मुख्यमंत्री फडणवीस का अहम बयान: फुले के मार्ग पर चलकर करेंगे समानता की स्थापना
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को सावित्रीबाई फुले की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में जोर देकर कहा कि उनकी सरकार 19वीं सदी के महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले द्वारा दिखाए गए समानता के मार्ग पर चलेगी। फडणवीस का यह बयान न केवल समाज में समानता की आवश्यकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकार अपने कार्यों में फुले दंपति के आदर्शों को महत्वपूर्ण मानती है।
फडणवीस ने यह बात सतारा जिले के नायगांव में कही, जो सावित्रीबाई फुले का जन्म स्थान है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता छगन भुजबल और राज्य मंत्री अतुल सावे भी मौजूद थे। फडणवीस ने कहा, “अगले छह वर्षों में हम सावित्रीबाई फुले की 200वीं जयंती मनाने जा रहे हैं, और इस अवसर पर उनके स्मारक का कार्य पूरा करने का आश्वासन देता हूं।”
फुले के मार्ग पर चलने का संकल्प
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार फुले द्वारा दिखाए गए समानता के मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर जो भी मांग की गई है, उसे तुरंत पूरा किया जाएगा। हम सुनिश्चित करेंगे कि परियोजना के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध हो।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा, ताकि उन्हें समाज में उचित स्थान मिल सके।
फडणवीस के अनुसार, लखपति दीदी योजना के माध्यम से भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम चाहेंगे कि राज्य में लखपति दीदी की संख्या बढ़े।” यह योजना उन महिलाओं के लिए है जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक होती है।
भुजबल का बयान: शिक्षा के क्षेत्र में फुले दंपति की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान छगन भुजबल ने सावित्रीबाई फुले के योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फुले दंपति ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए थे और विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में उनका योगदान अद्वितीय है। भुजबल ने कहा, “हम सावित्रीबाई फुले के समय में जो घर था, उसे फिर से बनाएंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि फुले दंपति ने 1848 में भिड़े वाड़ा में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला था।
भुजबल ने फडणवीस से प्रार्थना की कि सरकार को सावित्रीबाई फुले के नाम पर जो पुरस्कार दिए जाते थे, उन्हें फिर से शुरू करना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने पुणे के भिड़े वाड़ा में चल रहे कार्यों को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समानता की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता
इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र सरकार सावित्रीबाई फुले और ज्योतिराव फुले के आदर्शों को अपनाने में गंभीरता से जुटी हुई है। फडणवीस द्वारा दिया गया आश्वासन कि स्मारक का कार्य जल्द पूरा होगा, यह दर्शाता है कि सरकार सामाजिक समानता की दिशा में ठोस कदम उठाने की योजना बना रही है।
सावित्रीबाई फुले को महिलाओं के लिए शिक्षा के अग्रदूत के रूप में मान्यता दी जाती है, और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को आज भी समाज में लागू करने की आवश्यकता है। यह कार्यक्रम केवल एक समारोह नहीं, बल्कि समाज में समानता और शिक्षा के महत्व को समझने का एक प्रयास है।
समाज के विभिन्न वर्गों के लिए एक संदेश
फडणवीस और भुजबल द्वारा दिए गए बयान यह दर्शाते हैं कि सरकार न केवल महिलाओं की शिक्षा और समानता की दिशा में कार्यरत है, बल्कि सामाजिक न्याय के लिए भी प्रतिबद्ध है। यह संदेश समाज के विभिन्न वर्गों के लिए प्रेरणादायक है।
सीएम फडणवीस का यह प्रयास राज्य के विकास के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का है। जैसा कि हम जानते हैं, समाज में समानता और शिक्षा का आधार मजबूती से खड़ा करना आवश्यक है। आज का यह कार्यक्रम न केवल सावित्रीबाई फुले की जयंती को मनाने का अवसर है, बल्कि यह एक प्रेरणा भी है कि हम समाज में समानता के लिए कार्य करें।
इस प्रकार, महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर से यह संकल्प लिया है कि वे फुले दंपति के ideals पर चलकर समाज में समानता और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति के लिए कार्य करेंगे।

