नई दिल्ली: चांदी के आभूषणों में हॉलमार्किंग की आवश्यकता, उपभोक्ताओं की मांग पर विचार कर रही है सरकार
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने का मुद्दा अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सुझाव पर विचार करने के लिए बीआईएस को निर्देश दिया है। यह कदम उपभोक्ताओं की मांग के संदर्भ में प्रासंगिक है, जिन्होंने चांदी की गुणवत्ता एवं शुद्धता की पुष्टि के लिए हॉलमार्किंग की आवश्यकता जताई है।
इस संबंध में विस्तृत चर्चा करते हुए, जोशी ने कहा, “उपभोक्ताओं की ओर से चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग की मांग की जा रही है। आप (बीआईएस) इस पर विचार-विमर्श कर निर्णय ले सकते हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर निर्णय लेगी, ताकि सही दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
चांदी की हॉलमार्किंग के लिए बीआईएस की भूमिका क्या होगी?
मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को बीआईएस के स्थापना दिवस समारोह में यह जानकारी दी कि चांदी की हॉलमार्किंग वर्तमान में स्वैच्छिक है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह कदम उपभोक्ताओं की संतुष्टि को सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, “मैंने बीआईएस से व्यवहार्यता पर काम करने और उपभोक्ताओं व आभूषण डीलरों से प्रतिक्रिया लेने को कहा है। हम सभी हितधारकों से परामर्श करेंगे और प्रक्रिया शुरू करेंगे।”
बीआईएस के महानिदेशक प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि ब्यूरो तीन से छह महीने के भीतर अनिवार्य चांदी हॉलमार्किंग लागू करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि हितधारकों के साथ विचार-विमर्श चल रहा है और इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
अनिवार्य हॉलमार्किंग का महत्व
चांदी की हॉलमार्किंग, जो सफेद धातु की शुद्धता को प्रमाणित करती है, उपभोक्ताओं के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करेगी। यह सुनिश्चित करेगी कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिले। वर्तमान में, सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग अनिवार्य है, जो जून 2021 से लागू की गई थी। सोने की हॉलमार्किंग के सफल कार्यान्वयन ने चांदी के आभूषणों के लिए इसी प्रक्रिया को लागू करने का समर्थन किया है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वर्तमान में खरीदे जाने वाले आभूषणों में से लगभग 90 प्रतिशत हॉलमार्क वाले होते हैं। सोने से संबंधित जानकारी देते हुए, उन्होंने कहा कि अब तक 44.28 करोड़ से अधिक स्वर्ण आभूषणों को विशिष्ट पहचान के साथ हॉलमार्क किया जा चुका है।
हितधारकों की प्रतिक्रिया
गुजरात, कर्नाटक और अन्य राज्यों के हितधारकों ने भी चांदी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का अनुरोध किया है। यह दर्शाता है कि विभिन्न क्षेत्रों से इस दिशा में सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। मंत्री जोशी ने बताया कि बीआईएस द्वारा एक अद्वितीय छह अंकों वाला अल्फान्यूमेरिक कोड छापने पर चर्चा चल रही है, जो चांदी की शुद्धता को प्रमाणित करेगा।
भविष्य के मानक और नवाचार
1986 में बीआईएस अधिनियम के तहत स्थापित बीआईएस एक स्वायत्त राष्ट्रीय निकाय है जो उत्पादों और सेवाओं के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है। मंत्री ने कहा, “जब हम भविष्य की ओर देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि हमारी यात्रा केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए नहीं है, बल्कि नए मानक स्थापित करने के बारे में भी है। हम वैश्विक बाजार में केवल भागीदार नहीं हैं; हम गुणवत्ता की वैश्विक दुनिया में अग्रणी हैं।”
मंत्री ने इस कार्यक्रम में कई नई पहलों की घोषणा की, जिसमें बीआईएस कॉमिक पुस्तकें, पुस्तकालय और पेंशनभोगी पोर्टल शामिल हैं। यह दिखाता है कि बीआईएस उपभोक्ता के अधिकारों और मानकों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
समाज पर पड़ने वाला प्रभाव
चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग से उपभोक्ताओं को न केवल उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलेंगे, बल्कि यह बाजार में अनुशासन और पारदर्शिता भी लाएगी। उपभोक्ता अधिक सूचित निर्णय ले सकेंगे और धोखाधड़ी से बच सकेंगे।
As per the report by BIS, यह कदम भारत में ज्वेलरी उद्योग में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षा दिलाएगा, बल्कि इसे एक सकारात्मक व्यावसायिक माहौल भी निर्मित करेगा। सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि हों, और बाजार में गुणवत्ता की दृष्टि से हम अग्रणी बन सकें।

