सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन ने भारतीय राष्ट्रपति और पीएम मोदी से की मुलाकात; रिश्तों को लेकर जताई असीमित संभावनाएं
सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम ने हाल ही में भारत की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह दौरा भारत और सिंगापुर के बीच कूटनीतिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हो रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और भी मजबूत करना है, जो विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्पेक्ट्रम में फैला हुआ है।
कौन: सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम
क्या: भारत में आधिकारिक दौरा और मुलाकातें
कहाँ: नई दिल्ली, राष्ट्रपति भवन
कब: 16 जनवरी 2025
क्यों: भारत और सिंगापुर के संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाने के लिए
कैसे: विभिन्न पहलुओं पर सहयोग बढ़ाने के लिए बातचीत
इस अवसर पर थर्मन शनमुगरत्नम ने कहा, “हम यह कभी नहीं भूलेंगे कि भारत 1965 में सिंगापुर की स्वतंत्रता को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था। उस समय से हमारा रिश्ता निरंतर बढ़ता गया है। हमारे बीच का संबंध एक छोटे देश और एक बड़े देश के बीच स्वाभाविक साझेदारी के रूप में उभरा है।”
थर्मन ने कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच व्यापारिक संबंध फल-फूल रहे हैं। “सिंगापुर कई वर्षों से भारत में सबसे बड़ा निवेशक रहा है, और हमारे रक्षा एवं कौशल विकास संबंध भी मजबूत हो रहे हैं,” उन्होंने आगे कहा।
सिंगापुर-भारत संबंधों की नई दिशा
सिंगापुर के राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच एक नई दिशा की खोज करने की आवश्यकता है। “हम गिफ्ट सिटी और सिंगापुर के बीच डेटा कॉरिडोर स्थापित करने के संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं, ताकि हमारे वित्तीय संस्थान सुरक्षित रूप से आंकड़ों का आदान-प्रदान कर सकें,” थर्मन ने बताया।
उन्होंने यह भी कहा, “हम नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक गलियारे की तलाश कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को और बढ़ाएगा।” इस संबंध में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की पिछले वर्ष सिंगापुर यात्रा के दौरान की गई चर्चा का विशेष उल्लेख किया गया।
पूर्वी राज्यों पर विशेष ध्यान
थर्मन ने यह भी कहा कि वे भारत के पूर्वी राज्यों को लेकर आशान्वित हैं। “हम असम में कुछ परियोजनाएं शुरू कर रहे हैं और ओडिशा की ओर भी बढ़ना चाहते हैं। ओडिशा की विकास संभावनाएं बहुत बड़ी हैं और इसे भारत की योजनाओं में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।”
यह स्पष्ट है कि सिंगापुर के राष्ट्रपति का यह दौरा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संबंधों को एक नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत-सिंगापुर संबंधों का महत्व
भारत और सिंगापुर के संबंध अनेक पहलों में विस्तारित हैं, जिसमें व्यापार, रक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं। व्यापार संबंधों को बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
पूर्वी एशिया में सिंगापुर की भौगोलिक स्थिति इसे एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साथी बनाती है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सिंगापुर एक प्रमुख निवेशक के रूप में उभरा है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूती देने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
भारत और सिंगापुर के बीच रिश्ते न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग और समझौतों का यह प्रवाह भविष्य में और बढ़ सकता है।
इस यात्रा से भारत-सिंगापुर संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है और आने वाले समय में इन संबंधों के विस्तार की संभावना को भी बल मिला है। सिंगापुर के राष्ट्रपति की यह यात्रा निश्चित रूप से दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

