सिद्धू के रुतबे का रहस्य: युवाओं के सपनों को दिखाने वाला एक खतरनाक चेहरा
पीलीभीत में हाल में हुए एक एनकाउंटर ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। यहाँ मारे गए तीन आतंकियों में से एक कुलबीर सिंह सिद्धू था, जिसका सीधा संबंध बब्बर खालसा नामक आतंकवादी संगठन से था। सिद्धू ने युवाओं को विदेश जाने का सपना दिखाया और उन्हें अपने साथ जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क बना रखा था। इस एनकाउंटर ने सिद्धू के प्रभाव और उनकी जिंदगी के अंधेरे पहलू को उजागर किया है।
कौन? क्या? कहाँ? कब? क्यों? और कैसे?
पीलीभीत जिले के पूरनपुर में पुलिस ने जब एनकाउंटर किया, तब वहां तीन आतंकवादी मारे गए। इनमें कुलबीर सिंह सिद्धू शामिल था, जिसका संबंध इंग्लैंड में बैठे एक मददगार से था। सिद्धू ने युवाओं को विदेश जाने का सपना दिखाकर उनका ध्यान खींचा था। गांव गजरौला जप्ती में रहने वाला सिद्धू, कोरोना काल में गांव वालों के साथ घुलमिल गया था और अपनी दबंगई एवं रुतबे के बल पर एक खतरनाक गैंग बना लिया था। वह क्रिकेट खेलने जैसे सामान्य गतिविधियों में शामिल होकर युवाओं का विश्वास जीत रहा था।
आसपास के गांवों के लोग बताते हैं कि सिद्धू ने अपने प्रभाव से युवाओं में एक प्रकार की आस्था और उम्मीद जगाई थी। उसकी नजर में युवाओं का विदेश जाना केवल एक सपने से ज्यादा कुछ नहीं था, बल्कि यह उसे शक्ति, सम्मान और रुतबा दिलाने का एक जरिया था।
सिद्धू के रिश्तेदारों और उनके जीवन पर प्रभाव
कुलबीर सिंह सिद्धू का उभरता हुआ रुतबा गांव के एक पूर्व प्रधान के घर में रहने के दौरान और भी बढ़ गया। सिद्धू का संपर्क उस प्रधान के देवर से हुआ, जो दिल्ली एयरपोर्ट पर कार्यरत था। इस रिश्ते ने सिद्धू को गांव में एक अलग पहचान दी। उसने गांव के युवाओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया, जिससे उसका प्रभाव और भी बढ़ गया।
जसपाल उर्फ सनी, जो कि सिद्धू का करीबी ऐसा सहयोगी था, उसकी ज़िंदगी में भी बदलाव आया। सनी, जो पहले बेरोजगार था, अब अपने रहन-सहन में बदलाव देख रहा था। उसके पास अब बुलेट बाइक, महंगा मोबाइल और अन्य चीजें थीं। यह सब सिद्धू के प्रभाव से ही संभव हुआ।
गांव के युवाओं को कैसे लुभाता था सिद्धू
सिद्धू ने गांव के युवाओं को लुभाने का एक अनोखा तरीका अपनाया। वह खेल-कूद, पार्टी, और खाने-पीने में खूब खर्च करता था। इससे गांव के युवा उसकी ओर आकर्षित हो गए। सिद्धू का यही तरीका उसे गांव में एक खतरनाक नेता बना रहा था।
जसपाल सिंह सनी भी सिद्धू के संपर्क में आने के बाद से गहरे बदलाव का शिकार हुआ। वह अब गांव के युवाओं पर खर्च करता था, और अक्सर उन्हें साथ में ले जाकर दावतें देता था। इससे युवा उसे अपना आदर्श मानने लगे थे।
सिद्धू का विवाद
सिद्धू का एक घटना के दौरान गांव में विवाद भी हुआ। एक दिन गांव में भाजपा नेता के चुनावी पोस्टर फाड़ने पर सिद्धू ने विवादित स्थिति उत्पन्न कर दी थी। उसने स्थानीय लोगों पर रौब डालकर जसवंत नामक युवक को खरी-खोटी सुनाई थी। इसने सिद्धू के आतंक और दबंगई के रुतबे को स्पष्ट किया।
एनकाउंटर के परिणाम
पुलिस द्वारा किए गए इस एनकाउंटर ने सिद्धू के खतरनाक चेहरे को उजागर किया है। कुलबीर सिंह सिद्धू का आतंकवाद से जुड़े होना और युवाओं को लालच देकर अपने साथ जोड़ना, यह एक गंभीर मुद्दा बन गया है।
इस एनकाउंटर के बाद पुलिस ने चेतावनी दी है कि युवाओं को ऐसे व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए, जो उन्हें गलत रास्ते पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। सिद्धू जैसे लोग केवल युवाओं के जीवन में अंधेरा लाते हैं।
पीलीभीत एनकाउंटर ने सिद्धू के प्रभाव, उसके द्वारा किए गए अपराध और युवाओं के सपनों को तोड़ने की सच्चाई को उजागर किया है। युवा वर्ग को अब समझना होगा कि ऐसे व्यक्तियों से दूर रहना ही बेहतर है जो उन्हें केवल अपने स्वार्थ के लिए उपयोग कर रहे हैं।

