पारिवारिक समस्याओं और निजी जीवन की परेशानियों पर खुलकर बात करते हुए अभिनेता अर्जुन कपूर ने हाल ही में अपने माता-पिता के अलगाव के अनुभवों को साझा किया। बोनी कपूर और मोना शौरी के बेटे अर्जुन, जिंदगियों में आए बदलाव और अपने संघर्षों के दौरान पाई समझदारी के बारे में चर्चा करते नजर आए हैं। उनका यह बयान न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभवों को उजागर करता है, बल्कि उन बच्चों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है जो ऐसे ही कठिन समय से गुजर रहे हैं।
किसने, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?
अर्जुन कपूर ने अपने माता-पिता के अलगाव की चर्चा करते हुए बताया कि यह उनके लिए कैसे चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। वह मात्र 10 साल के थे जब उनके माता-पिता ने 1996 में तलाक लिया। उनका कहना है, “जब मैं इस स्थिति का सामना कर रहा था तब मेरे पिता बड़ी फिल्मों में व्यस्त थे। इस दौरान मुझे अकेले ही कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।”
उन्हें इस समय का प्रभाव काफी गहरा महसूस हुआ, जो कि उनके विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह कठिनाई उन्हें अधिक समझदार और जिम्मेदार बना गई। अपने पिता की फिल्म निर्माण की व्यस्तता की वजह से अर्जुन को अपने पिता के साथ समय बिताने का अवसर नहीं मिला।
अर्जुन कपूर ने आगे कहा कि पहले-पहल उन्हें नहीं लगता था कि ऐसा कुछ स्थायी प्रभाव डालेगा, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखने पर वह समझते हैं कि इसका असर उनके जीवन पर पड़ा।
पिता की व्यस्तता का असर
अर्जुन ने बताया कि जब उनके माता-पिता का तलाक हो रहा था, तब बोनी कपूर ‘प्रेम’ और ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ जैसी बड़ी फिल्मों में व्यस्त थे। इस व्यस्तता ने पिता-पुत्र के बीच उन छोटे-छोटे पलों को समाप्त कर दिया, जैसे कि स्कूल छोड़ना और लाना। अर्जुन ने बताया कि इस समय उनके पिता पर फिल्मों को पूरा करने का भारी दबाव था, जिससे वे परिवार के साथ समय नहीं बिता पाए।
हालाँकि, अर्जुन ने कहा कि इन सबके बावजूद उनके पिता ने प्रयास किया था, लेकिन यह स्थिति उनके रिश्ते को सामान्य बनाते हुए समय-समय पर दूर करती रही।
आज के समय में रिश्तों में सुधार
आज अर्जुन कपूर अपने पिता के करीब हैं और उन्होंने इस रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए काफी मेहनत की है। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने और उनके पिता ने एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताया है और इसका सकारात्मक प्रभाव उनके रिश्ते पर पड़ा है। वह कहते हैं, “हमारा रिश्ता काफी बेहतर हुआ है और हम एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता रहे हैं।”
अर्जुन के अनुसार, कठिन समय में उनके और उनके पिता के रिश्ते को मजबूती मिली है, जिसने वर्षों से चली आ रही दूरियों को पाटने में मदद की है।
बहन को संभालने का दायित्व
अपने अनुभवों को साझा करते हुए अर्जुन ने बताया कि माता-पिता के अलगाव ने उन्हें एक जिम्मेदार भाई बनने के लिए मजबूर कर दिया। इस कठिन समय में उन्हें अपनी छोटी बहन अंशुला का सहारा बनना पड़ा। उन्होंने अपनी बहन का ख्याल रखा और उसे इस कठिन समय से गुजरने में मदद की।
अर्जुन कपूर ने अपनी बहन की भावनात्मक स्थिति को समझा और उसे सहारा दिया, जो कि एक बड़े भाई के रूप में उनका कर्तव्य था।
वर्क फ्रंट
अर्जुन कपूर का वर्क फ्रंट भी काफी व्यस्त है। हाल ही में उनकी फिल्म ‘सिंघम अगेन’ रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने डेंजर लंका के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अर्जुन कपूर का यह बयान न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ परिवार के रिश्तों की बारीकियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे कठिन समय हमें मजबूत और समझदार बना सकता है।

