25.1 C
Delhi
Thursday, January 22, 2026

प्रियंका गांधी के बैग में छिपे राजनीतिक संकेट: फलस्तीन पर सियासत का नया मोड़

इंडियाप्रियंका गांधी के बैग में छिपे राजनीतिक संकेट: फलस्तीन पर सियासत का नया मोड़

फलों के विवाद पर मंथन: कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों का क्या है रुख?

प्रियंका गांधी वाड्रा के एक बैग पर लिखा ‘फलस्तीन’ शब्द अब भारतीय राजनीति का गरमागरम विषय बन चुका है। इस मुद्दे ने न केवल कांग्रेस को सक्रिय किया है, बल्कि भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों को भी अपनी राय व्यक्त करने पर मजबूर किया है। प्रियंका ने संसद में यह बैग लेकर जेहादियों और फलस्तीनी लोगों के प्रति एकजुटता दिखाई। हालांकि, इस कदम के बाद भाजपा ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया और प्रियंका से पूछा कि क्या वह बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भी इसी तरह की एकजुटता दिखाएंगी।

इस लेख में हम जानेंगे कि फलस्तीन के मुद्दे पर भारत का आधिकारिक पक्ष और राजनीतिक दलों की राय क्या है।

प्रियंका गांधी, जो कि कांग्रेस की महासचिव और सांसद हैं, ने सोमवार को संसद में अपने हैंडबैग पर ‘फलस्तीन’ लिखा हुआ लेकर आईं। यह कदम उन्होंने उस समय उठाया जब फलस्तीन में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो चुकी थी। उनके इस अद्भुत कदम पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया।

भारतीय राजनीति में फलस्तीन के मुद्दे पर आमतौर पर एक संवेदनशीलता देखी जाती है, और प्रियंका का यह कदम उस परिप्रेक्ष्य में खास महत्व रखता है। इस विवाद में भाजपा का रुख तीखा है, जिसने प्रियंका को बांग्लादेश का मुद्दा उठाने के लिए भी कहा है, ताकि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर ध्यान आकर्षित किया जा सके।

वास्तव में, प्रियंका का यह कदम केवल व्यक्तिगत या पार्टी की छवि बनाने के लिए नहीं था, बल्कि यह एक बड़े सियासी खेल का हिस्सा है, जिसमें लोग अपने-अपने लाभ के लिए स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस का मानना है कि फलस्तीन के लोगों के प्रति दिखाए गए समर्थन का संदेश बांग्लादेश और अन्य जगहों पर भी प्रचारित होना चाहिए। भाजपा ने इसके विपरीत, प्रियंका को तंज कसा कि उन्हें वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

फलस्तीन के मुद्दे पर भारतीय राजनीति

भारत का आधिकारिक रुख हमेशा से फलस्तीन के पक्ष में रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी फलस्तीन के अधिकारों का समर्थन किया है। लेकिन राजनीतिक दलों के भीतर इस मुद्दे पर विचारधारा भिन्नता है। जहाँ कांग्रेस फलस्तीन के अधिकारों का समर्थन करती है, वहीं भाजपा ने हमेशा से अपने रुख में अधिक सतर्कता बरती है।

वहीं, बीबीसी हिंदी के अनुसार, भाजपा ने कभी भी फलस्तीन के मामले में स्पष्ट और कट्टरपंथी रुख नहीं अपनाया।

राजनीतिक दलों के विचार

जैसा कि कहा गया, इस मुद्दे पर भारतीय राजनीति में खींचतान साफ़ दिखती है। कांग्रेस हमेशा से फलस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन करती रही है। पार्टी के नेता अक्सर इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं।

इसके विपरीत, भाजपा का रुख इससे भिन्न है। भाजपा ने हमेशा से फलस्तीन के मुद्दे की संवेदनशीलता को दर्शाते हुए इसे एक अलग ढंग से प्रस्तुत किया है। वह यह कहती रही है कि भारत अपने किसी भी मित्र देश के साथ एकता बनाते हुए दुनिया में अपने स्थान को मजबूत रखना चाहता है।

इस संदर्भ में, फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेताओं ने प्रियंका के बैग पर चर्चा करते हुए यह कहा कि यह केवल एक दिखावा है, और वास्तव में उन्हें भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

प्रियंका गांधी का बांग्लादेश का बैग

प्रियंका ने मंगलवार को संसद में एक और बैग लाया, जिसमें ‘बांग्लादेश’ लिखा हुआ था। यह उनके द्वारा अल्पसंख्यक हिंदुओं के समर्थन में उठाया गया कदम माना जा रहा है, और इस पर भी राजनीति गर्माने लगी है।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच साझा चिंताएं देखने को मिल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका का यह कदम भाजपा द्वारा उठाए गए मामले को पलटने का प्रयास हो सकता है।

खैर, अब यह देखना है कि आने वाले समय में इस मामले में क्या मोड़ आता है और क्या प्रियंका का यह प्रयास वास्तव में कुछ बदलाव ला पाएगा या नहीं।

इस प्रकार, प्रियंका गांधी का बैग केवल एक बैग नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में गहरे विचार, संवेदनाएं और भविष्य की संभावनाओं का प्रतीक है।

इसके अलावा, यदि आप इस मुद्दे पर और अधिक जानना चाहते हैं, तो आप अमर उजाला पर राजनीतिक विश्लेषण पढ़ सकते हैं।

एक बात स्पष्ट है कि यह मामला केवल एक राजनीतिक स्टंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सोच और कई सवाल छिपे हैं, जो भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles