केंद्र सरकार ने मिजोरम और म्यांमार के बीच सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करने का निर्णय लिया है। मणिपुर में चल रही हिंसा के मद्देनजर इस कदम को उठाया गया है। मिजोरम और म्यांमार के बीच 510 किलोमीटर लंबी सीमा के तहत लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, बिना बाड़ वाली इस अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को अब बॉर्डर पास आवश्यक होगा।
कौन: मिजोरम राज्य के निवासी और म्यांमार के नागरिक
क्या: मिजोरम-म्यांमार सीमा पर बॉर्डर पास की आवश्यकता
कहाँ: मिजोरम और म्यांमार की सीमा
कब: 31 दिसंबर से लागू
क्यों: अवैध घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए
कैसे: पास प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के जरिए
मिजोरम के छह जिलों – चम्फाई, सियाहा, लॉन्ग्टलाई, हनाहथियाल, सैतुअल और सेरछिप की सीमा म्यांमार के चिन स्टेट से जुड़ी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अवैध गतिविधियों को रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
बॉर्डर पास की प्रक्रिया में क्या शामिल है?
बॉर्डर पास प्राप्त करने के लिए:
1. आवेदक को यह प्रमाणित करना होगा कि वह सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में रहता है।
2. पहचान पत्र या दस्तावेज स्थानीय पुलिस स्टेशन या गांव के मुखिया द्वारा जारी किया जा सकता है।
3. पास केवल वयस्कों को जारी किया जाएगा, जबकि नाबालिग बच्चों को माता-पिता के साथ जाने की अनुमति होगी।
मिजोरम और म्यांमार के बीच की यह नई व्यवस्था अलग-अलग समुदायों के बीच पारिवारिक और व्यावसायिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। मिजोरम से म्यांमार की सीमा पर रहने वाले लोग आमतौर पर एक-दूसरे के देश में व्यापार करने और अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए आवागमन करते हैं।
दिशा-निर्देशों में उल्लिखित मुख्य बिंदु:
– बॉर्डर पास केवल सात दिनों के लिए वैध होगा और इसे धारक को उसी क्रॉसिंग पॉइंट पर वापस लौटाना होगा जहां से इसे जारी किया गया था।
– असम राइफल्स द्वारा जारी किए गए बॉर्डर पास के लिए आवेदक को किन्हीं स्वास्थ्य जांचों से गुजरना पड़ेगा।
– आवेदन प्रक्रिया में बायोमेट्रिक पहचान और क्यूआर कोड जारी किया जाएगा।
केंद्र सरकार का यह कदम सीमावर्ती इलाकों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच उठाया गया है। मिजोरम के नागरिकों और म्यांमार के नागरिकों को एक-दूसरे के देश में जाने के लिए पास की ज़रूरत होगी जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।
महत्वपूर्ण जानकारी: इस नई नीति से जुड़े सभी नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार, नागरिकों को नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा वरना उन्हें दंड का सामना करना पड़ सकता है।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना: ‘यह निर्णय असम राइफल्स और स्थानीय पुलिस द्वारा की जाने वाली सुरक्षा जांच को सुदृढ़ करेगा और अवैध घुसपैठ की घटनाओं को कम करेगा।’
आपको बता दें कि मिजोरम और म्यांमार की सीमा पर यह बदलाव भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए किया गया है। केंद्र सरकार ने पहले भी इस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए हैं, और इस बार भी स्थिति को बेहतर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
सीमाओं पर ध्यान दें: मिजोरम की स्वतंत्रता संग्राम और विभिन्न जनजातियों की पहचान के चलते इस क्षेत्र में हमेशा से आवाजाही का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। लेकिन अब सुरक्षित धारा को बनाए रखने के लिए बॉर्डर पास की व्यवस्था की जा रही है।

