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Wednesday, January 21, 2026

भारत की जीडीपी वृद्धि दर में वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में संभव सुधार: यूबीआई की रिपोर्ट

अर्थव्यवस्थाभारत की जीडीपी वृद्धि दर में वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में संभव सुधार: यूबीआई की रिपोर्ट

नई दिल्ली: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने जताई उम्मीद

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) ने हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर में वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में सुधार हो सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जीडीपी वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत तक पहुँच सकती है, जबकि दूसरी तिमाही में यह दर 5.4 प्रतिशत थी। इस सकारात्मक आशंका के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए गए हैं।

क्या, कौन, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?

कौन: इस रिपोर्ट को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने जारी किया है, जो भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है।

क्या: रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर में सुधार होगा और यह 6.2 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच सकती है।

कहाँ: रिपोर्ट की यह जानकारी नई दिल्ली में स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मुख्यालय से आई है।

कब: यह भविष्यवाणी वित्त वर्ष 2025 के अंतर्गत की गई है, विशेष रूप से तीसरी तिमाही में।

क्यों: रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली छमाही में जीडीपी और सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि के बीच जो नकारात्मक अंतर था, वह तीसरी तिमाही में समाप्त हो सकता है।

कैसे: यूबीआई का मानना है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ने के चलते सरकार की राजकोषीय रणनीतियों के सकारात्मक प्रभाव से यह वृद्धि संभव है।

विस्तार में:

यूबीआई की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जीडीपी और जीवीए वृद्धि के बीच जो नकारात्मक अंतर देखा गया था, उसे तीसरी तिमाही में काफी हद तक कम किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 6.2 प्रतिशत हो जाएगी।”

हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि जीडीपी डेटा और राजकोषीय आंकड़ों में शुद्ध अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि के बीच विसंगति के कारण Q3FY25 में जीडीपी-जीवीए वृद्धि के बीच फिर से नकारात्मक अंतर उत्पन्न हो सकता है।

राजकोषीय आंकड़ों का प्रभाव:

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में शुद्ध अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि के रुझान ने आर्थिक आंकड़ों में कुछ विसंगतियाँ उत्पन्न की हैं। यदि इस तिमाही में शुद्ध अप्रत्यक्ष करों में कमी आती है, तो यह जीडीपी और जीवीए के बीच का अंतर फिर से बढ़ा सकता है।

वर्ष भर की वृद्धि दर:

यूबीआई ने पूरे वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि के पूर्वानुमान को 6.4 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में लगभग 6.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि की आवश्यकता होगी ताकि वर्ष भर का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

इस प्रकार, वित्त वर्ष 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के संदर्भ में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन सतर्कता बरतने की आवश्यकता भी है।

आशा और सतर्कता का संतुलन:

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है कि सरकार की नीतियों और मौद्रिक प्रणाली में संतुलन बना रहे। यदि सही दिशा में प्रयास किए गए, तो जीडीपी विकास दर में सुधार की संभावनाएं बहुत अधिक हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि से भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से, यदि ये नीतियां और योजनाएं सही समय पर लागू की गईं, तो भारत को अपनी अद्वितीय विकास यात्रा पर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

सूत्रों का महत्व:

इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता को भी देखते हुए, यह आवश्यक है कि पाठक अन्य स्रोतों से भी जानकारी प्राप्त करें। भारतीय रिजर्व बैंक और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं आर्थिक आंकड़ों और प्रवृत्तियों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करती हैं।

अंत में:

वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर में सुधार की संभावना भारत के आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, इसे हासिल करने के लिए सतर्कता और सही नीतियों का होना आवश्यक है। इस संदर्भ में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है।

रिपोर्ट के अनुसार: ‘As per the report by Union Bank of India,’ जो यह दर्शाती है कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर का भविष्य उज्ज्वल नजर आता है।

 

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