14.1 C
Delhi
Wednesday, January 21, 2026

आरबीआई रेपो रेट में खास कटौती: क्या आपके होम और कार लोन की ईएमआई पर होगा असर? जानें विस्तार से

अर्थव्यवस्थाआरबीआई रेपो रेट में खास कटौती: क्या आपके होम और कार लोन की ईएमआई पर होगा असर? जानें विस्तार से

क्या है रेपो रेट में कटौती का मतलब?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 7 फरवरी 2025 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। नए गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में, रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया है। यह कटौती पांच वर्षों के बाद की गई है, जिससे आम लोगों को होम लोन, वाहन लोन और व्यक्तिगत लोन पर राहत मिली है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आर्थिक मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी जा सके।

कब और क्यों हुई यह कटौती?

बीते साल फरवरी में रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था। वैश्विक संकटों के चलते पहले यह दर बढ़ाई गई थी, लेकिन अब मौद्रिक नीति को सरल बनाने के लिए और महंगाई दर को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया। इस कटौती का मुख्य कारण महंगाई दर में कमी और धीमी विकास दर है, जो वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती है।

ईएमआई पर काटी गई दर का प्रभाव?

रेपो रेट में हुई 25 आधार अंकों की कटौती का सीधा प्रभाव आपकी ईएमआई पर देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपने 50 लाख रुपये का होम लोन 8.5 प्रतिशत ब्याज दर पर 20 वर्षों के लिए लिया है, तो आपकी मौजूदा ईएमआई 43,391 रुपये थी। नई ब्याज दर 8.25 प्रतिशत होने पर आपकी ईएमआई घटकर 42,603 रुपये हो जाएगी, जिससे आपको हर महीने 788 रुपये की बचत होगी।

यदि कार लोन की बात करें, तो 5 लाख रुपये का कार लोन 12 प्रतिशत की ब्याज दर पर लेने पर मासिक ईएमआई वर्तमान में 11,282 रुपये थी, जबकि नई दर के अनुसार यह 11,149 रुपये होगी। इससे ग्राहकों को लगभग 133 रुपये महीने और 1,596 रुपये साल में बचत होगी।

बैंकों पर प्रभाव

लेकिन इस कटौती का प्रभाव कितना होगा, यह मुख्यतः बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगा। सभी बैंकों ने अपने लेडिंग रेट में समान और समुचित कटौती करने का फैसला नहीं लिया है। प्रत्येक बैंक अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर अपनी ब्याज दरों को कम करेगा। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आपकी बैंक ने कितनी कटौती की है और ईएमआई कितनी कम होगी।

आर्थिक दृष्टिकोण और विकास की गति

आरबीआई का यह निर्णय सिर्फ ब्याज दरों में कटौती तक ही सीमित नहीं है। इस कदम का उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना है। बाजार के विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम बैंकों को सस्ते कर्ज देने में मदद करेगा, जो कि खपत को बढ़ावा देने में सहायक साबित होगा।

इकोनॉमी रिसर्च संस्था पीएल कैपिटल ग्रुप के अर्थशास्त्री अर्श मोगरे के अनुसार, मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने और विकास की गति धीमी होने के कारण आरबीआई ने यह निर्णय लिया है। दिसंबर 2024 में खुदरा महंगाई दर 5.2 प्रतिशत रही और आने वाले महीनों में यह लगभग 4.5 से 4.7 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।

आगे की संभावनाएँ

यह कटौती न केवल संभावित लाभ प्रदान कर सकती है, बल्कि आने वाले समय में वित्तीय संस्थानों के लिए भी सकारात्मक संकेत हो सकती है। जैसे-जैसे बाजार में धन की गति बढ़ेगी, उम्मीद की जा रही है कि बैंकों की नई नीतियों के तहत और भी अधिक कर्ज सस्ते दरों पर उपलब्ध होंगे।

अन्य संबंधित जानकारी

इसके अतिरिक्त, सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे कि आयकर छूट में वृद्धि, जो आगामी बजट में पेश की गई है, अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव डालने वाली हैं। सरकार ने आयकर छूट के दायरे को बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने का भी ऐलान किया है, जिससे आम जनता के हाथों में अधिक धन होगा।

अंत में

आरबीआई की इस कटौती ने निश्चित रूप से आम आदमी के कर्ज पर लगने वाले बोझ को कम किया है। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि आम लोग अपने बैंकों की नीतियों पर नज़र रखें और समझें कि उनकी ईएमआई पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। यह कदम न केवल व्यक्तिगत वित्त को प्रभावित करेगा, बल्कि व्यापक अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा। आगे की दिशा में, हम आशा करते हैं कि इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और बाजार में स्थिरता आएगी।

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles