देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन
उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र आज अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर गया है। इस दौरान सदन में विपक्षी विधायकों ने एक बार फिर से हंगामा किया, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। खासतौर पर विपक्ष के नेताओं ने संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा पहाड़ और मैदान को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। इस घटनाक्रम में निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने भी अपने विचार रखे और मंत्री से माफी मांगने की मांग की। हाल ही में पारित विभिन्न विधेयकों के बीच ये घटनाएँ राज्य की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं।
सदन की घटनाएँ: किसने क्या कहा?
उत्तराखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान, जब संसदीय कार्यमंत्री ने पहाड़-मैदान की बात की, तो विपक्षी विधायक इस पर बुरी तरह भड़क गए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मंत्री पर असंसदीय भाषा का आरोप लगाया और विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि “अगर संसदीय कार्य मंत्री प्रदेश की जनता से माफी मांग लेंगे तो जनता उन्हें माफ कर देगी।” इस बयान पर हंगामा हो गया और कांग्रेस के एक विधायक ने सदन में कागज फाड़कर अपनी नाखुशी जताई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में कहा कि यह बात सदन में स्पष्ट है और उन्होंने कहा कि यह एक उचित प्रक्रिया है। उन्होंने फिर से विपक्ष की टिप्पणियों का खंडन किया।
बजट का आकार और प्रमुख मुद्दे
गुरुवार को, उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 101175.33 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह बजट पिछले वर्ष के मुकाबले 13.38 प्रतिशत अधिक है। यह पहली बार है जब राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है। सदन में इस बजट को पारित करने के लिए सभी विधायकों ने एक साथ काम किया।
मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि बजट सही दिशा में कदम बढ़ाने का एक संकेत है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के अलावा अन्य 11 जिलों में जमीनों की अवैध बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो भू-कानून के अंतर्गत है।
सदन का माहौल और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सदन में हंगामे के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा को बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। इस पर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की। विधायकों के बीच की यह तनातनी दिखाती है की राजनीतिक माहौल किस प्रकार बदल रहा है।
बजट सत्र में आज कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हुई, जिनमें उत्तराखंड राज्य विधानसभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) और उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास (संशोधन) विधेयक शामिल थे। ये विधेयक विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुए।
भू-कानून और इसके प्रभाव
उत्तराखंड में भू-कानून बिल पास होने के बाद अब जमीन खरीदने वालों के लिए नए नियम लागू होंगे। इस कानून का उद्देश्य प्रदेश के भूगोल और संस्कृति की रक्षा करना है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ शुरुआत है और भविष्य में और बदलाव होंगे।
उल्लेखनीय बातें और भविष्य की योजनाएँ
उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित बजट और विधेयक प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान विपक्ष ने अपनी चिंताओं को उठाया, जोकि राज्य की राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है।
As per the report by Amar Ujala, ये विधेयक उत्तराखंड की वर्तमान राजनीतिक स्थितियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उत्तराखंड में बजट सत्र के दौरान, सदन में हुई घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक माहौल कितनी तेजी से बदल रहा है। इसके साथ ही राज्य में विकास योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी सभी की नजरें बनी हुई हैं।
इस तरह के तनावपूर्ण क्षणों में यह महत्वपूर्ण है कि सदन की कार्यवाही बिना किसी रुकावट के चलती रहे, ताकि जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।
सफाई और जवाबदेही की आवश्यकता
सदन में उठे मुद्दे यह दर्शाते हैं कि उत्तराखंड की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है। विपक्षी दल द्वारा उठाए गए मुद्दे मुख्य रूप से स्थानीय जनता के हितों की रक्षा के लिए हैं। यह स्थिति यह बताती है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, सभी दलों को एक साथ काम करने की आवश्यकता है।
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