ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का चौंकाने वाला दावा, बताया मौत से बचने का रहस्य
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में एक ऑडियो संदेश में बड़े खुलासे किए हैं। उनके अनुसार, पिछले वर्ष उनके प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उनकी और उनकी बहन शेख रेहाना की हत्या की एक गंभीर साजिश रची गई थी। शेख हसीना ने कहा कि वे केवल 20-25 मिनट के फासले पर मौत से बचने में सफल हुईं। यह मामला बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ ला रहा है, और इसे लेकर देशभर में चर्चा शुरू हो गई है।
क्या हुआ, किसने किया, कहाँ, कब और क्यों?
बांग्लादेश में पिछले साल छात्र प्रदर्शनकारियों द्वारा विवादित आरक्षण प्रणाली को समाप्त करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। इन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप 600 से अधिक लोगों की जानें गईं और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और भारत जाना पड़ा। इस संदर्भ में, शेख हसीना ने कहा कि जब वे सत्ता से बेदखल हुईं, तब उनकी हत्या की साजिश रची गई थी।
उन्होंने अपने संदेश में उल्लेख किया है कि यह घटना 5 अगस्त 2024 को हुई और इसके पीछे का कारण राजनीतिक अस्थिरता है। हसीना का कहना है कि उन्हें और उनकी बहन को अल्लाह की कृपा से बचाया गया।
कैसे बची हसीना?
बांग्लादेश की पूर्व पीएम हसीना ने कहा कि कई बार उनके खिलाफ हत्या की साजिशें रची गईं, लेकिन हर बार वे किस्मत से बच गईं। उन्होंने विशेष रूप से 21 अगस्त 2004 और कोटालीपारा बम हमले का जिक्र किया और कहा कि अल्लाह की इच्छा के कारण वे अभी तक जीवित हैं।
अल्लाह की कृपा से बची हसीना
हसीना का कहना है, “यह सब अल्लाह का हाथ है। अगर अल्लाह की इच्छा नहीं होती, तो मैं अब तक जीवित नहीं होती। मैं अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए यहां हूं।”
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं पीड़ित हूं, मैं अपने देश के बिना हूं, मेरे घर के बिना हूं और सब कुछ जला दिया गया है।”
2004 में भी हुई थी हत्या की साजिश
गौरतलब है कि शेख हसीना की सुरक्षा हमेशा कड़ी रही है क्योंकि वे कई हत्या की साजिशों से बच निकली हैं। 2004 का ढाका ग्रेनेड हमला इसके प्रमुख उदाहरणों में से एक है, जिसमें 24 लोग मारे गए थे और 500 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इस हमले के समय हसीना एक बड़े जनसमूह को संबोधित कर रही थीं और उसी समय यह हमला हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि उनकी राजनीति कितनी खतरनाक स्थिति में रही है।
कोटालीपारा बम मामला
कोटालीपारा बम मामले का जिक्र करते हुए हसीना ने बताया कि 21 जुलाई 2000 को उनके खिलाफ एक और हत्या की साजिश रची गई थी। उस दिन 76 किलोग्राम का बम बरामद किया गया था, और दो दिन बाद एक और बम बरामद किया गया था।
सुरक्षा एवं राजनीतिक हालात
शेख हसीना ने अपने संदेश में सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे हालात में बांग्लादेश के लोगों को एकजुट होकर इन चुनौतियों का सामना करना चाहिए। उनके अनुसार, वर्तमान समय में देश में असुरक्षा और हिंसा बढ़ रही है, और इसे रोकने के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा।
आगे का रास्ता
बांग्लादेश की राजनीति में उथल-पुथल के इस दौर में शेख हसीना का यह खुलासा एक महत्वपूर्ण मोड़ लाता है। इसके बाद, देश की राजनीतिक स्थिति को लेकर बहस तेज होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे देश में चुनाव नजदीक आते हैं, राजनीतिक स्थिति और भी नाजुक होती जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इस मामले को लेकर अमेरिका, भारत और अन्य देशों की भी नजर बनी हुई है। विशेष रूप से, मानवाधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर बांग्लादेश की सरकार की नीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है।
जिम्मेदारियों का निर्वहन
हसीना ने कहा कि वे अब भी अपने देश के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और अपने लोगों की भलाई के लिए संघर्ष करती रहेंगी। हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, वे अपने देश और अपने लोगों के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाते रहेंगी।
अंत में, बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना का यह खुलासा न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है और इसे लेकर आगे के घटनाक्रम पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

