हर साल बॉलीवुड में नई-नई फिल्में बनाने की घोषणा होती है। ये फिल्में शानदार कहानियों और स्टार कास्ट के साथ आती हैं। लेकिन कुछ ऐसी फिल्में भी हैं जिनका एलान किया गया, पोस्टर रिलीज किए गए, और यहां तक कि शूटिंग भी शुरू हो गई, फिर भी ये फिल्में दर्शकों तक नहीं पहुंच सकीं। क्यों? आइए जानते हैं।
कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों और कैसे?
बॉलीवुड की ठंडी बस्ते में पड़ी फिल्मों की चर्चा करें तो हमें कई नाम सुनने को मिलते हैं। इनमें से कुछ अनाउंसमेंट के बाद कभी भी फाइनल रिलीज तक नहीं जा सकीं। इनमें से कई फिल्में तो ऐसे पलों में अटक गईं जब उनकी शूटिंग चल रही थी, जैसे कि अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की फिल्म देवा(1987) जो सुभाष घई द्वारा निर्देशित की जा रही थी। इसके अलावा, आमिर खान की फिल्म टाइम मशीन (1992) भी इसी श्रेणी में आती है। यह फिल्म शेखर कपूर द्वारा निर्देशित थी और इसकी शूटिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा हो चुका था, लेकिन आर्थिक दिक्कतों के चलते यह फिल्म अधूरी रह गई।
क्या होता है जब फिल्में ठंडे बस्ते में चली जाती हैं?
इन फिल्मों के पीछे जो मुख्य कारण होते हैं, उनमें सबसे प्रमुख आर्थिक समस्याएं, क्रिएटिव असहमति और कभी-कभी कलाकारों के व्यक्तिगत मुद्दे शामिल होते हैं। देवा फिल्म की शूटिंग भी रचनात्मक असहमति के चलते रोक दी गई थी। वहीं, परिणाम(1993) फिल्म में दिव्या भारती के आकस्मिक निधन के कारण इसे अधूरा छोड़ना पड़ा जो बॉलीवुड के इतिहास का एक दर्दनाक पहलू है।
इसी तरह, शूबाइट(2007) फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी थी, किंतु अधिकारों के मुद्दे पर कानूनी लड़ाई के चलते यह रिलीज नहीं हो सकी। फिल्म के निर्माता शूजीत सरकार ने इसके बारे में हाल ही में बताया था कि वे इस फिल्म को रिलीज करने की कोशिश कर रहे हैं।
ये फिल्में कब और कहाँ अटकीं?
फिल्में विभिन्न कारणों से अटकी हैं। आमिर खान की टाइम मशीन की बात करें तो, इसका निर्माण 1992 में भारत में होना था। इस फिल्म के लिए काफी तैयारी की गई थी, लेकिन बजट की कमी ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
इसी तरह, शूबाइट को लेकर कई बार कोशिशें की गईं, लेकिन कानूनी पेचीदगियों के कारण रिलीज नहीं हो सकी। यह फिल्म अब भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या ये फिल्में कभी रिलीज होंगी?
यह प्रश्न अब भी अनुत्तरित है कि क्या ये फिल्में कभी रिलीज होंगी। हाल ही में, अमिताभ बच्चन ने भी इस पर एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने फिल्म को रिलीज करने का अनुरोध किया था। मोजेज सपीर, जो कि इस्राइल के एक कमांडो हैं, ने भी इस फिल्म की रिलीज के लिए सोशल मीडिया पर अपनी मांग रखी थी।
इससे पता चलता है कि केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को भी इन फिल्मों का इंतजार है।
समाज में फिल्म निर्माण की स्थिति
अगर हम समाज की दृष्टि से देखें तो इन ठंडी बस्ते में पड़ी फिल्मों का मुद्दा केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि बॉलीवुड में फिल्म निर्माण के पीछे कितने सारे जटिल पहलू होते हैं। कई बार संभावनाओं के बावजूद, व्यक्तिगत और व्यावसायिक कारणों की वजह से ये फिल्में ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।
इस तरह की समस्याओं का सामना करने के लिए फिल्म निर्माता और स्टूडियोज को अधिक विचारशीलता से काम लेने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, यह कहना सही होगा कि बॉलीवुड की ठंडी बस्ते में पड़ी फिल्में एक अहम विषय हैं जो न केवल फिल्म उद्योग बल्कि दर्शकों के लिए भी उत्सुकता बनाए हुए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये फिल्में कभी दर्शकों के सामने आ पाएंगी या नहीं।

