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Thursday, January 22, 2026

टोंक जिले में एसडीएम थप्पड़ कांड: 18 आरोपियों को मिली जमानत, नरेश मीणा की याचिका खारिज

इंडियाटोंक जिले में एसडीएम थप्पड़ कांड: 18 आरोपियों को मिली जमानत, नरेश मीणा की याचिका खारिज

टोंक, राजस्थान – टोंक जिले की जिला एवं सत्र अदालत में सोमवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसमें एसडीएम थप्पड़ कांड से जुड़े 18 आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली गई। दूसरी ओर, मुख्य आरोपी नरेश मीणा की जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम ने इस विवादास्पद मामले को एक नया मोड़ दिया है।

जमानत का मामला

टोंक के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान 13 नवंबर 2024 को समरावता गांव में हुए इस थप्पड़ कांड और उसके बाद के उपद्रव, आगजनी, तथा पुलिसकर्मियों से मारपीट के मामले में, अदालत ने एफआईआर नंबर 167/2024 की सुनवाई का संचालन किया। इस मामले में नरेश मीणा तथा 18 अन्य आरोपी थे। जहां एक ओर अदालत ने 18 आरोपियों की जमानत याचिका को मंजूर किया, वहीं नरेश मीणा की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि उन्हें मुख्य सूत्रधार माना गया है।

किस प्रकार हुई सुनवाई

सुनवाई के दौरान नरेश मीणा के वकील ने अदालत में उनकी जमानत के लिए अपील की, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं की गई थीं। 18 अन्य आरोपियों के लिए 50,000 रुपये का मुचलका एवं 25,000 रुपये की दो जमानतें लगाई गईं।

टोंक में घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

यह मामला तब शुरू हुआ जब उपचुनाव के दौरान नरेश मीणा और अन्य समर्थकों ने एसडीएम अमित चौधरी पर थप्पड़ मार दिया था। इसके परिणामस्वरूप वहां तनाव उत्पन्न हो गया और हिंसक भिड़ंतें हुईं। इस मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों का कहना है कि वे नरेश की सहायता करने के लिए वहां उपस्थित थे, लेकिन उनकी भूमिका अभी भी अदालत के समक्ष स्पष्ट नहीं हो पाई है।

टोंक के इस कांड ने राज्य में राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित किया है। नरेश मीणा का कहना है कि यह सब राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है। उनकी तरफ से आरोप लगाया गया है कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें फंसाने की कोशिश की है।

टोंक की पुलिस ने इस मामले में गंभीरता से जांच शुरू कर दी है और सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए हैं।

अगले कदम क्या होंगे?

नरेश मीणा के वकील अब इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नरेश मीणा को न्याय मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लग सकता है।

इस मामले ने न केवल स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है, बल्कि यह राजस्थान की न्यायिक प्रक्रिया में भी एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जैसे-जैसे मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी, इसमें कई नए पहलू सामने आ सकते हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

इस मामले पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। कुछ दल नरेश मीणा के समर्थन में खड़े हुए हैं, जबकि कुछ ने उन्हें सख्त सजा देने की मांग की है। यह मामला न केवल टोंक बल्कि पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बन गया है।

यहां तक कि राजस्थान के मुख्यमंत्री ने भी इस घटना की निंदा की है और इसे कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।

अंत में

टोंक जिले में हुए इस एसडीएम थप्पड़ कांड ने कई सवाल खड़े किए हैं, जिनका उत्तर आने वाले समय में मिल सकता है। इस मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।

स्रोत के अनुसार, इस मामले के ताजा अपडेट के लिए आप जागरण की भी जानकारी ले सकते हैं।

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