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Wednesday, January 21, 2026

संध्या सूरी की फिल्म ‘संतोष’: जातिवाद और सांस्कृतिक संघर्षों की अनकही कहानी

कला एवं मनोरंजनसंध्या सूरी की फिल्म 'संतोष': जातिवाद और सांस्कृतिक संघर्षों की अनकही कहानी

संध्या सूरी ने हाल ही में अपनी नई फिल्म ‘संतोष’ के बारे में अमर उजाला के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल के साथ खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने पारिवारिक इतिहास, भारत के प्रति अपने संबंध और फिल्म की सामाजिक पृष्ठभूमि पर चर्चा की। उनकी फिल्म को इस साल ऑस्कर में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संक्षिप्त जानकारी: संध्या सूरी और उनकी फिल्म ‘संतोष’

कौन: संध्या सूरी, एक फिल्म निर्देशक जो ब्रिटेन में पली-बढ़ी हैं।
क्या: उनकी फिल्म ‘संतोष’ जातिवाद, भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दों को उजागर करती है।
कहां: फिल्म की कहानी गाजियाबाद, मेरठ और चिराग प्रदेश (उत्तर प्रदेश) में आधारित है।
कब: फिल्म अगले महीने भारत में रिलीज होगी।
क्यों: फिल्म का उद्देश्य सामाजिक मुद्दों को दर्शकों के समक्ष लाना है।
कैसे: संध्या ने अपनी फिल्म के लिए गहन शोध किया है और इसे अपने अनुभव के आधार पर लिखा है।

संध्या सूरी ने कहा कि उनके पिता 1965 में मेरठ से ब्रिटेन आए थे, लेकिन उनका भारत से गहरा संबंध बना रहा। उन्होंने बताया कि वहीं से उनके अंदर भारतीय संस्कृति और समाज के प्रति एक गहरी रुचि पनपी। “जब मैं वापस आई तो लोगों की नजरें मेरे शरीर पर होती थीं,” उन्होंने इस अनुभव को साझा करते हुए बताया।

फिल्म ‘संतोष’ के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक मनोरंजन नहीं है, बल्कि एक सच्चाई है जो समाज के काले पहलुओं को उजागर करती है। उन्होंने कहा, “इसमें गाजियाबाद को ‘गाजिलियाबाद’, मेरठ को ‘नेहरट’ और उत्तर प्रदेश को ‘चिराग प्रदेश’ के रूप में दिखाने का एक उद्देश्य था। मैं नहीं चाहती थी कि लोग इस फिल्म के स्थानों पर बहस करें, बल्कि इसकी विषय वस्तु पर ध्यान केंद्रित करें।”

संध्या ने अपनी फिल्म के लिए लगभग 10 वर्षों तक शोध किया है। उनका कहना है कि इस फिल्म का उद्देश्य दर्शकों को मानवता के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराना है। “मैंने डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए बहुत रिसर्च की है, और इस फिल्म के लिए भी मेरा तरीका वही है,” उन्होंने स्पष्ट किया।

समाज में जातिवाद और जन जागरूकता

फिल्म ‘संतोष’ में जातिवाद और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर गहराई से बात की गई है। संध्या का कहना है कि ये मुद्दे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मौजूद हैं। “भ्रष्ट पुलिस सिर्फ भारत की समस्या नहीं है। यह एक वैश्विक मुद्दा है,” उन्होंने कहा।

संध्या ने बताया कि उनकी दो बहनें भारत से उतनी जुड़ी नहीं हैं, लेकिन उनका स्वयं का संबंध भारत से गहरा है। “मैं भारत जाते समय हमेशा कैमरा लेकर जाती हूं। यह मेरे लिए एक माध्यम है जिससे मैं भारत को समझ सकूं,” उन्होंने कहा।

इस दौरान, फिल्म ‘संतोष’ में शहाना गोस्वामी के भूमिका के बारे में भी चर्चा हुई। संध्या ने कहा कि उन्होंने इस किरदार के लिए किसी विशेष अभिनेत्री को नहीं लिखा, बल्कि उन्होंने एक जटिल और भावुक किरदार का निर्माण किया है। “यह एक महत्वाकांक्षी महिला का कहानी है जो अपने अंदर एक भूख और संघर्ष को समेटे हुए है,” उन्होंने बताया।

संध्या सूरी का भारतीय सिनेमा के प्रति योगदान

संध्या की फिल्म ‘संतोष’ न केवल भारतीय सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है, बल्कि यह समाज में महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी प्रदर्शित करती है। उनकी कहानी में गहराई और शोध का स्तर इस बात का संकेत है कि वह भारतीय सिनेमा में एक नई दिशा देने की कोशिश कर रही हैं।

वे कहती हैं, “मैं चाहती हूं कि लोग मेरी फिल्म को देखने के बाद सोचें और समाज के बारे में अपने दृष्टिकोण को बदलें।” उनका उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि दर्शकों को सोचने पर मजबूर करना है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह फिल्म अगले महीने भारत में पीवीआर आइनॉक्स के जरिए रिलीज होने जा रही है। इसके साथ ही, फिल्म को ऑस्कर पुरस्कारों के लिए अंतिम 15 में स्थान मिला है, जो कि संध्या के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

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