अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित बांग्लादेश की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि न्यायपालिका का उपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। उन्होंने यह आरोप मोहम्मद युनूस की सरकार पर लगाया है, जो कि एक गैर निर्वाचित सरकार है। शनिवार को एक ट्वीट में वाजेद ने स्पष्ट किया कि यह सरकार अवामी लीग के नेताओं को सताने के लिए न्यायपालिका का इस्तेमाल कर रही है।
क्या हुआ, कहाँ, कब और क्यों?
शेख हसीना का मुद्दा: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जो पिछले कुछ महीनों से भारत में हैं, ने पांच अगस्त को अपने देश में बड़े पैमाने पर हुए छात्र नेतृत्व वाले विद्रोह के बीच अपने देश छोड़ने का निर्णय लिया। विद्रोह के दौरान हिंसक घटनाओं में कई लोग घायल हुए और 753 मारे गए।
राजनयिक नोट का मामला: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हाल ही में भारत को एक राजनयिक नोट भेजकर शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। इस नोट में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि उन पर क्या आरोप हैं, लेकिन वाजेद का कहना है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की एक नई कोशिश है।
आरोपों की गंभीरता: वाजेद ने कहा कि न्यायपालिका को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि अवामी लीग के नेताओं को नुकसान पहुँचाया जा सके। उन्होंने न्यायाधिकृत जांच को हास्यास्पद बताया और कहा कि यह एक राजनीतिक गिरफ्तारी का प्रयास है।
कैसे और क्या हो रहा है? सजीब वाजेद का कहना है कि यूज द्वारा नियुक्त जज और अभियोजक अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के द्वारा हास्यास्पद जांचों का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई स्वतंत्र मानवाधिकार उल्लंघनों की घटनाएँ हुई हैं और अब देश में न्यायपालिका पर विश्वास करना कठिन हो गया है।
सिर्फ आरोप नहीं, घटनाओं की झलक
वाजेद ने अपने ट्वीट में यह संकेत दिया कि 22 दिसंबर को आईसीटी न्यायाधिकरण के एक मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने जानबूझकर शेख हसीना के खिलाफ गलत जानकारी दी। उन्होंने यह दावा किया कि इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया है, जबकि यह एक झूठ था। जब मीडिया में यह झूठ उजागर हुआ तो अभियोजक ने अपना बयान बदल दिया।
बांग्लादेश की न्यायिक स्थिति: वर्तमान में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ 225 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 194 हत्या, 16 नरसंहार और 3 अपहरण के मामले शामिल हैं। यह सारी घटनाएँ बांग्लादेश के राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बनाती हैं।
क्या आगे हो सकता है? शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने संपूर्ण मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। जबकि मौजूदा सरकार पर बदले की भावना से कार्य करने का आरोप लगाया गया है।
आगे की दिशा: क्या न्यायपालिका पर भरोसा किया जा सकता है?
बांग्लादेश की राजनीति में यह घटनाक्रम ध्यान आकर्षित कर रहा है। सजीब वाजेद का यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यदि सरकार अपनी कार्रवाई में बदलाव नहीं करती है, तो राजनीतिक संकट और गहरा हो सकता है।
इसके अलावा, शेख हसीना की वापसी और अंतरिम सरकार के खिलाफ संघर्ष को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है।

