डॉ. राजगोपाल चिदंबरम: भारत के परमाणु शक्तिकरण के मास्टरमाइंड
प्रख्यात भौतिक विज्ञानी और भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख शिल्पकार डॉ. राजगोपाल चिदंबरम का आज 88 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका निधन भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षति है, क्योंकि उन्होंने देश को अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान के माध्यम से परमाणु रुचि और सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. चिदंबरम का निधन मुंबई के जसलोक अस्पताल में हुआ। भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) ने इस दुखद घटना की पुष्टि की।
बता दें कि डॉ. चिदंबरम का जन्म 12 नवंबर 1936 को चेन्नई में हुआ था। उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज और बंगलूरू के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से अपनी शिक्षा प्राप्त की। डॉ. चिदंबरम ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वह 2001 से 2018 तक भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में कार्यरत रहे और 1990 से 1993 तक भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान (BARC) के निदेशक रहे।
डॉ. चिदंबरम का योगदान: 1974 और 1998 के परमाणु परीक्षण
डॉ. चिदंबरम का भारत के परमाणु कार्यक्रम में योगदान अद्वितीय था। उन्होंने 1974 में पहले परमाणु परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1998 में पोखरण में दूसरे परमाणु परीक्षण के दौरान परमाणु ऊर्जा विभाग की टीम का नेतृत्व किया। उनके कार्यों ने भारत को एक वैश्विक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया। जैसा कि[अमर उजाला](https://www.amarujala.com) की रिपोर्ट से पता चलता है, डॉ. चिदंबरम का योगदान न केवल तकनीकी था, बल्कि उन्होंने एक रणनीतिक दृष्टिकोण से भारत की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया।
उच्चतम पुरस्कारों से किया गया सम्मानित
डॉ. चिदंबरम को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें 1975 में पद्म श्री और 1999 में पद्म विभूषण पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, उन्हें विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा डॉक्टर की मानद उपाधि से भी नवाजा गया। उनकी उपलब्धियों के लिए कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमियों ने उन्हें फेलो के रूप में स्वीकार किया।
प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान और शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया और कहा, “डॉ. राजगोपाल चिदंबरम के निधन से गहरा दुख हुआ। वह भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे। उनका योगदान भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।” पीएम मोदी के इस वक्तव्य ने न केवल वैज्ञानिक समुदाय, बल्कि सभी भारतीयों के दिलों में उनके प्रति गहरी श्रद्धा का भाव जाग्रत किया।
अपर्याप्त क्षति के रूप में याद किया गया
परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव अजित कुमार मोहंती ने डॉ. चिदंबरम के निधन को अपूरणीय क्षति करार दिया। उन्होंने कहा, “डॉ. चिदंबरम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पुरोधा थे। उनके योगदान से भारत परमाणु शक्ति बना और आत्मनिर्भरता की रणनीति को आगे बढ़ाया। उनका निधन वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
डॉ. चिदंबरम के योगदान और उपलब्धियों ने युवा वैज्ञानिकों के लिए एक मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। उनके कार्यों ने न केवल भारत को परमाणु शक्ति बनाने में मदद की, बल्कि यह भी साबित किया कि ज्ञान और विज्ञान के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। स्मार्ट सिटीज, नवीकरणीय ऊर्जा, और अन्य क्षेत्रों में भी उनके दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।
शोक का समय
इस दुखद घड़ी में, भारत का वैज्ञानिक समुदाय और डॉ. चिदंबरम के परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की जा रही हैं। उनके योगदान की स्मृति सदैव जीवित रहेगी और उनकी प्रेरणादायक जीवन यात्रा आने वाले वैज्ञानिकों के लिए एक उदाहरण बनी रहेगी। ऐसे समय में, जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी तेजी से आगे बढ़ रही है, डॉ. चिदंबरम का योगदान हमें हमारे इतिहास और संस्कृति से जोड़े रखेगा।
डॉ. चिदंबरम की विरासत
डॉ. चिदंबरम की जीवन यात्रा एक प्रेरणा है कि कैसे एक व्यक्ति अपने ज्ञान और कौशल से देश को विश्व मंच पर खड़ा कर सकता है। उनके कार्यों ने न केवल भारत को एक मजबूत वैज्ञानिक राज्य बनाया, बल्कि यह भी साबित किया कि सच्ची मेहनत और अभ्यास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।
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डॉ. चिदंबरम के योगदान को याद करते हुए, हम सभी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनकी यादों को संजोते हुए, हम एक नए युग की ओर बढ़ेंगे, जो उनके द्वारा खोले गए मार्ग पर चलेगा।

