नई दिल्ली – नए आंकड़ों के बाद भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2025 के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमानों में कटौती की है। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 25 के लिए भारत की प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी में लगभग 35,000 रुपये की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 23 की तुलना में उल्लेखनीय है। हालांकि, एनएसओ द्वारा दिए गए 6.4 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर के मुकाबले, एसबीआई ने इसे 6.3 प्रतिशत आँका है।
एनएसओ के आंकड़ों का प्रभाव
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि की उम्मीद 6.4 प्रतिशत है। इस वृद्धि में निजी खपत का महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है, जो आर्थिक विकास का एक प्रमुख चालक बनकर उभरा है। एसबीआई के अनुसार, निर्यात एवं विनिर्माण क्षेत्र में मंदी के चलते वृद्धि दर में कमी आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बचत की दर में गिरावट आई है जिससे उपभोक्ता खर्च पर प्रभाव पड़ा है।
भारत का आर्थिक परिदृश्य
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी बढ़कर लगभग 35,000 रुपये के आस-पास पहुँच जाएगी। हालांकि, यह आर्थिक विकास के व्यापक मोर्चे पर एक सकारात्मक संकेत की तरह साबित हो सकता है। एसबीआई के अनुसार, यदि नॉमिनल जीडीपी में वृद्धि हो रही है, तो यह उपभोक्ता खर्च के बढ़ने का संकेत हो सकता है, जो कि एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था का संकेत माना जाता है।
चुनौतियाँ और संभावनाएँ
हालाँकि, रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विनिर्माण और ऋण वृद्धि में मंदी का असर जीडीपी वृद्धि पर पड़ा है। यह ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक आर्थिक माहौल भी अनिश्चितता में है। एसबीआई कहते हैं कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भविष्य में आर्थिक विकास चुनौतियों का सामना कर सकता है।
खपत और बचत का संबंध
रिपोर्ट में बताया गया है कि निजी खपत में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो उपभोक्ता खर्च में सुधार को दर्शाती है। दिलचस्प बात यह है कि प्रति व्यक्ति निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) की यह वृद्धि प्रति व्यक्ति जीडीपी की वृद्धि को पार कर गई है। यह दर्शाता है कि परिवारों ने अपनी बचत को कम करके और अधिक ख़र्च किया है, जिससे उपभोक्ता खर्च में इजाफा हुआ है।
निष्कर्ष
इस रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक विकास की कहानी अब निजी खपत और प्रति व्यक्ति आय जैसे व्यक्तिगत आर्थिक संकेतकों पर अधिक केंद्रित हो गई है। भविष्य के लिए इस प्रवृत्ति की दिशा महत्वपूर्ण होगी, खासकर यदि बचत की दर में कमी जारी रहती है।
अधिकारिक स्रोतों से जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आर्थिक प्रक्षेपवक्र में निजी खपत के उच्च स्तर को देखना महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि बचत की कमी आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा हो सकती है।
यदि आप इस विषय में अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आप अमर उजाला और फाइनेंशियल एक्सप्रेस को देख सकते हैं।
इस प्रकार, एसबीआई की रिपोर्ट न केवल देश की आर्थिक स्थिति को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आने वाले समय में हमें किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

