुछ तत्व ऐसे हैं जो इस आंदोलन के लिए वित्तीय मदद और राजनीतिक समर्थन जुटा रहे हैं। इसके अलावा, कुछ राजनीतिक दल भी इस आंदोलन को बढ़ाने में सहायक बन रहे हैं।

हाल ही में, लंदन में हुए एक कार्यक्रम के दौरान, खालिस्तान के समर्थन में कई आवाजें सुनाई दीं, जिसमें एकत्र हुए सिखों ने न केवल भारत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, बल्कि खालिस्तान का भी समर्थन किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह आंदोलन अब केवल एक विचारधारा न होकर एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जो भारतीय प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

स्कॉटलैंड यार्ड की भूमिका

ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थकों की हरकतों से संबंधित मामले में स्कॉटलैंड यार्ड की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में, भारतीय अधिकारियों ने स्कॉटलैंड यार्ड से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि खालिस्तान समर्थक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए।

इस संबंध में, भारतीय अधिकारियों ने ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थक समूहों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए कदम उठाने के लिए कहा है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने ब्रिटेन से यह मांग की है कि वह खालिस्तान के समर्थन में सक्रियता दिखाने वाले तत्वों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे।

खालिस्तान समर्थकों की हरकतों का भारत पर असर

इन गतिविधियों का भारत पर स्थायी असर पड़ सकता है। यदि ब्रिटेन में खालिस्तान आंदोलन और इसकी गतिविधियाँ इसी तरह जारी रहीं, तो इसका परिणाम भारत-यूके संबंधों पर भी नकारात्मक रूप से पड़ेगा। भारतीय समुदाय की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं और वे भारत सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपेक्षा कर रहे हैं।

क्या हैं भविष्य की संभावनाएँ?

भविष्य में, यदि खालिस्तान समर्थक अपनी गतिविधियों को जारी रखते हैं, तो यह भारत और ब्रिटेन के बीच तनाव बढ़ा सकता है। भारत, जो कि एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है, के लिए यह आवश्यक है कि वह सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाए और खालिस्तान समर्थकों द्वारा उत्पन्न खतरे का मुकाबला करने के लिए ठोस कदम उठाए।

उपस्थिति में बढ़ती चिंताएँ

आखिरकार, इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खालिस्तान आंदोलन केवल भारत का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी एक चिंता का विषय है। भारत को इस आंदोलन के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

 

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