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Wednesday, January 21, 2026

ISRO की 100वीं सफलता: जीएसएलवी-एफ 15 रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरू

इंडियाISRO की 100वीं सफलता: जीएसएलवी-एफ 15 रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरू

नई उपलब्धियों की ओर बढ़ता भारत: ISRO ने अपना 100वां मिशन शुरू किया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्री हरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने सबसे महत्वपूर्ण मिशन की तैयारी शुरू कर दी है। जीएसएलवी-एफ 15 रॉकेट का प्रक्षेपण 29 जनवरी को सुबह 6.23 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण प्रक्षेपण का यह काउंटडाउन 27 घंटे की उल्टी गिनती के साथ शुरू हो गया है। यह मिशन नए ISRO अध्यक्ष वी नारायणन का पहला प्रक्षेपण भी होगा।

ISRO ने बताया कि जीएसएलवी-एफ 15 रॉकेट, एनवीएस-02 उपग्रह को भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा में स्थापित करेगा। यह उपग्रह भारत के नेविगेशन विद इंडियन कंस्टीलेशन (NavIC) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत और उसके आस-पास 1,500 किलामीटर के क्षेत्र में सटीक नेविगेशन सेवाएं प्रदान करना है।

मिशन के पीछे की जानकारी: कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे

कौन: ISRO, भारत का प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अग्रणी है और वैश्विक स्तर पर पहचान रखता है।

क्या: जीएसएलवी-एफ 15 रॉकेट के माध्यम से एनवीएस-02 उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा, जो भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम को मजबूत करेगा।

कहाँ: यह प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा।

कब: प्रक्षेपण 29 जनवरी 2025 को सुबह 6.23 बजे होगा।

क्यों: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत में नेविगेशन सेवाओं को सुदृढ़ करना और उपग्रह से संबंधित सेवाओं में आत्मनिर्भरता लाना है।

कैसे: उल्टी गिनती प्रक्रिया मंगलवार सुबह 2.53 बजे शुरू हुई। इसरो के वैज्ञानिकों ने सभी तकनीकी तैयारियों को पूरा कर लिया है और रॉकेट के लॉन्च में किसी भी प्रकार की विफलता से बचने के लिए सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।

एनवीएस-02: एक महत्वपूर्ण उपग्रह

एनवीएस-02 उपग्रह, जो कि एनवीएस श्रृंखला का दूसरा उपग्रह है, का वजन लगभग 2250 किलोग्राम है। इसे यूआर सैटेलाइट सेंटर द्वारा डिज़ाइन और विकसित किया गया है। इसमें नेविगेशन पेलोड के साथ सी-बैंड में रेंजिंग पेलोड भी शामिल है, जो इसकी पूर्ववर्ती एनवीएस-01 में भी था।

पहला उपग्रह, एनवीएस-01, 29 मई 2023 को जीएसएलवी-एफ 12 द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। एनवीएस श्रृंखला के ये उपग्रहों का मुख्य उद्देश्य नेविगेशन सेवाओं की निरंतरता को सुनिश्चित करना है और यह सभी प्रकार की नेविगेशन सेवाओं में सहायता प्रदान करेंगे, जैसे कि स्थलीय, हवाई, और समुद्री नेविगेशन, सटीक कृषि, मोबाइल उपकरणों में लोकेशन आधारित सेवाएं, और इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स (IoT) आधारित अनुप्रयोग।

ISRO की नई ऊंचाइयाँ

ISRO के 100वें मिशन के साथ ही यह निश्चित हो गया है कि भारत अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। इसरो ने पहले भी कई महत्वपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया है और अब यह अपने 100वें मिशन के साथ एक नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

इसरो ने पिछले कुछ वर्षों में कई सफल रॉकेट प्रक्षेपण किए हैं और इसका मान बढ़ रहा है। वैश्विक स्तर पर इसरो की रैंकिंग लगातार ऊँचाई पर बनी हुई है, और यह साबित करता है कि भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और लगन ने देश को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है।

ऊर्जा और उत्साह से भरे वैज्ञानिक

इसरो के वैज्ञानिकों ने इस मिशन के लिए बहुत मेहनत की है। उनका उत्साह और ऊर्जा इसे और भी खास बनाता है। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है बल्कि यह भारत के अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का संकेत भी है।

आगे की राह

भारत अब अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। इस उपलब्धि के बाद, ISRO के द्वारा आने वाले समय में कई अन्य महत्वपूर्ण मिशन भी तय हैं जिनसे भारत को और भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचने का अवसर मिलेगा। ISRO की यह यात्रा न केवल भारत के लिए बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए महत्वपूर्ण है।

इसरो के 100वें मिशन के प्रक्षेपण का यह क्षण देशवासियों के लिए गर्व की बात है और यह दिखाता है कि कैसे भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपनी पहचान बनाई है। भारतीयों को इस उपलब्धि पर गर्व होना चाहिए और यह हमें भविष्य की संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।

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