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Thursday, January 22, 2026

हाथरस में अपहरण से संबंधित अभिनव की दर्दनाक कहानी: जबरन शराब पिलाने और बेरहमी से मारने के किस्से

इंडियाहाथरस में अपहरण से संबंधित अभिनव की दर्दनाक कहानी: जबरन शराब पिलाने और बेरहमी से मारने के किस्से

अभिनव भारद्वाज का खौफनाक अनुभव: अपहरण, लोमहर्षक यातनाएं और फिरौती की मांग

अभिनव भारद्वाज, जिओ फाइबर के मैनेजर, ने अपहरणकर्ताओं द्वारा दी गई भयानक यातनाओं का खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए कई खौफनाक अनुभवों का सामना करना पड़ा। यह घटना हाथरस में हुई, जब अभिनव अपने जिओ स्टोर का निरीक्षण करने के बाद होटल पर अपने सहयोगियों के साथ खाना खा रहे थे। एक जनवरी 2025 को दोपहर के समय यह घटनाक्रम शुरू हुआ, जब वह अपने घर से निकले थे।

उनकी कहानी से जुड़ी कुछ मुख्य बातें हैं:

1. **कौन (Who)**: अभिनव भारद्वाज, जिओ फाइबर का मैनेजर।
2. **क्या (What)**: अपहरणकर्ताओं द्वारा उन्हें जबरन शराब पिलाना और पीटना।
3. **कहाँ (Where)**: हाथरस और अल्मोड़ा के बीच में।
4. **कब (When)**: 1 जनवरी 2025 को।
5. **क्यों (Why)**: फिरौती के लिए उनकी पत्नी से पैसे मांगने के लिए।
6. **कैसे (How)**: अभिनव को स्विफ्ट कार में जबरदस्ती खींचा गया।

अभिनव की आपबीती: कैसे हुआ अपहरण

अभिनव ने बताया कि वह सिकंदराराऊ में जिओ स्टोर का निरीक्षण करने के बाद होटल मिश्री में अपने सहकर्मियों के साथ भोजन कर रहे थे। खा पीकर जब वह होटल से बाहर निकले, तो एक स्विफ्ट कार आई जिसमें चार लोग सवार थे। उन्होंने जबरदस्ती अभिनव को कार में खींच लिया और न केवल मारपीट की बल्कि उनके सिर पर तमंचा तानकर जान से मारने की धमकी दी।

यातना की दास्तान: शराब और मारपीट

अभिनव ने आगे बताया कि अपहरणकर्ताओं ने उन्हें अल्मोड़ा ले जाकर एक होटल के कमरे में बंद कर दिया। वहाँ उन्हें पीवीसी पाइप और पिस्टल की बट से बेरहमी से पीटा गया। समय-समय पर उन्हें जबरन शराब पिलाई जाती थी और नशीली चीजें खिलाई जाती थीं जिससे वह बेहोश हो जाते थे। उन्होंने अपने शरीर पर लगे गहरे निशानों को दिखाते हुए कहा कि यह सब उनकी जान लेने के इरादे से किया गया।

फिरौती के लिए पत्नी से संपर्क

अपहरणकर्ताओं ने अभिनव के फोन से उनके परिवार को फिरौती के लिए संपर्क किया। उन्होंने अभिनव की पत्नी, स्वीटी से व्हाट्सएप कॉल और वीडियो कॉल के जरिए पैसे की मांग की। अभिनव ने बताया कि उनके फोन से सिम निकालकर फेंक दिया गया था, जिससे वह अपने परिवार से कोई मदद नहीं मांग पा रहे थे।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

डरावनी यातनाओं के बीच, पुलिस को इस मामले की जानकारी मिली और उन्होंने अभिनव की तलाश शुरू की। पुलिस ने अपहरणकर्ताओं की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया। अभिनव को भी उस खौफनाक स्थान से सुरक्षित निकाला गया।

घटना ने खड़ा किया सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल

इस घटना ने न केवल अभिनव के जीवन पर असर डाला बल्कि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसी घटनाएँ फिर से हो सकती हैं? क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? इन सवालों का जवाब देना जरूरी है।

अभिनव की कहानी सुनकर हर कोई दंग रह गया। यह घटना न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक सुरक्षा के लिए भी एक चेतावनी है। हाथरस में यह एक और उदाहरण है कि कैसे बेखौफ अपराधी लोगों की जान के साथ खेलते हैं।

अपनी खराब हालत में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी

अभिनव ने इस कष्टदायक अनुभव के बावजूद अपनी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा कि वह अब और मजबूत होकर उभरेंगे और ऐसे अपराधियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। उनका अनुभव यह सिखाता है कि हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए और कभी भी डरना नहीं चाहिए।

क्षेत्र में सुरक्षा के उपाय

अब इस घटना के बाद, प्रशासन ने सुरक्षा के उपायों को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। इलाके में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाना, पुलिस गश्ती बढ़ाना और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित करना शामिल है।

अभिनव की कहानी ने हमें यह भी सिखाया है कि एकजुटता से हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं। सभी को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य भी है।

अमर उजाला के अनुसार, इस मामले की लगातार जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, हिंदुस्तान में शारिक खान द्वारा किए गए एक इंटरव्यू में यह बात सामने आई है कि अभिनव के साथ हुई घटनाएँ हमें यह बताती हैं कि हमारी सुरक्षा के लिए हमें सतर्क रहना होगा।

उम्मीद की जाती है कि सरकार और प्रशासन दोनों मिलकर ऐसे मामलों को हल करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी निर्दोष नागरिक को इस प्रकार की दुर्दशा का सामना न करना पड़े।

अभिनव की कहानी हमारे लिए एक सीख है कि हमें अपने समाज में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना होगा और अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।

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