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Thursday, January 22, 2026

तमिलनाडु में लोकसभा परिसीमन का स्टालिन ने किया विरोध, उठ रहा है भाषा संघर्ष का खतरा

इंडियातमिलनाडु में लोकसभा परिसीमन का स्टालिन ने किया विरोध, उठ रहा है भाषा संघर्ष का खतरा

तमिलनाडु में लोकसभा परिसीमन का स्टालिन ने किया विरोध, उठ रहा है भाषा संघर्ष का खतरा

तमिलनाडु के सीएम ने कहा- हम तैयार हैं एक और भाषा युद्ध के लिए

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने हाल ही में लोकसभा परिसीमन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि परिसीमन के कारण तमिलनाडु को आठ लोकसभा सीटें खोने का खतरा है। यह तब होगा जब राज्य ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी परिवार नियोजन कार्यक्रम लागू किया है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा है कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 5 मार्च को एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में देश के विभिन्न राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि सभी एकजुट होकर अपने मतभेदों को भुलाकर तमिलनाडु की आवाज़ को केंद्र सरकार तक पहुंचा सकें। स्टालिन ने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि तमिलनाडु के अधिकारों का भी है।

क्यों हो रहा है विवाद?

यह विवाद तब और बढ़ गया है जब तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच नई शिक्षा नीति की तीन भाषा नीति को लेकर आपसी मतभेद गहरा गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर यह परिसीमन लागू होता है, तो राज्य की आवाज़ संसद में कम हो जाएगी। वर्तमान में तमिलनाडु के पास 39 सांसद हैं, लेकिन परिसीमन के बाद ये संख्या घटकर केवल 31 रह सकती है।

स्टालिन का आरोप है कि केन्द्र सरकार उन राज्यों को नुकसान पहुँचा रही है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल तमिलनाडु का मामला नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण भारत के राज्यों का भी मामला है। वह राजनीतिक दलों से अपील कर रहे हैं कि वे इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाएं।

बैठक का उद्देश्य

5 मार्च को होने वाली सर्वदलीय बैठक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा करना है। स्टालिन ने कहा कि इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि एक संगठित आवाज उठाई जा सके। उन्होंने कहा कि हमें एनईपी, केंद्रीय कोष, और एनईईटी जैसे मुद्दों पर भी आवाज उठानी होगी, जिसके लिए हमें पर्याप्त संख्या में सांसदों की आवश्यकता है।

भाषा संघर्ष की चेतावनी

सीएम स्टालिन ने यह भी कहा कि अगर इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह एक और भाषा युद्ध की ओर ले जा सकता है। उन्होंने राज्य की शिक्षा नीति को लेकर चिंता व्यक्त की, जिसमें केंद्र सरकार की तीन भाषा नीति पर जोर दिया जा रहा है। इस नीति के तहत, तमिलनाडु में हिंदी को थोपने का आरोप भी लगाया गया है।

इस विषय पर विवाद बढ़ने के बाद, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और स्टालिन के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। सीएम स्टालिन ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार राज्य में जबरन हिंदी लागू करना चाहती है, जबकि केंद्रीय मंत्री ने इसके लिए राज्य सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

अंतिम विचार

इस पूरे विवाद में यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु की जनसंख्या नियंत्रण की नीति और लोकसभा परिसीमन के कारण राज्य की राजनीतिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री स्टालिन का यह बयान चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि यदि उचित कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य की आवाज़ कमज़ोर हो जाएगी।

इस मुद्दे पर तमिलनाडु के नागरिकों की प्रतिक्रिया भी जरूरी होगी। जोड़ते हुए, हमें उम्मीद है कि 5 मार्च को होने वाली सर्वदलीय बैठक इस समस्या का समाधान निकालने में सहायक होगी।

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इस विषय में और अधिक जानकारी के लिए आप नेशनल हेराल्ड इंडिया और द हिन्दू जैसी विश्वसनीय साइटों का भी सहारा ले सकते हैं।

 

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