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Thursday, January 22, 2026

भारत-इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराना संबंध, पीएम मोदी ने जकार्ता में महाकुंभभिषेकम पर की शानदान संबोधन

इंडियाभारत-इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराना संबंध, पीएम मोदी ने जकार्ता में महाकुंभभिषेकम पर की शानदान संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जकार्ता में महाकुंभभिषेकम के मौके पर गर्मजोशी से संबोधन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जकार्ता में श्री सनातन धर्म आलयम के महाकुंभभिषेकम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने इस अवसर पर भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक एवं भौगोलिक संबंधों की चर्चा की। साथ ही, उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी भक्तों और इंडोनेशिया के लोगों को शुभकामनाएं भी दीं।

भारत-इंडोनेशिया के रिश्ते: कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे

कौन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में महाकुंभभिषेकम के अवसर पर संबोधन किया।

क्या: पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते एक दूसरे के प्रति प्रेम और आस्था पर आधारित हैं।

कहाँ: यह संबोधन इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित महाकुंभभिषेकम के अवसर पर दिया गया।

कब: यह कार्यक्रम रविवार, 2 फरवरी 2025 को आयोजित हुआ।

क्यों: पीएम मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम में भाग लिया।

कैसे: पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में जुड़कर दर्शकों को संबोधित किया और अपनी शुभकामनाएं भेजीं।

साझा आस्था और संस्कृति का परिचायक

इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा, “हमारा संबंध साझा आस्था का है, अध्यात्म का है। भारत और इंडोनेशिया का यह रिश्ता न केवल भौगोलिक बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी जुड़ा हुआ है।” उन्होंने बताया कि भारत से इंडोनेशिया जाने वाले लोग प्रम्बानन मंदिर में जाकर काशी और केदार के अनुभव का आनंद लेते हैं। मोदी जी ने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति और इंडोनेशिया की संस्कृति में गहरा जुड़ाव है, जो हमारी साझा धार्मिक मान्यताओं को दर्शाता है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का सम्मान

पीएम मोदी ने इस मौके पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो ने हाल ही में भारत का दौरा किया और वहां के लोगों का प्यार लेकर आए हैं। इससे यह साबित होता है कि दोनों देशों के बीच आत्मीयता और सम्मान का रिश्ता है।

संस्कृति की समृद्ध प्रस्तुति

पीएम मोदी ने और भी कई उदाहरणों का उल्लेख किया कि कैसे भारतीय संस्कृति और इंडोनेशियाई संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, “भारत में अब इंडोनेशिया की रामलीला का मंचन अयोध्या में होता है। जब हम बाली में ‘ओम स्वस्ति-अस्तु’ सुनते हैं, तो हमें भारत के वैदिक विद्वानों द्वारा किया गया स्वस्ति वाचन याद आता है।” उन्होंने यह भी कहा कि बोरोबुदुर स्तूप में भगवान बुद्ध की शिक्षाएं हमें भारत में सारनाथ और बोधगया में देखने को मिलती हैं।

साझा सामुद्रिक इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी ने साझा सामुद्रिक इतिहास का भी जिक्र किया और कहा, “आज भी हमारे राज्य ओडिशा में बाली यात्रा मनाई जाती है, जो उन प्राचीन समुद्री यात्राओं से जुड़ी है। ये यात्राएँ एक समय में भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार और संस्कृति को जोड़ती थीं।”

भावनात्मक जुड़ाव के प्रतीक

पीएम मोदी ने कहा कि जब भारतीय लोग ‘गरुड़ इंडोनेशिया’ की उड़ान भरते हैं, तो उन्हें हमारे साझा सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास की झलक देखने को मिलती है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीयों के दिल में इंडोनेशिया के प्रति एक विशेष स्थान है।

गर्भित भविष्य की ओर

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते आने वाले समय में और भी मजबूत होंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों की यह धारा सदियों तक ऐसे ही बहती रहेगी।

भारत-इंडोनेशिया के ऐतिहासिक संबंधों पर और जानने के लिए पढ़ें:[हिंद महासागर की भूमिका](https://www.worldnews.com)

यह संबोधन न केवल एक धार्मिक उत्सव का हिस्सा था, बल्कि इसे भारत और इंडोनेशिया के बीच भाईचारे और आपसी समझ को और भी मजबूत करने का एक अवसर माना जा रहा है। पीएम मोदी की उपस्थिति और उनके विचारों ने इस महत्वपूर्ण अवसर को और भी विशेष बना दिया।

इस कार्यक्रम के माध्यम से ना केवल धार्मिक एकता को बल मिला, बल्कि भारतीय संस्कृति की धरोहर को भी विश्व के सामने पेश किया गया। दोनों देशों के बीच यह रिश्ता हमेशा से मजबूती के साथ आगे बढ़ता रहेगा।

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