कंधार विमान अपहरण के नायक कैप्टन देवी शरण का शानदार करियर समाप्त, एअर इंडिया ने दी भावभीनी विदाई
साल 1999 में भारतीय नागरिकता के इतिहास में एक काला दिन था जब इंडियन एयरलाइंस का विमान IC814 अपहरण का शिकार हुआ। इस विमान के कैप्टन देवी शरण थे, जिन्होंने इस संकट के दौरान अद्वितीय साहस का परिचय दिया। 4 जनवरी, 2025 को उन्होंने अपने 40 साल के अद्वितीय करियर का समापन किया। एअर इंडिया ने उन्हें एक भव्य विदाई दी, जिसमें उनके द्वारा संचालित आखिरी उड़ान मेलबर्न से दिल्ली तक थी।
कंधार में अपहृत किए गए इस विमान में पांच आतंकवादी थे, जिन्होंने काठमांडू से उड़ान भरने के केवल 40 मिनट बाद विमान पर हमला किया। कैप्टन देवी शरण ने उस समय जो साहस दिखाया, वह आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने अपने और अपने क्रू के साथ मिलकर इतनी चुनौतीपूर्ण स्थिति में यात्रियों की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया।
असली नायक की कहानी
कैप्टन देवी शरण ने अपने करियर की शुरुआत 1985 में इंडियन एयरलाइंस के साथ की थी। 40 सालों में उन्होंने कई प्रकार के विमान उड़ाए और उन्हें कॉकपिट में बिताए गए अनुभवों ने न केवल उन्हें एक सक्षम पायलट बनाया, बल्कि उन्हें एक नेता भी बनाया। उनका जीवन एक किताब की तरह है, जिसमें साहस, चुनौती और विजयी क्षण शामिल हैं।
अपहरण की घटना के दौरान उन्होंने कहा, “यह मेरी जिंदगी के सबसे कठिन दिन थे, लेकिन मेरा एकमात्र उद्देश्य विमान में सवार सभी लोगों की जान बचाना था।” उनकी यह सोच न केवल उन्हें बल्कि उनके समर्पित क्रू को भी प्रेरित किया, जिन्होंने इन संकटपूर्ण समय में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
खास विदाई समारोह
4 जनवरी को उनके अंतिम उड़ान के बाद, एअर इंडिया ने एक विशेष समारोह का आयोजन किया। इस दौरान उनके सहकर्मियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। एयर इंडिया ने अपने इंस्टाग्राम पर एक विशेष वीडियो साझा किया जिसमें लिखा गया, “आसमान झुकता है, रनवे सलाम करता है – इतिहास में अंकित नाम, साहस से लिखी गई विरासत।” यह शब्द उनके अद्वितीय करियर और योगदान को सार्थक बनाते हैं।
यात्रियों और सहकर्मियों द्वारा दी गई इस विदाई ने उन्हें बहुत भावुक कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं अपने सभी सहकर्मियों और यात्रियों का दिल से धन्यवाद करता हूं। यह मेरे लिए एक अद्वितीय यात्रा रही है।”
समाज पर उनका प्रभाव
कैप्टन देवी शरण का करियर न केवल उड़ान भरने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने कई लोगों को प्रेरित किया है, खासकर युवाओं को जो विमानन क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, साहस और समर्पण से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
उनकी विदाई के बाद, बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर उनके योगदान को सराहा और उनकी कड़ी मेहनत के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कई युवा पायलट्स के लिए एक आदर्श स्थापित किया है।
निष्कर्ष
कंधार विमान अपहरण के दौरान कैप्टन देवी शरण की वीरता और साहस से भरी कहानी आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। उनका यह मानना कि “जीवन बहुत अप्रत्याशित है” आज की दुनिया में भी उतना ही प्रासंगिक है। 40 वर्षों की सेवा के बाद उनका सेवानिवृत्त होना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी विरासत सदैव जीवित रहेगी।

