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Thursday, January 22, 2026

दिल्ली विधानसभा चुनाव: ‘यदि साथ मिलकर लड़ते तो ‘इंडिया’ की जीत सुनिश्चित होती’, पृथ्वीराज चव्हाण का बयान

इंडियादिल्ली विधानसभा चुनाव: 'यदि साथ मिलकर लड़ते तो 'इंडिया' की जीत सुनिश्चित होती', पृथ्वीराज चव्हाण का बयान

नई दिल्ली: दिल्ली में चुनावी माहौल गरम, चव्हाण ने दी सफाई

दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो गई हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता, पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि यदि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ एकजुट होकर चुनाव लड़ता, तो निश्चित तौर पर जीत की संभावनाएँ अधिक होतीं। चव्हाण ने यह टिप्पणी उस समय की जब आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की जीत की संभावना पर सवाल उठाए गए थे।

चव्हाण ने कहा, “दिल्ली विधानसभा चुनाव पर मेरी यह टिप्पणी गलत संदर्भ में ली गई है। यदि ‘इंडिया’ एकजुटता से लड़ता तो हमारी जीत पक्की थी। अब जब सभी प्रमुख पार्टियां खुद मैदान में हैं, तो यह चुनाव खुला है।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने हाल ही में वार्ता और सत्ता में आने के लिए जबरदस्त गति पकड़ी है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं दिल्ली के चुनाव? जानिए पूरा सच

दिल्ली विधानसभा चुनावों के इस माहौल में, संजय राउत, शिवसेना यूबीटी सांसद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कई दलों के लिए यह तय करना आसान नहीं है कि किसका समर्थन करें। उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी, जो दिल्ली में एक प्रमुख पार्टी है, के पास बहुत ताकत है। मुझे दुख है कि हमारे जैसे दलों को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।”

दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान 5 फरवरी 2025 को होगा और मतगणना 8 फरवरी को की जाएगी। चुनाव की अधिसूचना 10 जनवरी को जारी की जाएगी, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 17 जनवरी होगी। यह चुनाव दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर होगा।

आखिर ‘इंडिया’ गठबंधन क्या है?

‘इंडिया’ गठबंधन में विभिन्न विपक्षी दल शामिल हैं, जो एकजुट होकर सत्ताधारी दलों के खिलाफ चुनाव लडने का इरादा रखते हैं। इस गठबंधन के माध्यम से वे साझा मंच पर चुनावी रणनीतियाँ तैयार कर रहे हैं। चव्हाण ने अपने बयान में यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जो काम किए हैं, वे सराहनीय हैं और चुनावों में उनकी जीत होनी चाहिए।

दिल्ली के चुनावों में इस बार युवा मतदाताओं की संख्या भी महत्वपूर्ण होगी। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार लगभग दो लाख युवा 18 से 19 वर्ष के मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। कुल मतदाता संख्या 1,55,24,858 है जिसमें पुरुष मतदाता 85,49,645, महिलाएं 71,73,952 और थर्ड जेंडर के 1,261 मतदाता शामिल हैं।

किस प्रकार के मुद्दे चुनाव में होंगे गर्म?

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुद्दों की कोई कमी नहीं होगी। आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए विकास कार्य, कांग्रेस की वापसी के प्रयास, और मौजूदा सरकार के खिलाफ विपक्ष के आरोप, ये सभी मुद्दे बहस का कारण बन सकते हैं। संजय राउत ने इस बात पर भी जोर दिया कि कई कार्यकर्ताओं पर चुनाव लड़ने का दबाव है, खासकर स्थानीय निकाय चुनावों में।

चुनाव आयोग ने हाल ही में एक महीने में नए मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी की जानकारी भी दी है। 1,67,329 नए मतदाता पिछले महीने में जुड़े हैं। यह जानकारी यह दर्शाती है कि युवा मतदाताओं का सक्षम और सक्रिय होना कितना महत्वपूर्ण हो गया है।

आगे की राह: दिल्ली की सियासत में क्या होगा?

ताज़ा घटनाक्रम के अनुसार, पृथ्वीराज चव्हाण की टिप्पणियों ने राजनीतिक संवाद को और भी गर्म कर दिया है। उन्हें अपनी बात स्पष्ट करने के लिए आगे आना पड़ा, जिससे यह पता चलता है कि विपक्ष की एकजुटता के बारे में चिंता अभी भी बनी हुई है।

भारत की राजनीति में इस समय जो बदलाव देखने को मिल रहे हैं, उनमें निश्चित तौर पर दिल्ली विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण बिंदु होंगे।

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