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Wednesday, January 21, 2026

आरबीआई मौद्रिक नीति में बदलाव: बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट से मिले संकेत, 25 बीपीएस कटौती की संभावना

अर्थव्यवस्थाआरबीआई मौद्रिक नीति में बदलाव: बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट से मिले संकेत, 25 बीपीएस कटौती की संभावना

आरबीआई की आगामी बैठक में रेपो रेट में कटौती का ऐलान संभव: जानें इसके पीछे के कारण

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 7 फरवरी को होनी है, जिसमें केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की कटौती की घोषणा कर सकता है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक हालिया रिपोर्ट में दी गई है। महंगाई में कमी और खासकर टमाटर, प्याज व आलू जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में राहत से यह संभावना जताई जा रही है।

कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?

कौन: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी)।
क्या: रेपो रेट में 25 बीपीएस की कटौती की संभावना।
कहाँ: नई दिल्ली।
कब: 7 फरवरी, 2025।
क्यों: महंगाई का दबाव कम होना और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट।
कैसे: बेहतर आपूर्ति के कारण।

रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई दर में नरमी के संकेत हैं, जिससे केंद्रीय बैंक को दरों में कटौती करने का मौका मिल सकता है। यह कदम विशेष रूप से तब उठाया जा रहा है जब वैश्विक और घरेलू आर्थिक डेटा मिलकर आरबीआई को एक लचीला दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।

महंगाई का दबाव कम होने का प्रभाव

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल में टमाटर, प्याज और आलू जैसी जरूरी सब्जियों की कीमतों में लगातार गिरावट आई है। इस गिरावट ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रकार, यह आरबीआई को ब्याज दरों में कटौती का अवसर प्रदान कर रहा है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिल सके।

पिछली कटौती से सीख लेना

आरबीआई ने आखिरी बार मई 2020 में रेपो रेट में कटौती की थी, जब इसे चार प्रतिशत तक घटा दिया गया था। इसके बाद से अब तक सात बार दरों में वृद्धि की गई है। मौजूदा रेपो रेट 6.5 प्रतिशत पर स्थिर है, लेकिन आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक बाजारों की स्थिति के कारण अब कटौती की संभावना बढ़ गई है।

वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और घरेलू विकास

रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक व्यापार में अस्थिरता बढ़ी हुई है, जिसका मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव हैं। विशेषकर अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको और चीन के बीच व्यापार नीतियों में बदलाव का असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। इसके साथ ही, घरेलू आर्थिक विकास भी असमान बना हुआ है, जिसमें प्रीमियम-मूल्य वाली वस्तुएं उपभोक्ति प्रवृत्तियों को प्रभावित कर रही हैं।

आरबीआई का संभावित दृष्टिकोण

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए, आरबीआई वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए बढ़ती दरों की चुनौती का सामना कर रहा है। रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि भविष्य में केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण सतर्क और आंकड़ों के आधार पर हो सकता है।

निष्कर्ष के रूप में

अगर आरबीआई रेपो रेट में कटौती करता है, तो इसका प्रभाव न केवल बैंकिंग क्षेत्र बल्कि समग्र आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा। यह कदम उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत हो सकता है और निवेश में वृद्धि को भी प्रेरित कर सकता है।

कृपया अधिक जानकारी के लिए इन लिंक पर जाएं:[बैंक ऑफ बड़ौदा की आधिकारिक वेबसाइट](https://www.bankofbaroda.in/) और[आरबीआई की मौद्रिक नीति](https://www.rbi.org.in/scripts/BS_MPCAnnouncements.aspx)।

बाहरी स्रोतों के लिए, अधिक जानकारी के लिए[इकोनॉमिक टाइम्स](https://economictimes.indiatimes.com/) और[फाइनेंशियल एक्सप्रेस](https://www.financialexpress.com/) की वेबसाइट पर जाएं।

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