गुरुवार को संसद भवन परिसर में हुई धक्कामुक्की की घटना ने भारतीय राजनीति में तूफान मचा दिया है। भाजपा के सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज दोनों सांसदों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। यह घटना तब हुई जब कांग्रेस ने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के प्रति अपने विरोध का इजहार करने के लिए मार्च निकाला था।
कहाँ और कब हुआ यह विवाद?
19 दिसंबर 2024 को संसद भवन परिसर में जब कांग्रेस के नेता ने अपनी आवाज उठाई, तब भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों के बीच मकर द्वार पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सांसद प्रताप सारंगी के सिर में गंभीर चोट आई थी, जबकि सांसद मुकेश राजपूत बेहोश हो गए थे।
क्यों हुआ यह विवाद?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आंबेडकर को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। इसका उत्तर देने के लिए भाजपा ने भी अपने सांसदों को विरोध करने के लिए भेजा। इससे स्थिति बिगड़ गई और सांसदों के बीच धक्कामुक्की हो गई।
कैसे हुआ यह हादसा?
प्रताप सारंगी ने आपबीती सुनाते हुए बताया, “जब राहुल गांधी ने एक सांसद को धक्का दिया, वह मेरे पास आकर गिरे और मैं इससे बच नहीं पाया। मैं सीढ़ियों के पास खड़ा था।” वहीं, राहुल गांधी ने बयान दिया कि यह उनकी गलती नहीं थी और भाजपा सांसदों ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की थी।
क्या कहा राहुल गांधी ने?
राहुल गांधी ने घटना के संबंध में कहा, “भाजपा सांसद हमें अंदर जाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी को भी धक्का दिया गया था। लेकिन यह धक्कामुक्की हमें रोक नहीं सकती। हमें संविधान का सम्मान करना चाहिए।”
अस्पताल से मिली छुट्टी और आगे की स्थिति
दोनों सांसदों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, प्रताप सारंगी ने अपने स्वास्थ्य को ठीक बताते हुए कहा कि वे जल्द ही फिर से संसद में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। इस घटना ने भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ दिया है और सभी दलों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि ऐसी हालात को कैसे संभाला जाए।
आगे की दिशा
यह घटना न केवल सदन की गरिमा को प्रभावित करती है, बल्कि राजनीतिक माहौल में भी तनाव बढ़ाती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाएं जारी रहीं, तो राजनीतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सांसदों को चाहिए कि वे संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास करें।
सभी को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी धक्कामुक्की की घटनाएं नहीं होंगी। सरकार और विपक्ष दोनों को मिलकर काम करना होगा, ताकि संसद का कार्य सुचारू रूप से चल सके। इस घटना ने हमें एक सबक दिया है कि संसद का स्थान जनहित में विचार-विमर्श और संवाद का होना चाहिए, ना कि विवाद का।
यह घटना भारतीय राजनीति की एक नई दिशा दिखाती है, जहाँ सांसदों को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए काम करना होगा।

