सात अक्तूबर 2023 से जारी इस्राइल और हमास के बीच की लड़ाई के परिणामस्वरूप सैकड़ों निर्दोष लोगों की जानें गई हैं। बहुत से लोग घायल हुए हैं और कुछ बंधक बने हुए हैं। इस दुखद स्थिति को समाप्त करने के लिए इस्राइल और हमास ने एक युद्ध विराम समझौते पर सहमति जताई है। यह समझौता तीन चरणों में लागू किया जाएगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह समझौता कैसे और क्यों हुआ है।
समझौते की जानकारी: किन शर्तों पर होगी सहमति?
इस्राइल और हमास के बीच युद्ध विराम समझौते की पहल अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से हुई है। इस समझौते के तहत बंधकों की रिहाई और गाजा से इस्राइली सेना की वापसी शामिल होगी। इस समझौते का मकसद गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त करना और वहाँ की स्थिति को सामान्य करना है। युद्ध विराम के इस समझौते के अंतर्गत, तीन प्रमुख चरणों में कार्यवाही की जाएगी।
Who: इस समझौते में इस्राइल, हमास, अमेरिका और कतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
What: समझौता बंधकों की रिहाई और सैन्य वापसी पर आधारित है।
Where: यह समझौता गाजा पट्टी पर लागू होगा, जहां संघर्ष चल रहा है।
When: यह समझौता हाल ही में 15 जनवरी 2025 को किया गया है।
Why: गाजा में बढ़ते मानव संकट और बंधकों के मामले के कारण यह समझौता आवश्यक हो गया था।
How: समझौता तीन चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में बंधकों की रिहाई और दूसरे में सैन्य वापसी शामिल होगी।
क्यों हुआ यह समझौता?
गाजा में पिछले कुछ महीनों से हो रहे संघर्ष ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इस जंग में सैकड़ों इस्राइली और फलस्तीनी नागरिकों की जानें गई हैं। विशेषकर, सात अक्तूबर को हमास द्वारा किए गए हमले ने इसे और गंभीर बना दिया। इस हमले में 1200 इस्राइली नागरिकों की हत्या हुई थी। इसके बाद इस्राइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गाजा पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए थे। इन हमलों ने गाजा की स्थिति को बेहद खराब कर दिया, जहां आज भी लाखों लोग तंबू में जीवन यापन कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए, गाजा में लगभग 23 लाख की आबादी का 90 फीसदी भाग विस्थापित हो गया है। लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं और बुनियादी आवश्यकताओं की कमी हो रही है। इस परिस्थिति को देखकर कतर और अमेरिका ने बातचीत की पहल की।
समझौते की शर्तें
समझौते के अनुसार, पहले चरण में बंधकों की रिहाई होगी। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक टाइमलाइन निर्धारित की गई है। इसके बाद, दूसरे चरण में इस्राइली सेना की गाजा से वापसी होगी। तीसरे चरण में, इस्राइल और हमास के बीच राजनीतिक वार्ता होगी, जिसमें दीर्घकालिक शांति के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
गौर करने वाली बात यह है कि इस समझौते का उद्देश्य केवल अस्थायी शांति स्थापित करना नहीं है, बल्कि इसे स्थायी शांति की ओर ले जाना है। हाल ही में अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस महत्व को समझते हुए हमास को बंधकों को जल्द ही रिहा करने के लिए कहा है, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
As per the report by अमर उजाला, अमेरिका और कतर, दोनों ही इस वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं और इनकी मदद से ही यह समझौता संभव हो पाया है।
भविष्य की राह क्या है?
यह समझौता अगर सफल होता है, तो यह न केवल गाजा में शांति स्थापित करने में मदद करेगा, बल्कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के नए दरवाजे खोल सकता है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण होगा कि दोनों ही पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाएं।
इस समझौते के कार्यान्वयन के साथ, दुनिया की नजरें गाजा पर बनी रहेंगी। पूरी उम्मीद है कि इस समझौते से क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
इस समझौते के परिणामस्वरूप गाजा में लोगों की जीवनशैली में सुधार आ सकता है और भविष्य में हो सकने वाले संघर्षों को भी टाला जा सकता है। हालांकि, यह सब किस हद तक सच साबित होगा, यह तो समय ही बताएगा।
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