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Wednesday, January 21, 2026

पाकिस्तान की नई भूमिका: क्या भारत की UNSC सदस्यता पर लगेगा अंकुश?

इंडियापाकिस्तान की नई भूमिका: क्या भारत की UNSC सदस्यता पर लगेगा अंकुश?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान का अस्थायी सदस्य बनना भारत के लिए चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चालों को आगे बढ़ाते हुए अस्थायी सदस्यता हासिल कर ली है। अब, जापान की जगह लेने के बाद, यह सवाल उठने लगा है कि क्या पाकिस्तान अब भारत की UNSC की स्थायी सदस्यता की राह में रोड़ा बनेगा। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह किसी भी नए स्थायी सदस्य का विरोध करेंगे। इस प्रकार की स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?

कौन: पाकिस्तान, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बन चुका है, जबकि इसका मुख्य प्रतिद्वंदी भारत है।

क्या: पाकिस्तान अब से दो सालों के लिए UNSC में स्थान रखता है और इसका मुख्य एजेंडा कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना होगा।

कहाँ: यह गतिविधियाँ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हो रही हैं, जो न्यूयॉर्क में स्थित है।

कब: पाकिस्तान ने बुधवार को जापान की जगह ली और इसका कार्यकाल 1 जनवरी 2025 से लेकर 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा।

क्यों: पाकिस्तान, जो कि भारतीय कश्मीर मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है, अब इस मंच का उपयोग भारत के खिलाफ अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कर सकता है।

कैसे: पाकिस्तान UNSC में जगह पाने के बाद, भारत के खिलाफ एक व्यापक अभियान चला सकता है, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव डालकर भारत की स्थायी सदस्यता को रोकने का प्रयास करेगा।

क्या पाकिस्तान करेगा भारत की राह में रोड़े अटकाने का प्रयास?

पाकिस्तान को UNSC में अस्थायी सदस्यता प्राप्त करने के बाद, यह सुनिश्चित करना होगा कि वह अपने राजनीतिक एजेंडे को प्रभावी ढंग से लागू कर सके। इसका मुख्य फोकस कश्मीर मुद्दे पर होगा, जिसके तहत वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ एक मजबूत प्रचार करेगा। इस विषय पर पाकिस्तान के राजदूत ने पहले ही कहा है कि वे कश्मीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहेंगे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर करने का प्रयास करेंगे।

इसके अलावा, पाकिस्तान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भारतीय कश्मीर मामले को अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल करेगा। इससे भारत को एक बड़ा चुनौती मिल सकती है, क्योंकि UNSC में पाकिस्तान की उपस्थिति भारत के लिए परेशानियों का कारण बन सकती है।

भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की मांग

भारत ने हमेशा UNSC में अपने लिए स्थायी सदस्यता की मांग की है। भारतीय सरकार का मानना है कि वैश्विक मुद्दों में भारत की भूमिका और जिम्मेदारी को देखते हुए उसे UNSC में स्थायी स्थान मिलना चाहिए। भारत का मानना है कि UNSC में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने की आवश्यकता है, ताकि वह और अन्य देशों का प्रतिनिधित्व किया जा सके।

हालांकि, भारत को इस प्रक्रिया में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, खासकर पाकिस्तान के कारण। पाकिस्तान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी नए स्थायी सदस्य के खिलाफ होगा और इसके बजाय अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की बात करेगा। ऐसे में, भारत को अपनी कूटनीतिक नीतियों को और मजबूत करना होगा।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता

भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की मांग को लेकर प्रमुख शक्तियां जैसे अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस भी समर्थन कर रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान के UNSC में अस्थायी सदस्य बनने के बाद इन्हें और भी सक्रियता से काम करना होगा। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह अपने दोस्तों की मदद से UNSC में एक स्थायी स्थान हासिल कर सके।

क्या भारत अपनी स्थिति को मजबूती से पेश कर सकेगा?

भारत की स्थिति को देखते हुए उसके पास UNSC में स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त कारण हैं। भारत का वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ता प्रभाव और सक्रियता, उसे एक वैध दावेदार बनाती है। हालाँकि, पाकिस्तान की कूटनीतिक चालें इसे जटिल बना सकती हैं।

भारत को UNSC में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एक ठोस रणनीति बनानी होगी। केवल कूटनीति के माध्यम से ही वह अपनी स्थिति को और मजबूती दे सकता है।

समर्थन और सहयोग की आवश्यकता

भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत बनाए रखे। इसके साथ ही, पाकिस्तान की साजिशों का मुकाबला करने के लिए भारत को एक स्थिर और स्पष्ट रणनीति की आवश्यकता होगी।

पाकिस्तान की UNSC में उपस्थिति भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती साबित हो सकती है। इसे देखते हुए, भारत को अपने कूटनीतिक प्रयासों को तेज करना होगा।

पाकिस्तान की नई भूमिका और भारत की स्थायी सदस्यता की मांग के बीच का यह संघर्ष आगे चलकर कई दिलचस्प मोड़ ले सकता है।

(As per the report by[BBC](https://www.bbc.com/news/world-asia-62959744), UNSC में पाकिस्तान की सदस्यता से भारत को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।)

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