आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुए अत्याचार और हत्या के मामले में बहुप्रतीक्षित फैसला कल (18 जनवरी 2025) को सुनाया जाएगा। यह मामला न केवल कोलकाता, बल्कि पूरे देश में गुस्से और नाराजगी का कारण बना है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई 9 जनवरी 2025 को पूरी की थी, और अब सभी की नजरें शनिवार को होने वाले फैसले पर लगी हुई हैं।
कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे
कौन? यह मामला एक महिला डॉक्टर के साथ जुड़े हुए हैं, जो आरजी कर अस्पताल में तैनात थीं। उनके ऊपर मौजूद कर्मचारी संजय रॉय को आरोपी बनाया गया है।
क्या? संजय रॉय पर आरोप है कि उसने 9 अगस्त 2024 को महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म किया और उसके बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।
कहाँ? यह घटना कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में घटी, जहाँ डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर तैनात थीं।
कब? घटना 9 अगस्त 2024 को हुई थी, जिसके बाद आरोपी को 10 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया।
क्यों? यह मामला सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जघन्य अपराध चिकित्सा समुदाय में डर और तनाव का कारण बन गया है।
कैसे? शुरुआत में इस मामले की जांच कोलकाता पुलिस द्वारा की गई, लेकिन बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर इसे सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने इस जघन्य अपराध के लिए आरोपी संजय रॉय के लिए मृत्यु दंड की मांग की है।
विशेष सुनवाई एवं गवाहों की पूछताछ
इस मामले में सुनवाई 12 नवंबर 2024 को शुरू हुई, जिसमें 50 से अधिक गवाहों से पूछताछ की गई। पीड़िता के परिवार ने अन्य संभावित अपराधियों के शामिल होने का शक जताया है। अदालत में उनके द्वारा की गई मांग है कि इस मामले की और विस्तृत जांच की जाए।
इस बीच, आरजी कर अस्पताल की घटना ने पूरे देश में गुस्से का सैलाब पैदा किया है। विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन, रैलियां और मार्च आयोजित किए गए हैं। इस मुद्दे पर कई राजनीतिक दलों ने भी अपनी आवाज उठाई है। भाजपा और माकपा जैसे विपक्षी दलों ने टीएमसी सरकार को घेरने की कोशिश की है।
सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
आरजी कर अस्पताल में हुई घटना को देखते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पूरे देश में डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश देने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स (एनटीएफ) का गठन किया था। एनटीएफ ने नवंबर 2024 में अदालत में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रोटोकॉल सुझाए गए थे।
समाज में जागरूकता
इस मामले ने न केवल चिकित्सा समुदाय को बल्कि सभी नागरिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कैसे हम अपनी सुरक्षितता को बढ़ा सकते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस तरह के जघन्य अपराधों के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाना कितना आवश्यक है। इस मामले के समर्थन में कई गैर-राजनीतिक संगठनों ने भी खुलेआम प्रदर्शन किए हैं।
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हुई घटना ने समस्त देश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला केवल एक महिला डॉक्टर की सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण लड़ाई का प्रतीक है। अदालत का आगामी निर्णय न केवल पीड़िता के परिवार के लिए न्याय की उम्मीद है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए यह संदेश भी देगा कि ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
आप इस मुद्दे पर और अधिक जानकारी के लिए[BBC News](https://www.bbc.com/news) और[The Times of India](https://timesofindia.indiatimes.com/) पर भी जा सकते हैं।

