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Thursday, January 22, 2026

लोकसभा चुनाव में प्रवासी मतदाताओं की कमी ने बढ़ाई चिंता, मतदान में दिखा कमजोर उत्साह

इंडियालोकसभा चुनाव में प्रवासी मतदाताओं की कमी ने बढ़ाई चिंता, मतदान में दिखा कमजोर उत्साह

दिल्ली: प्रवासी भारतीय मतदाताओं की भागीदारी में गिरावट, चुनाव आयोग के आंकड़े चौंकाने वाले

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार, प्रवासी भारतीय मतदाताओं की भागीदारी में कमी आई है, जो आगामी लोकसभा चुनावों के संदर्भ में एक चिंता का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में प्रवासी मतदाताओं की संख्या कम रही है। आंकड़ों के मुताबिक, 1.2 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों ने मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराया था, लेकिन मतदान के लिए केवल कुछ ही लौटे।

क्या कहते हैं आंकड़े

चुनाव आयोग के अनुसार, इस वर्ष 2024 में प्रवासी मतदाताओं के रूप में कुल 1,19,374 लोग पंजीकृत हुए, जिनमें से केरल में सबसे अधिक 89,839 लोग शामिल थे। हालांकि, इस साल हुए लोकसभा चुनाव में केवल 2,958 प्रवासी मतदाता भारत आए, जिनमें से अकेले केरल से 2,670 मतदाता थे। अन्य बड़े राज्यों जैसे कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में प्रवासी मतदाताओं ने मतदान करने की कोई कोशिश नहीं की। उदाहरण के लिए, गुजरात में केवल 885 प्रवासी मतदाता वोट देने आए, जबकि महाराष्ट्र में 5,097 एनआरआई मतदाताओं में से मात्र 17 ने ही मतदान किया।

क्यों हो रहा है ऐसा?

वर्तमान चुनावी कानून के अनुसार, पंजीकृत प्रवासी मतदाताओं को अपने संबंधित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में आकर वोट डालना पड़ता है। उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए मूल पासपोर्ट दिखाना आवश्यक होता है। यह प्रक्रिया कई प्रवासी भारतीयों के लिए कठिनाई पैदा कर रही है। आंध्र प्रदेश में 7,927 पंजीकृत प्रवासी मतदाताओं में से केवल 195 ने मतदान किया, जबकि असम में 19 पंजीकृत मतदाताओं में से कोई भी नहीं आया।

डाक मतपत्रों की सुविधा की कमी

2018 में लोकसभा ने प्रवासी भारतीयों के लिए प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार देने के लिए एक विधेयक पारित किया, लेकिन यह विधेयक अभी तक राज्यसभा में नहीं लाया गया है। चुनाव आयोग ने भी केंद्रीय कानून मंत्रालय को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित डाक मतपत्र प्रणाली का प्रस्ताव दिया था, लेकिन यह सुविधा केवल सेवारत मतदाताओं के लिए ही उपलब्ध है। प्रवासी मतदाताओं के लिए इस सुविधा का लाभ लेने के लिए चुनाव नियमों में संशोधन की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

प्रवासी मतदाताओं की कम भागीदारी के कारण

चुनाव आयोग ने बताया है कि प्रवासी भारतीयों ने डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान की सुविधा के लिए कई अनुरोध किए हैं। हाल के वर्षों में प्रवासी भारतीयों ने यात्रा लागत, विदेश में रोजगार की मजबूरी और शिक्षा के कारण भारत वापस आने में असमर्थता जताई है। यह मुद्दा आगामी चुनावों में प्रवासी मतदाताओं की भागीदारी को और कम कर सकता है।

क्या हो सकती हैं संभावित समाधान?

इस स्थिति के समाधान के लिए चुनाव आयोग ने सुझाव दिया है कि सरकार को प्रवासी मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों की सुविधा प्रदान करने के लिए आवश्यक कानून में संशोधन करना चाहिए। अगर इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तो भविष्य में प्रवासी भारतीयों की भागीदारी और भी कम हो सकती है।

केरल के 2,670 प्रवासी मतदाता भारत वापस आकर मतदान करने के लिए उचित समय निकालने में सक्षम हुए, जबकि अन्य राज्यों में यह संख्या बहुत कम रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रवासी मतदाताओं की भागीदारी में कमी समाजिक और आर्थिक कारणों की वजह से हो रही है।

कुल मिलाकर, हाल के लोकसभा चुनावों में प्रवासी मतदाताओं की भागीदारी में कमी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि प्रवासी मतदाता, जो पहले मतदान के प्रति सक्रिय थे, अब विभिन्न कारणों से मतदान के लिए वापस नहीं आ रहे हैं। यदि भविष्य में प्रवासी मतदाताओं को अपने अधिकारों का सही तरीके से उपयोग करना है, तो सरकारी स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

 

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