बंदिश बैंडिट्स के निर्देशक आनंद तिवारी ने अपनी कला यात्रा और संगीत प्रेम के बारे में महत्वपूर्ण बातें साझा की
कौन? आनंद तिवारी, जो कि पहली ओटीटी हिंदी ओरिजिनल फिल्म ‘लव पर स्क्वायर फिट’ और पहली हिंदी म्यूजिकल वेब सीरीज ‘बंदिश बैंडिट्स’ के निर्देशक हैं। क्या? उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में की, लेकिन उनका असली शौक किस्सागोई है। कहाँ? यह बातचीत रायबरेली से मुंबई तक फैले तिवारी परिवार की पृष्ठभूमि में हुई। कब? यह बातचीत हाल ही में अमर उजाला के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल के साथ हुई। क्यों? क्योंकि आनंद तिवारी ने अपनी फिल्मों और संगीत में बागी होने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। कैसे? उन्होंने संगीत के प्रति अपने प्रेम और कला की यात्रा का वर्णन किया।
आनंद तिवारी ने अपने जीवन के सफर को एक संयोग बताया। उनका मानना है कि अभिनय उनके लिए केवल एक ‘एक्सीडेंट’ था। वह हमेशा से कहानियों का कथन करना चाहते थे। उनके शब्दों में, “जब मैं अपने अभिनय के माध्यम से दूसरों की बात कह रहा था, तब मैंने अपनी कहानी कहने की दिशा में फोकस किया। मैंने और मेरे सहयोगी अमृत ने एक कंपनी खोली, जहाँ हम अपनी बात कहने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”
संगीत का महत्व
आनंद ने संगीत के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए कहा, “संगीत हमेशा मेरे लिए महत्वपूर्ण रहा है। मेरा जीवन संगीत के बिना अधूरा है। मेरे परिवार के दो बड़े भाई निश्चित रूप से बेहद आत्मविश्वासी हैं। मैं हमेशा अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करता रहा। उसी दौरान, संगीत ने मुझे एक दिशा दी। मैंने महसूस किया कि मेरी भावनाएँ संगीत के माध्यम से बाहर आ रही हैं।”
इस संगीत प्रेम को उन्होंने अपनी वेब सीरीज ‘बंदिश बैंडिट्स’ में प्रदर्शित किया। इस श्रृंखला में काम करने वाले कलाकारों जैसे अतुल कुलकर्णी, शीबा चड्ढा और ऋत्विक भौमिक ने अद्भुत प्रदर्शन किया है। आनंद ने कहा, “हर कलाकार ने अपने पात्रों के लिए कठिन मेहनत की है। उनकी मेहनत को देखकर लोगों की प्रतिक्रियाएँ वास्तव में प्रेरणादायक हैं।”
हिंदी सिनेमा में गायन
हिंदी सिनेमा में गायकों की भूमिका पर बात करते हुए आनंद ने कहा, “ऋषि कपूर जैसे अभिनेता हैं, जिनका लिप सिंक अद्भुत था। ‘बंदिश बैंडिट्स’ के गाने रचते समय, हमने हमेशा श्रोताओं और दर्शकों के नजरिये को ध्यान में रखा।”
उन्होंने कहा कि गायन एक ऐसी विधा है, जिसे छोटे बच्चों को सिखाना शुरू करना पड़ता है। “बच्चे जल्दी सीखते हैं और जब वह कई सालों की तपस्या करते हैं, तो उनके गायन में अभूतपूर्व सरलता आती है। बड़े होने पर, यह सरलता प्राप्त करना मुश्किल होता है।”
हिंदी भाषा की उत्कृष्टता
आनंद तिवारी के जन्मस्थान मुंबई में होने के बावजूद, उनकी हिंदी में एक विशेषता है जो रंगमंच के माध्यम से विकसित हुई। “हमारा परिवार रायबरेली से आया है, लेकिन बंबइया और महाराष्ट्र की हिंदी भी घर में बोली जाती है। जब मैंने रंगमंच पर काम करना शुरू किया, तो मैंने महसूस किया कि मेरी हिंदी बहुत बुरी थी। मुझे लगा कि अगर मुझे इस भाषा में काम करना है, तो मुझे इसे सुधारना पड़ेगा।”
बागी आत्मा का महत्व
आनंद तिवारी का मानना है कि हर कलाकार में थोड़ी बागी आत्मा होनी चाहिए। यह बागीपन उन्हें नए प्रयोग करने और कला में नवीनता लाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा, “कला में बागी होना आवश्यक है। यह हमें हमारे कार्यों में स्वतंत्रता और निर्माण की शक्ति देता है।”
हाल ही में, आनंद ने ‘बंदिश बैंडिट्स’ के लिए माफी भी मांगी, यह कहते हुए कि वह इसके नाम को लेकर कुछ चिंतित हैं।
समुदाय से जुड़ाव
आनंद तिवारी ने अपने अनुभवों के साथ-साथ अपने समुदाय के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी साझा किया। उन्होंने कहा, “एक कलाकार को हमेशा अपने समाज के प्रति जागरूक रहना चाहिए। कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि समाज को भी जागरूक करना है।”
आनंद तिवारी के विचारों का छलकता ज्ञान और उनके अनुभव एक प्रेरणा के रूप में कार्य करते हैं। वह न केवल एक निर्देशक हैं, बल्कि कला के प्रति उनकी प्रेम और उसके प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक असाधारण कलाकार बनाती है। उनकी कला यात्रा और संगीत के प्रति उनकी निष्ठा निश्चित रूप से उन्हें और उनके काम को अद्वितीय बनाती है।
आने वाले प्रोजेक्ट्स
आनंद तिवारी ने यह भी बताया कि वे भविष्य में और भी नई परियोजनाओं पर काम करने की योजना बना रहे हैं। “हम अपनी कंपनी के माध्यम से और भी कहानियों को लाना चाहते हैं। हमारा उदेश्य है कि हम लोगों के दिलों को छू सकें और नई सोच को सामने ला सकें।”
इस प्रकार, आनंद तिवारी की कहानी केवल एक कलाकार की नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की है जो अपने विश्वासों और मूल्यों को अपने कार्यों में समाहित करता है। उनकी कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी प्रयास है।

