राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए मंत्री ने उठाए सवाल
मुंबई: महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने राज्य सरकार की लाड़की बहन योजना पर सवाल उठाते हुए इसे आर्थिक बोझ करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस योजना की वजह से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त भार पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे कि कृषि ऋण माफी योजना लागू नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जा रही है और उन योजनाओं को लागू करने के लिए पहले राज्य की आय में वृद्धि होना आवश्यक है।
कृषि मंत्री ने पुणे में की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बयान दिया
कृषि मंत्री कोकाटे ने पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि लाड़की बहन योजना से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के कारण उत्पन्न वित्तीय संकट ने राज्य के अधिशेष को प्रभावित किया है, जिससे किसानों के कृषि ऋण माफी के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। एनसीपी नेता ने कहा, “हम अगले चार से छह महीनों में ऋण माफी योजना लागू करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन इसके लिए पहले राज्य की आय बढ़ानी होगी।”
क्या है लाड़की बहन योजना?
लाड़की बहन योजना की शुरुआत एकनाथ शिंदे की पिछली सरकार द्वारा अगस्त 2024 में की गई थी। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये का भत्ता दिया जाता है। यह योजना आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सरकार की एक बड़ी घोषणा थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना और उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार करना था। हालांकि, अब इसके वित्तीय प्रभावों पर चर्चा होने लगी है।
क्या हैं सरकार के खर्चे?
मंत्री ने बताया कि इस योजना की कुल वार्षिक लागत लगभग 46,000 करोड़ रुपये है, जो राज्य के बजट पर भारी पड़ रही है। इस खर्च के चलते अन्य योजनाओं को लागू करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं, जैसे कि कृषि ऋण माफी, जो किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत योजना है।
बातचीत के दौरान, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय लेने में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि ऋण माफी योजना का कार्य राज्य के सहकारिता विभाग के अंतर्गत होगा।
फर्जी लाभार्थियों पर कार्रवाई का आश्वासन
इस बीच, महिला और बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने भी लाड़की बहन योजना के संदर्भ में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन लाभार्थियों की शिकायतों का समाधान करेगी जो फर्जी हैं। अदिति तटकरे ने स्पष्ट किया कि हमारे पास कोई अभियान नहीं है, बल्कि हम स्थानीय सरकारी कार्यालयों में प्राप्त शिकायतों का ही समाधान कर रहे हैं।
हालांकि, अदिति ने यह भी कहा कि आयकर विभाग और राज्य परिवहन विभाग से डाटा मांगा गया है ताकि उन लाभार्थियों की पहचान की जा सके जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक है या जिनके पास चार पहिया वाहन हैं।
सरकार की अगली योजनाएं
महाराष्ट्र सरकार की प्राथमिकताओं में से एक होगी कि वे वित्तीय स्थिति में सुधार लाएं ताकि वे कृषि ऋण माफी योजना को पुनः लागू कर सकें। इसके साथ ही, राज्य सरकार इस बात पर भी ध्यान देगी कि लाड़की बहन योजना को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके, ताकि इसके तहत दी जाने वाली सहायता सही लाभार्थियों तक पहुंचे।
अर्थव्यवस्था और योजनाओं का संतुलन
राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक है कि कोई भी सहायता योजना तैयार की जाए जिससे आर्थिक बोझ कम हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाड़की बहन योजना को चलाना है, तो इसके लिए बजट में समुचित व्यवस्था करनी पड़ेगी।
इस प्रकार, लाड़की बहन योजना के भविष्य और इसके वित्तीय प्रभावों की समीक्षा के बाद ही सरकार आगामी कदम उठाएगी। राज्य के किसानों और आर्थिक स्थिति के लिए यह चुनावी परिणाम निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होंगे।

