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Wednesday, January 21, 2026

भारतीय बाजार में FPI की महज तीन दिन में ₹4285 करोड़ की निकासी, जानें इसके कारण और समाधान

अर्थव्यवस्थाभारतीय बाजार में FPI की महज तीन दिन में ₹4285 करोड़ की निकासी, जानें इसके कारण और समाधान

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की हाल की गतिविधियाँ भारतीय इक्विटी बाजार पर भारी पड़ रही हैं। नए साल की शुरुआत में ही एफपीआई ने 2025 के पहले तीन कारोबारी सत्रों में 4,285 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है। क्या है इसके पीछे की कहानी और इसके लिए क्या समाधान हो सकते हैं? आइए विस्तार से जानें।

एफपीआई की शुद्ध बिकवाली और उसके पीछे के कारण

नेशनल सेक्यूरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 2025 की शुरुआत में सबसे पहले दिन ही 5,351 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इस तरह के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में निवेश करने को लेकर संकोच कर रहे हैं। 2024 के समापन के समय, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 15,446 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी, लेकिन अब हालात ने एक नया मोड़ ले लिया है।

इस स्थिति का मुख्य कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन है, जो भारतीय बाजार में नरमी का कारण बन रहा है। इसके अलावा, भारतीय शेयरों के उच्च मूल्यांकन और घरेलू आर्थिक चुनौतियां भी इस बिकवाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

FPI ने निकाले ₹4285 करोड़, जानें इसके पीछे की वजहें

पूरे 2024 के दौरान जहां एफपीआई का निवेश सकारात्मक रहा, वहीं अब जनवरी 2025 की शुरुआत में शुद्ध बिकवाली के पीछे कई कारण हैं। निवेशक वर्तमान में विश्व आर्थिक स्थिति और घरेलू स्थिति को ध्यान में रखकर अपने निवेश को पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। साथ ही, भारतीय आर्थिक वृद्धि दर में सुस्ती और उद्योग के उत्पादन में कमी भी चिंता का विषय है।

साल की शुरुआत में इस बिकवाली ने निवेशकों के बीच संकोच का माहौल बना दिया है, जो आगे चलकर बाजार में उतार-चढ़ाव को जन्म दे सकता है।

विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटाने के लिए क्या कदम उठाए जाएं?

विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटाने के लिए जरूरी है कि भारत को समय पर वैश्विक और घरेलू चुनौतियों का समाधान निकालना होगा। इसमें सरकार की आर्थिक नीतियों में सुधार, निवेश के वातावरण को बेहतर बनाना और बाजार में स्थिरता लाना शामिल है।

इसके अलावा, कंपनियों की आय और उत्पादन में सुधार के लिए भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यह भी देखा गया है कि जब तक निवेशकों को नहीं लगता कि भारतीय बाजार में आर्थिक सुधार हो रहा है, तब तक वे अपने निवेश को लेकर अनिश्चितता का अनुभव करते रहेंगे।

भविष्य की संभावना

अगर हम पिछले कुछ महीनों की स्थिति पर ध्यान दें, तो यह स्पष्ट है कि भारतीय बाजार में एफपीआई का निवेश समय-समय पर बदलाव करता रहता है। इस तरह की बिकवाली में केवल मौजूदा आर्थिक मुद्दे ही नहीं बल्कि वैश्विक परिस्थितियां भी कारक होती हैं।

उदाहरण के लिए, अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि और वैश्विक आर्थिक मंदी जैसी समस्याएं भारतीय बाजार में निवेशकों की मानसिकता को प्रभावित करने का काम करती हैं।

चुनौतियाँ और प्रतिक्रियाएँ

एफपीआई की गतिविधियाँ भारतीय बाजार की स्थिरता के लिए एक चुनौती बनती जा रही हैं। इस प्रकार की बिकवाली के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहती है, जिससे निवेशकों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न होती है।

इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए भारतीय सरकार और वित्तीय संस्थाओं को एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। सही नीतियों के ज़रिए बाजार को स्थिर बनाए रखना और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना महत्वपूर्ण है।

अंतिम विचार

अंततः, एफपीआई की बिकवाली निश्चित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संकेत है कि हमें घरेलू व वैश्विक चुनौतियों का सामना करना होगा। निवेशकों का भरोसा लौटाना सिर्फ आर्थिक नीतियों में सुधार करके ही संभव है।

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