दिल्ली में जाट समुदाय को ओबीसी लिस्ट में शामिल करने की मांग पर केजरीवाल ने उठाई आवाज़
दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली के जाट समाज को केंद्र की OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) सूची में शामिल करने की मांग की है। केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार का रवैया जाट समुदाय के प्रति पक्षपातपूर्ण है, जिसके कारण इस समुदाय के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के उचित अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने इस पत्र में जाट समुदाय के साथ हो रहे अन्याय की बात की और केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया।
क्या है मामला?
जाट समुदाय ने लंबे समय से केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल होने की मांग की है। अरविंद केजरीवाल ने पत्र में स्पष्ट किया कि दिल्ली की ओबीसी सूची में जाट समाज का नाम है, लेकिन केंद्र की सूची में इसे अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार ने जाट समाज को आरक्षण देने के लिए केवल वादे किए हैं, लेकिन किसी भी ठोस कार्रवाई का अभाव है।”
इस पत्र के माध्यम से केजरीवाल ने पीएम मोदी को याद दिलाया कि 26 मार्च 2015 को उन्होंने जाट समुदाय के प्रतिनिधियों से वादा किया था कि जाट समाज को केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल किया जाएगा। लेकिन इस वादे को अब तक पूरा नहीं किया गया है।
केजरीवाल ने आगे कहा कि, “दिल्ली के जाट भाई-बहनों के साथ यह बहुत बड़ा अन्याय है कि उन्हें अपने अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों से आने वाले जाटों को आरक्षण मिल रहा है। यह स्थिति अब और सहन नहीं की जा सकती।”
जाट समुदाय की प्रतिक्रिया
जाट समुदाय ने केजरीवाल की इस मांग का स्वागत किया है और उन्हें अपनी आवाज़ ऊँची करने के लिए धन्यवाद कहा है। इस संबंध में जाट समुदाय के कई प्रतिनिधियों ने केजरीवाल से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने अपनी चिंताओं को साझा किया। जाट समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर उन्हें OBC सूची में शामिल नहीं किया गया, तो यह उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ देगा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
केंद्र में वर्तमान मोदी सरकार ने विभिन्न पिछड़े समुदायों को लाभ पहुंचाने के लिए कई योजनाएँ बनाई हैं। हालांकि, जाट समुदाय के लोग मानते हैं कि उनकी अनदेखी की जा रही है। यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जाट समुदाय का वोट बैंक विभिन्न राज्यों में बड़ा है।
पार्टी का रुख
आम आदमी पार्टी ने हमेशा से जाट समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है। दिल्ली में जाटों की संख्या काफी है, और केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार जाट समुदाय के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस मामले में जल्द कोई निर्णय नहीं लेती है, तो उनका समाज आगामी चुनावों में इसका प्रतिशोध ले सकता है।
सरकारी वादे का महत्व
केंद्र सरकार के वादे को निभाना अनिवार्य है, क्योंकि यह न केवल जाट समुदाय के लिए बल्कि सभी ओबीसी वर्गों के लिए एक उदाहरण बनेगा। यदि जाटों को ओबीसी सूची में शामिल किया जाता है, तो यह अन्य समुदायों के लिए भी एक सशक्तिकरण का प्रतीक होगा।
समाज के नेताओं की प्रतिक्रिया
कई समाज के नेताओं ने केजरीवाल के पत्र का समर्थन किया है। उनका कहना है कि दिल्ली के जाटों को उनका rightful representation मिलना चाहिए। इस विषय पर जाट समाज के प्रमुख नेताओं ने एक साथ आकर केंद्र सरकार से मांग की है कि शीघ्रता से निर्णय लिया जाए।
हमें ये देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या कार्रवाई करती है और क्या वादे को पूरा किया जाएगा या फिर यह मामला भी पूर्व की भाँति टल जाएगा।
अंतिम विचार
दिल्ली के जाट समुदाय का यह मामला न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो न केवल दिल्ली के जाटों की भविष्यवाणी करेगा, बल्कि समाज के अन्य पिछड़े वर्गों के लिए भी एक नज़ीर पेश करेगा। अब यह देखना होगा कि क्या केंद्र सरकार इस पर ध्यान देगी और जाट समुदाय को उनका हक दिलाएगी या यह मामला भी एक और वादे के रूप में रह जाएगा।

