9.1 C
Delhi
Thursday, January 22, 2026

सैम पित्रोदा के विवादास्पद बयान पर उठी सियासी हलचल: ‘चीन दुश्मन नहीं’ पर भाजपा का तीखा पलटवार

इंडियासैम पित्रोदा के विवादास्पद बयान पर उठी सियासी हलचल: 'चीन दुश्मन नहीं' पर भाजपा का तीखा पलटवार

नई दिल्ली: सैम पित्रोदा के बयान ने क्या है सियासी माहौल में तूफान खड़ा किया?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने हाल ही में एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि चीन भारत का दुश्मन नहीं है। इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पित्रोदा का यह बयान उस समय आया है, जब भारत-चीन के बीच की स्थिति पहले से ही तनावपूर्ण है। भाजपा ने पित्रोदा के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, और अब सियासी घमासान तेज हो गया है।

कौन हैं सैम पित्रोदा और उनकी टिप्पणियों का महत्व

सैम पित्रोदा, जो कि कांग्रेस पार्टी के विदेश इकाई के प्रमुख हैं, ने अपने बयान में कहा कि चीन के प्रति भारत की सोच को बदलने की जरूरत है। उनका कहना है कि भारत को चीन को दुश्मन मानना बंद कर देना चाहिए। यह बयान उस समय आया जब भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध जारी है। पित्रोदा का यह कहना कि “चीन से खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है,” निश्चित रूप से राजनीतिक पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है।

क्या वास्तव में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है खतरा?

पित्रोदा ने जोर दिया कि भारत के दृष्टिकोण में हमेशा टकराव की भावना रही है, जबकि अब सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित किया जाए और टकराव को समाप्त किया जाए। यह टिप्पणियां तब आईं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन से खतरे को नियंत्रित करने के प्रयास कर रहे थे।

भाजपा का पलटवार: कड़ी प्रतिक्रिया

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने सैम पित्रोदा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि यह पार्टी चीन के प्रति खास लगाव रखती है। उनके अनुसार, जिन लोगों ने 40,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय भूमि चीन को दे दी, उन्हें चीन से खतरा नहीं नजर आता। इस प्रकार के बयान सियासी माहौल में और भी गर्मी लाते हैं और कांग्रेस की नीतियों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं।

भाजपा ने राहुल गांधी के चीन के साथ संबंधों और कांग्रेस-चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के 2008 के समझौते का भी जिक्र किया। इसके अलावा, सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का समर्थन किया, जबकि भारत में चीन से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर चिंता व्यक्त की जा रही थी।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

सैम पित्रोदा का यह बयान केवल उनकी व्यक्तिगत सोच नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस पार्टी की स्थिति को भी दर्शाता है। इसे देखते हुए, यह स्पष्ट है कि कांग्रेस और भाजपा के बीच का यह विवाद केवल सियासी नहीं, बल्कि सामरिक भी है। कई विश्लेषक इसे भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में गंभीरता से ले रहे हैं और इसे दोनों देशों के बीच संभावित संवाद की दिशा में एक कदम मानते हैं।

भविष्य में क्या हो सकता है?

सिर्फ सैम पित्रोदा का बयान नहीं, बल्कि उनकी पार्टी के अन्य नेताओं के विचार भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। यह देखने योग्य होगा कि कांग्रेस इस मामले में अपनी स्थिति को कैसे स्पष्ट करती है। क्या वे सैम पित्रोदा के विचारों का समर्थन करेंगे या इसके विपरीत एक नई नीति बनाएंगे?

छोटी सी बात का बड़ा असर

राजनीति में भाषा और बयान महत्वपूर्ण होते हैं। सैम पित्रोदा का यह बयान राजनीतिक पंडितों के विश्लेषण पर विचार करने के लिए एक अवसर प्रदान करता है। इससे उन सवालों का भी सामना किया जाएगा जो भारत-चीन के संबंधों में जटिलता पैदा कर सकते हैं।

अंतिम विचार

सैम पित्रोदा के बयान ने निश्चित रूप से भारत की राजनीतिक भूगोल में हलचल पैदा की है। भाजपा का पलटवार और कांग्रेस की प्रतिक्रिया दोनों को ही देखना आवश्यक है। क्या यह विवाद सियासी मैदान में कोई नया मोड़ लाएगा या फिर केवल एक बिंदु पर रहेगा? यह तो भविष्य ही बताएगा।

 

अस्वीकृति
हमने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है कि इस लेख और हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दी गई जानकारी सटीक, प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त हो। यदि आपके पास कोई सुझाव या शिकायत हो, तो कृपया हमसे info@hamslive.com पर संपर्क करें।

 

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles