कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें कहा गया है कि भाजपा का असली एजेंडा ‘एक राष्ट्र-कोई चुनाव’ है। इस स्थिति को लेकर पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सख्त बयान दिए हैं।
## एक राष्ट्र-एक चुनाव: भाजपा का नया प्लान या लोकतंत्र का अंत?
आज लोकसभा में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा की इस नीति के पीछे का असली मकसद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करना है। उनका कहना है कि एक राष्ट्र-एक चुनाव का विचार पूरी तरह से अव्यवहारिक है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट कहा, “भाजपा का मुख्य एजेंडा एक राष्ट्र-कोई चुनाव है। इस नीति के पीछे की मंशा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को धीरे-धीरे समाप्त करना है।” उन्होंने इस पर जोर दिया कि भारत की विविधता ही इसकी पहचान है और इस विविधता के साथ ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का विचार मेल नहीं खाता।
वेणुगोपाल ने आगे कहा, “कर्नाटक, केरल, मणिपुर और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों की अपनी विशेषताएँ हैं। यहां की विविधता इस देश की खूबसूरती है। भाजपा लोकतंत्र और विविधता में विश्वास नहीं करती।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह विधेयक संसद में पारित होगा।
वहीं, लोकसभा में आज का दिन काफी हलचलपूर्ण रहा, जहां एक साथ चुनाव कराने की चर्चा ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया। विपक्षी दलों ने इस विधेयक को संघीय ढांचे पर हमला करार दिया। हालांकि, भाजपा ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया।
## क्या है ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का मसला?
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का विचार लंबे समय से चर्चा का विषय है, जिसमें लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ आयोजित करने की योजना है। भाजपा इसे समय की मांग बता रही है, जबकि कई विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का हनन मानते हैं।
कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव के जरिए भाजपा केवल चुनावों को स्थगित करने की कोशिश कर रही है, ताकि वह अपने शासन को बिना किसी प्रतिकूलता के जारी रख सके। इससे ना सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं बाधित होंगी, बल्कि चुनावी प्रतिस्पर्धा भी कम हो जाएगी।
जैसा कि अमर उजाला की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “एक राष्ट्र-एक चुनाव” का विचार भाजपा के लिए एक नया तरीका है, जिससे वह अपनी राजनीतिक शक्ति को और अधिक मजबूत करना चाहती है।
## भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा की ओर से इस मामले पर कई नेता सामने आए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से खर्च में कमी आएगी और चुनावी प्रक्रिया को कुशल बनाया जा सकेगा। हालांकि, इसको लेकर विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह केवल एक दिखावा है और असली मकसद कुछ और है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर यह विधेयक पारित होता है, तो इससे देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। वे यह भी शिकायत कर रहे हैं कि इस विधेयक पर चर्चा से पहले ही सरकार ने इसे पेश कर दिया, जिससे उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया है।
## कांग्रेस का संकल्प
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर एक बड़ा संकल्प लिया है। वेणुगोपाल ने कहा, “हम इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेंगे और इसे संसद में पारित नहीं होने देंगे।” कांग्रेस ने सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर इस मुद्दे पर खड़ा होने की अपील की है, ताकि लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।
## आपकी क्या राय है?
यह मुद्दा भविष्य में राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन इस पर चर्चा अब व्यापक हो गई है और सभी पक्ष अपनी-अपनी बात रख रहे हैं। क्या आपको लगता है कि एक राष्ट्र-एक चुनाव का विचार भारत के लोकतंत्र को कमजोर करेगा या इसे और मजबूती देगा? अपने विचार हमें बताएं।
इस तरह के विचारों का आदान-प्रदान हमें सशक्त बनाता है और हमें अपनी राजनीतिक स्थिति को समझने में मदद करता है। अपने विचार साझा करें ताकि हम इस चर्चा को आगे बढ़ा सकें।

