संसद में अमित शाह की टिप्पणी ने विपक्ष को किया लामबंद
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद में डॉ. भीमराव आंबेडकर के संबंध में की गई टिप्पणी ने राजनीतिक वातावरण में हलचल मचा दी है। इस टिप्पणी के बाद, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी और शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अमित शाह पर तीख़ा हमला किया है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि अमित शाह की टिप्पणी ने भाजपा की जातिवाद और दलित विरोधी मानसिकता को उजागर किया है। टीएमसी द्वारा जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि शाह की टिप्पणी को अपमानजनक माना गया है, जिससे उन लाखों लोगों का अपमान होता है जो आंबेडकर को मार्गदर्शक मानते हैं।
ममता बनर्जी ने किया तीखा प्रहार
ममता बनर्जी ने कहा, “जब संसद भारतीय संविधान के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रही है, तब गृह मंत्री ने आंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करके इस अवसर को कलंकित करने का विकल्प चुना।” उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी भाजपा की असली मानसिकता को दर्शाती है। ममता ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह न केवल एक गलती थी बल्कि दलित समुदाय के प्रति भाजपा की गहरी अवमानना का परिणाम था।
टीएमसी ने मांगी बिना शर्त माफी
टीएमसी ने अमित शाह से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। पार्टी ने कहा कि शाह की बातों में कोई संदेह नहीं है कि यह एक जानबूझकर किया गया घिनौना हमला था। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा को जाति वर्चस्व और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाली पार्टी करार दिया।
उद्धव ठाकरे का भाजपा पर हमला
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अमित शाह की टिप्पणी भाजपा के अहंकार को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को शाह के खिलाफ कड़ा कदम उठाना चाहिए। उद्धव ने यह भी कहा कि भाजपा अपने सहयोगी दलों से सहमति मांगें कि क्या वे शाह की टिप्पणियों से सहमत हैं या नहीं।
उद्धव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने डॉ. आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों का अपमान किया है। उन्होंने कहा, “शाह बिना RSS के समर्थन के इस तरह की टिप्पणी नहीं कर सकते थे।”
आंबेडकर पर टिप्पणी का प्रभाव
अमित शाह की यह टिप्पणी उनकी पार्टी की दलित और जातिवाद के प्रति नजरिए का एक आभास देती है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह टिप्पणी भाजपा के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें वे केवल अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए समाज के कुछ वर्गों का अपमान करने में संकोच नहीं करते।
विपक्ष का एकजुट होना
इस घटना ने विपक्ष को एकजुट किया है, और अब यह देखने वाली बात होगी कि इस मुद्दे पर संसद में आगे क्या कार्यवाही होती है। ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे प्रमुख नेताओं के हमलों ने यह सुनिश्चित किया है कि यह विषय आने वाले समय में राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखेगा।
अमित शाह की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब यह देखना बाकी है कि अमित शाह इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। उनके द्वारा उठाए गए कदम और विपक्ष की प्रतिक्रिया राजनीति के इस खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
समाज में आंबेडकर का योगदान
डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय समाज के एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने हैं। उनका जीवन और कार्य दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उनकी विचारधारा आज भी समाज में प्रभावी है और कई लोग उन्हें प्रेरणास्त्रोत मानते हैं।
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