नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके स्मारक की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। इस बीच, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस के प्रति अपनी निराशा व्यक्त की है। उनके अनुसार, कांग्रेस ने उनके पिता के निधन पर कोई शोक सभा आयोजित नहीं की, जबकि यह शोक सभा उनके योगदान और विरासत का सम्मान करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता था।
कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?
कौन: यह विवाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और शर्मिष्ठा मुखर्जी के बीच चल रहा है।
क्या: मनमोहन सिंह के निधन के बाद कांग्रेस ने उनके सम्मान में स्मारक बनाने की मांग की है, वहीं शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस की आलोचना की है।
कहाँ: यह विवाद नई दिल्ली में चल रहा है, जहाँ मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर किया जाएगा।
कब: मनमोहन सिंह का निधन हाल ही में हुआ है, और इसकी सूचना शनिवार को मिली थी।
क्यों: क्योंकि कांग्रेस ने उनके पिता प्रणब मुखर्जी के निधन के समय किसी भी प्रकार की शोक सभा आयोजित नहीं की, जिससे शर्मिष्ठा मुखर्जी को दुख हुआ है।
कैसे: शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह बात सोशल मीडिया पर साझा की, जहां उन्होंने लिखा कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाने की जहमत भी नहीं उठाई गई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के सम्मान में स्मारक निर्माण का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के स्मारक बनाने की परंपरा रही है और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं का सम्मान करना आवश्यक है।
इस विवाद में भाजपा के नेता सीआर केसवन ने भी कांग्रेस की आलोचना की, खासकर पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का स्मारक न बनाए जाने का हवाला देकर।
प्रणब मुखर्जी की बेटी का दर्द
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने ट्वीट में लिखा, “जब बाबा का निधन हुआ, तो कांग्रेस ने शोक सभा के लिए कार्यसमिति की बैठक बुलाने की भी जहमत नहीं उठाई।” उन्होंने आगे कहा कि एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें बताया कि यह राष्ट्रपति के लिए नहीं किया जाता है, जो कि बकवास है।
शर्मिष्ठा ने याद दिलाया कि केआर नारायणन के निधन पर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाई गई थी और शोक संदेश भी तैयार किया गया था।
चर्चा इस बात पर भी है कि मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार और स्मारक के लिए उचित स्थान का चयन नहीं किया गया है, जिससे उनका अपमान हो रहा है।
अंतिम संस्कार का स्थान
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर पूरा राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। यह स्थान उनके योगदान को याद करने का एक माध्यम भी है।
इस बीच, कांग्रेस ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि क्या यह सही स्थान है, विशेषकर पहले सिख प्रधानमंत्री के लिए।
इस प्रकार, मनमोहन सिंह का स्मारक विवाद न केवल परिवारिक दृष्टिकोण से बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
रुख बदलती राजनीति
इस विवाद के चलते राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। यह देखा जाना बाकी है कि कांग्रेस कैसे अपने कार्यकर्ताओं और जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर अपनी स्थिति को मजबूत करती है और क्या वे शर्मिष्ठा मुखर्जी की चिंताओं का समाधान कर पाएंगी।
इस विवाद के माध्यम से साफ है कि राजनीतिक दलों को अपने नेताओं और उनके योगदान की सराहना करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए ताकि किसी के योगदान को कभी भी नजरअंदाज न किया जाए।

