पटना में औरंगजेब पर सीएम नीतीश और ओवैसी के नेताओं के विवादास्पद बयान
बिहार विधान मंडल में बजट सत्र के चौथे दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के विधायक खालिद अनवर और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के विधायक अख्तरूल ईमान ने मुग़ल सम्राट औरंगजेब को एक बेहतर शासक घोषित कर दिया। इस बयान ने बिहार में सियासी हलचल मचा दी है। इन नेताओं के बयानों के बाद बिहार भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
बिहार में औरंगजेब के लिए सीएम नीतीश की पार्टी ने क्या कहा?
बिहार विधान सभा में जदयू के विधान पार्षद खालिद अनवर ने कहा कि औरंगजेब वास्तव में एक अच्छे शासक थे। उनके अनुसार, इतिहासकारों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन उनका व्यक्तिगत मानना यह है कि वे एक समझदार और अच्छे शासक थे। उन्होंने यह भी कहा कि शासक अपने तरीके से शासन करते हैं और यह महत्वपूर्ण है कि हम इतिहास को समझें, न कि केवल उस पर विचार करें।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, बिहार भाजपा ने कहा है कि जदयू का यह बयान गलत है और यह इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने जैसा है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि इस तरह की बातें देश में अशांति को बढ़ावा दे रही हैं।
ओवैसी के विधायक ने औरंगजेब को सूफी शासक बताया
अख्तरूल ईमान ने कहा कि उनके अध्ययन के अनुसार औरंगजेब एक बेहतर शासक थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से देश में नकारात्मकता फैलाने का काम कर रही है। ईमान ने औरंगजेब को सूफी शासक बताया, जो भारत को एकजुट करने का कार्य कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना ठीक नहीं है और न्यायपालिका को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।
क्या था अबू आजमी का बयान?
इस बीच, महाराष्ट्र विधानसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी ने भी औरंगजेब की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि औरंगजेब ने कई मंदिर भी बनवाए और वह क्रूर नहीं थे। अबू आजमी के इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद उन्हें बजट सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया।
बिहार में सियासी प्रतिक्रियाएँ
बिहार में अब इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजियों की झड़ी लग गई है। जदयू और एआईएमआईएम के नेताओं ने अपने बयानों को सही ठहराने की कोशिश की है, जबकि भाजपा ने उन्हें कटघरे में खड़ा किया है। राजनीतिक विशेषज्ञ इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या इस तरह के बयान वास्तव में सियासी लाभ या हानि पहुंचाएंगे।
राजनीतिक माहौल में खींचतान
इस पूरे विवाद के बीच, बिहार में राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। जहाँ एक ओर जदयू और एआईएमआईएम के नेता औरंगजेब को एक बेहतर शासक मानते हैं, वहीं भाजपा उनके इस दृष्टिकोण पर तीखी प्रतिक्रिया दे रही है। जनता के बीच इस मुद्दे पर विभाजन भी साफ नजर आ रहा है।
निष्कर्ष
फिलहाल, यह विवाद बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ चुका है और देखना यह होगा कि आगामी दिनों में यह सियासी बयानबाजी किस दिशा में जाती है। इस मुद्दे पर उठ रहे सवाल समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, इससे पहले भी बिहार में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आ चुके हैं, जहां इतिहास पर राजनीतिक बातें की गई हैं, जो कि समाज में विभाजन का कारण बन सकती हैं।
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