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Thursday, January 22, 2026

नेहरू पत्र विवाद: क्या गांधी परिवार ने छिपाई हैं ऐतिहासिक सच्चाइयाँ?

इंडियानेहरू पत्र विवाद: क्या गांधी परिवार ने छिपाई हैं ऐतिहासिक सच्चाइयाँ?

नई दिल्ली में सियासी घमासान: पीएम संग्रहालय से नेहरू पत्रों की मांग पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखे गए व्यक्तिगत पत्रों को वापस करने का अनुरोध किया है। ये पत्र 2008 में यूपीए शासन के दौरान सोनिया गांधी को भेजे गए थे। जब से यह मामला प्रकाश में आया है, सियासी विवाद तेज हो गया है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए पूछा है कि उन पत्रों में ऐसा क्या है जिसे गांधी परिवार देश को नहीं बताना चाहता।

कौन है मामला: पीएम संग्रहालय ने पत्रों को वापस करने का किया अनुरोध

पीएमएमएल के सदस्य रिजवान कादरी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर उनसे सोनिया गांधी से पत्रों को वापस लाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह पत्र सार्वजनिक संपत्ति हैं और इन्हें जनहित में वापस किया जाना चाहिए। कादरी ने स्पष्ट किया है कि ये पत्र नेहरू जी के ऐतिहासिक अभिलेख हैं, जिन्हें अपार महत्व दिया जाना चाहिए।

कहाँ से आया यह विवाद: नेहरू पत्रों का संग्रहालय में रखा जाना

नेहरू जी के पत्र पहले नेहरू मेमोरियल के पास रखे गए थे। ये पत्र 1971 में नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी को सौंपे गए थे, जो अब पीएम मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता है। इन पत्रों में नेहरू जी का विभिन्न वैश्विक नेताओं के साथ संवाद और पत्राचार शामिल हैं।

कब हुआ यह घटनाक्रम: सोनिया गांधी के कार्यकाल में पत्रों का संग्रहण

2008 में, जब सोनिया गांधी यूपीए की अध्यक्ष थीं, तो उन्होंने इन पत्रों को संग्रहालय से बाहर ले जाने का निर्णय लिया। इस पर सवाल उठाते हुए भाजपा सांसद पात्रा ने कहा कि उनके पास ऐसा क्या था जो वे देश के सामने लाना नहीं चाहते।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है: ऐतिहासिक पत्रों का महत्व

पंडित नेहरू के ये पत्र भारतीय इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें नेहरू जी और एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, जयप्रकाश नारायण, और अन्य प्रमुख व्यक्तित्वों के बीच की बातचीत शामिल है। ये पत्र नेहरू जी के विचारों और उनकी समय की राजनीतिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कैसे आगे बढ़ेंगी घटनाएँ: कांग्रेस की भूमिका पर सवाल

संबित पात्रा ने राहुल गांधी से भी सवाल किया कि वे इस मामले में क्या कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि क्या राहुल गांधी सोनिया गांधी से इस विषय में बातचीत करेंगे? लोग जानना चाहते हैं कि नेहरू जी ने एडविना माउंटबेटन को क्या लिखा था।

क्या है कांग्रेस की मंशा: धुंधला इतिहास?

संबित पात्रा ने सवाल उठाया कि जब 2010 में इन सभी दस्तावेजों को डिजिटल करने का निर्णय लिया गया था, तो सोनिया गांधी ने उन पत्रों को क्यों अपने पास रखा? उनका कहना है कि इस मुद्दे के पीछे कांग्रेस की मंशा क्या है, यह जानना जरूरी है।

नेहरू के पत्रों का संघर्ष: संग्रहालय और गांधी परिवार

इस पूरे मामले में कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए पात्रा ने कहा, “क्या यह सही है कि लोग केवल इसलिए इन पत्रों के बारे में जानने से वंचित रहें क्योंकि गांधी परिवार उन पर पर्दा डालना चाहता है?” ये पत्र न सिर्फ नेहरू जी की सोच को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के समय क्या सोच रखा था।

पीएमएमएल की स्थिति और पत्रों की वापसी

पीएमएमएल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ये पत्र उनकी संपत्ति हैं और इन्हें उचित तरीके से जनता के सामने लाया जाना चाहिए। सितंबर में भी सोनिया गांधी को इसी तरह का पत्र भेजा गया था जिसमें इन पत्रों की महत्ता पर जोर दिया गया था।

नेहरू मेमोरियल की ऐतिहासिकता

नेहरू मेमोरियल में पंडित नेहरू के महत्वपूर्ण अभिलेखों का संग्रह है। 1971 में जब ये पत्र संग्रहालय में दिए गए थे, तब से ये देश के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में माने जाते रहे हैं।

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